क्या है सरकार की जिम्मेदारी

क्या है सरकार की जिम्मेदारी

पिछले कुछ दिनों से देश में हो रहे  अपराध एवं महिलाओं के प्रति बेहद घिनौने कृत्यों को सुनकर बेहद  स्तब्ध एवं बहुत दुखी हूं!
 
क्या हम आम  नागरिकों की खासकर पुरुषों की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती           

 क्या ? हम अपने देश को किस सदी में ले जा रहे हैं!
 और सारे अपराधों के लिए हम सरकारों को जिम्मेदार ठहरा देते हैं!!

मानता हूं कि सरकार की जिम्मेदारी गुड गवर्नेंस एवं संविधान के मुताबिक शासन चलाने की जिम्मेदारी होती है और सभी  वर्ग को लेकर चलने की जिम्मेदारी है !
परंतु हमें क्या हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती हम सभी को इस बारे में बहुत गहराई से चिंतन करने की बात है


की क्या हम आपसी मतभेद को भुलाकर देश को आगे बढ़ाने में कुछ योगदान कर सकते हैं या नहीं!
 चाहे देश में कोई भी सरकार हो या रही हो कई सरकारें आई और कई सरकारी  गयी  
मगर नहीं सबकी सोच अपने हिसाब से अलग-अलग रही और यह कह ले की सबने अपनी अपनी सुविधा के मुताबिक सरकार को चलाया


और कुर्सी को पाने के लिए सारे साम दाम दंड भेद को अपनाकर कुर्सी के लिए लड़ते रहे और चुनाव के वक्त बड़ी-बड़ी योजनाओ   का चूर्ण देते रहे!
 बहुत-बहुत  बड़े वादे किए कभी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,कभी जय जवान जय किसान,  कभी महिला सशक्तिकरण,  कभी रोजगारी के  बड़े-बड़े  वादे  करते रहे!!


और इस तरीके से  देश को सभी सरकारें मिलकर लुटती रही मगर किसी ने महिलाओं  के बारे में बातों के सिवा कोई योजना अमल पर नहीं लाई  गयी
 आज देश की हालत ऐसे मुहाने पर आकर खड़ी है  चाहे महिला सशक्तिकरण का मामला हो या महंगाई का मामला हो या बेरोजगारी का मामला हो मगर सरकारों ने बड़े-बड़े वादे करके आज कुछ लोगों के जेब को भरने के सिवाय और क्या किया गया है !!


 क्या आज देश को एनआरसी की जरूरत थी??
या देश को नागरिक संशोधन बिल की जरूरत है ?
या देश की सड़कों का नाम बदलने की जरूरत है  ?? क्या रेलवे स्टेशनों का नाम बदलने की जरूरत है!   क्या इन सारी चीजों से लोगों को रोजगार मिल जाएगा !या महिलाओं को शोषण से बचा लिया जाएगा ! या अपराधों को कम कर दिया जाएगा!

नहीं

मगर  सारी सरकारें काम अपने मुताबिक ही कर ही रही है!

  मगर आज हम सब लोगों को देश  की मान मर्यादा को बचाने के लिए आम जनता को जागने की बहुत जरूरत है
 आज लोगों की मानसिकता ऐसी हो गई है कि लोग बाहर से तो बहुत अच्छा दिखना चाहते हैं मगर अपने अंदर की मानसिकता को बदलना नहीं चाहते !


हम सभी बहन  बेटियों और महिलाओं को अपनी मां बहनों के समान समझे तो आज यह जो देश की स्थित है इसमें बहुत सुधार आ सकता है !!आज हम कहीं भी सुनते हैं किसी प्रदेश में ऐसा हो गया उस प्रदेश में ऐसा हो गया मगर सरकार से लोगों को जो उम्मीद होती है उस पर कोई भी सरकारें खरा नहीं उतरती है !


  क्यों ऐसे बलात्कारियों का महिमामंडन किया जाता है कभी किसी बलात्कारी को फूल मालाओं से स्वागत किया जाता है कभी कोई बलात्कारी माननीय बन कर बैठ जाता है क्या सभी पार्टियों या किसी भी गैर सरकारी या सरकारी संगठन के लिए कोई गाइडलाइंस नहीं होनी चाहिए !!या फिर वही कहानी जो जितना बड़ा दबंग जितना बड़ा लुटेरा और जितना बड़ा अत्याचारी वही सबसे बड़ा माननीय होगा!
 

आज हम किसी सरकारी दफ्तर में कोई छोटा सा काम करवाने के लिए भी जाएं या रोजगार के लिए जाएं तो अगर एक नाम में किसी एक अक्षर का फर्क भी हो जाता है तो उसमें भी वापस कर दिया जाता है मगर कभी किसी माननीय से यह नहीं पूछा जाता कि तुम्हारे ऊपर कितने केस है या कितने मुकदमे चल रहे हैं उसको चाहे जो भी पार्टियां हो पार्टियां तो ऐसे हो जाती है जैसे की वाशिंग मशीन !
कि पार्टी में पहुंचते ही उसकी सारी कमियां या बुराइयां वहीं से साफ हो जाती है और माननीय हमारे और आपके ऊपर राज करने के लिए कुर्सियों में बैठ जाते हैं
 क्या बलात्कारियों को क्या सजा देनी चाहिए या उनके लिए कौन से कानून बनाने चाहिए !इसमें भी निर्भया के बाद  भी हम सोचने पर मजबूर है!


 क्या आज सरकार हैदराबाद कांड के बाद किसी और ऐसे कृत्य का इंतजार कर रही है !!और कितने मां बहनों की इज्जत को तार-तार करने के लिए ऐसे लोगों को मौका देगी क्यों नहीं संविधान में  प्रावधान करके कोई कड़ा कानून बनाती क्यों नहीं ऐसे  अत्याचारियों  फांसी के फंदे पर  लटका देती! 


 आज देश में हो रहे ऐसे कृत्यों से मेरा मन बहुत विचलित है और मैं लिखते हुए बहुत स्तब्ध हूं और सारी जो भी   बहन बेटियां ऐसे  कृत्यों का शिकार हुई है और अपनी जान से हाथ धो बैठी है ऐसी बहन बेटियों को मैं सच्ची श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं !


यह मेरे आपसी विचार हैं इससे अगर किसी को मेरे विचारों से किसी को कोई परेशानी या किसी की भावना को ठेस पहुंचती है उसके लिए मैं माफी चाहता हूं।!
मुनीस मोहम्मद

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