काल का साक्षी है साखू का ये प्राचीन वृक्ष

काल का साक्षी है साखू का ये प्राचीन वृक्ष

बहराइच।

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग में 360 वर्ष से भी अधिक पुराना एक साखू का वृक्ष लगा है। यह वृक्ष मुगल बादशाह शाहजहां के काल का माना जा रहा है। लगभग पांच वर्ष पूर्व वन विभाग ने इस वृक्ष पर एक बोर्ड लगाया था। जो इसका संक्षिप्त इतिहास अपने में समेटे हुए है। इस अभ्यारण्य का भ्रमण करने आने वाले सैलानी इस वृक्ष को देखने जरूर अाते हैं। इस वर्ष पर्यटकों के लिए खुलने के बाद से अब तक लगभग 3000 सैलानी कतर्निया का भ्रमण करने आ चुके हैं। इनमें से काफी संख्या में सैलानी इस वृक्ष को भी देखने आ चुके हैं। 

कतर्नियाघाट का प्राकृतिक दृश्य निहारने को हर रोज काफी संख्या में पर्यटक यहां आ रहे हैं।  पर्यटन के क्षेत्र में इन दिनों कतर्नियाघाट देश विदेश के लोगों के आर्कषण का केंद्र बना हुआ है। 15 नवम्बर से अब तक लगभग 2 महीने में करीब 3000 पर्यटकों ने कर्तनियाघाट की खूबसूरती को निहारा है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य व जंगलों में पाए जाने वाले अजीबोगरीब नजारे हमेशा से पर्यटकों को लुभाते रहे हैं। कतर्निया रेंज गत वर्ष गुदगुदी वाले पेड़ के नाम से मशहूर एक वृक्ष पर्यटकों के बीच  काफी चर्चा में रहा था। इस समय यहां आने वाले पर्यटकों के बीच मुगल बादशाह शाहजहां के काल में लगाया गया लगभग 360 वर्ष पुराना साखू का पेड़ काफी लोकप्रिय हो रहा है। 

मुगल बादशाह शाहजहां के काल से स्वतंत्र भारत के इतिहास का गवाह बने इस पेड़ की खासियत इसकी उम्र व मोटाई है। करीब 6 मीटर की मोटाई वाला साखू का यह पेड़ तकरीबन 100 फुट ऊंचा है। यह पेड़ ककरहा वन्य क्षेत्र के वन विश्राम गृह में लगा हुआ है।  यहां आने वाले पर्यटक इस पेड़ की यादों को अपने कैमरे में कैद करके ले जाते हैं। जंगल में इस समय मौजूदा प्राचीनतम वनों में यह भी बहुत पुराना और ऐतिहासिक वृक्ष है। इसीलिए वन विभाग की ओर से  इस साखू की उम्र व इतिहास को बयां करने वाला बोर्ड लगाया गया है। जो पर्यटकों का ध्यान अपनी अोर आकर्षित कर रहा है। 

Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Loading...
Loading...

Comments