​​​​​​​प्रकृति से जुड़ाव रखें अलगाव नहीं:डॉ मुरलीधर रावत

​​​​​​​प्रकृति से जुड़ाव रखें अलगाव नहीं:डॉ मुरलीधर रावत

कबरई-महोबा:- आज गुरुवार को महाविद्यालय में पर्यावरण प्रदूषण बचाव हेतु वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पर्यावरण संरक्षक डॉ मुरलीधर रावत परमण संरक्षक एवं सम्पादक ज्ञानेंद्र रावत एवं महाविद्यालय के प्रबंधक अरविंद सिंह कछवाहा के संरक्षण में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया

जिसमें ज्ञानेंद्र रावत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए ग्लोबल वार्मिंग बंजर भूमि होती जमीन पर्यावरण विकास का दुष्परिणाम बताया साथ ही उन्होंने कहा कि आज से 50 वर्ष पहले हवा पानी त्वचा रोग अन्य विकार उत्पन्न नहीं होते थे देश की सबसे बड़ी मोच दायिनी पवित्र सलिला गंगा का जल शुद्ध होता था लेकिन आज के परिवेश में 20 पर्सेंट मैली हो गई है

नदियों को पवित्र बनाए रखने के लिए कुम्भ और  मेलों का आयोजन पवित्र बनाए रखने के लिए किया जाता था किंतु वही खतरनाक साबित हुआ क्योंकि हम प्रकृति को उपासक नहीं बना पाए हैं इसलिए जीवन विषम हो गया है समय पर उपचार नहीं किया तो हमें अभिशाप झेलना पड़ेगा

अंत में उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव रखें अलगाव नहीं वही भाभा अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक तथा पर्यावरण विद डॉ मुरलीधर रावत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए इसकी शुरुआत तीन बार ओम आवाहन कराके बच्चों की बाधा विविधा दूर की।इस दौरान महाविद्यालय के निदेशक अभयवीर सिंह,प्राचार्य डॉ ज्ञान सिंह,अनिल कटियार,सुरेश कुशवाहा,डॉ राजेश सिंह,देवेंद्र सिंह,राखी बाजपेयी सहित छात्र छात्रायें उपस्थिति रहे।

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