उत्कर्ष के सफल ऑपरेशन से पिता को मिला सुकून

उत्कर्ष के सफल ऑपरेशन से पिता को मिला सुकून

उत्कर्ष के सफल ऑपरेशन से पिता को मिला सुकून


बनारस में मिला नवजात को जीवनदान, जन्मजात न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का सफल ऑपरेशन


राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हुआ निःशुल्क इलाज 

संवादाता -नरेश गुप्ताा

कानपुर 4 अक्टूबर 2019
उत्कर्ष के जन्म के बाद पता चला कि बच्चे के सिर में न्यूरल ट्यूब डेफेक्ट हैं। पिता को चिकित्सीय भाषा की समझ नहीं थी लेकिन वह जान चुके थे कि उनके बच्चे के सिर के पीछे में उठा हुआ सा भाग बना हैं। परेशान पिता को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की मदद से सुकून मिला।

स्वास्थ्य विभाग ने नवजात को वाराणसी भेजा जहां ऑपरेशन के बाद नवजात को जीवनदान मिल गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। इलाज मिलने के बाद से पिता व मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।नितिन कुमार जनपद के क्षेत्र बर्रा दो में वर्ल्ड बैंक कॉलोनी में किराये पर रहते हैं। पेशे से सेल्समैन हैं। एक माह पहले 8 सितम्बर को जिला महिला अस्पताल, डफरिन में उनकी पत्नी कविता ने बच्चे को जन्म दिया।

बच्चे का सिर असमान्य तरह से बढ़ने पर खुशियां परेशानी में बदल गईं। आस पास का ऐसा कोई अस्पताल नहीं बचा था जहां नितिन ने अपने बेटे के इलाज के लिये बात ना की हो , लेकिन आपरेशन से ही ठीक होने की बात पर हताश होकर लौट आए।जिला महिला अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ शिव कुमार ने नितिन को फिर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की जानकारी दी, और आरबीएसके रेफेरल फॉर्म भी भरवाया।

डॉ कुमार ने फिर आरबीएसके के नोडल अधिकारी, एसीएमओ डॉ एसके सिंह से नितिन का सम्पर्क करवाया। डॉ सिंह के द्वारा आरबीएसके के डीईआईसी प्रबंधक अजीत सिंह को सूचित किया गया, जिससे कि नवजात का आरबीएसके के तहत मुफ्त इलाज़ हो सके। लेकिन जिले में आरबीएसके के तहत इलाज की सुविधा न होने के कारण डीईआईसी प्रबंधक अजीत सिंह ने नवजात को 13 सितम्बर को वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में डॉ सिंह की अनुमति से रेफर कर दिया। आरबीएसके टीम की मदद से एम्बुलेंस से परिवारजन सहित नवजात को ले जाया गया।

20 सितम्बर को नवजात का ऑपरेशन होने के बाद उसे 29 सितम्बर को डिस्चार्ज कर दिया गया। वाराणसी के बीएचयू अस्पताल मे मुफ्त ऑपरेशन किया गया।पिता नितिन कुमार का कहना हैं कि उन्होने सब भगवान के भरोसा छोड़ रखा था, उन्हे खुशी हैं कि आरबीएसके की मदद उत्कर्ष का मुफ्त इलाज कर उसे बचाया गया। उनका कहना हैं कि अभी उनका बच्चा ठीक हैं।

आरबीएसके के डीईआईसी प्रबंधक, अजीत सिंह ने बताया कि न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का ऑपरेशन आरबीएसके के अंतर्गत झांसी व वाराणसी के अस्पताल में ही उपलब्ध है। यह जन्मजात बीमारी है। इसका तुरंत ऑपरेशन न होने पर बड़ी समस्या आ सकती है। नवजात का सफल ऑपरेशन करवाया गया है। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। यह जिले का दूसरा केस था। वह बताते हैं कि यदि कोई केस उनके पास सीधे आता हैं तो वो रिफ़र करते हैं और आरबीएसके के तहत इलाज करवाते हैं,

नहीं तो यदि मरीज सीधे मेडिकल कॉलेज पहुचा हैं तो वहाँ के डॉक्टर के द्वारा उन्हे सूचित कर दिया जाता हैं, जिससे कि उस बच्चे को आरबीएसके के तहत मुफ्त में इलाज मिल सके।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के द्वारा 0 से 19 वर्ष तक के बच्चों की 40 प्रकार की गंभीर बीमारियों का उपचार मुफ्त में किया जाता हैं। इसमें से एक हैं न्यूरल ट्यूब डेफेक्ट। 

 

विशेषज्ञ कहते हैं कि महिलाओं में फॉलिक एसिड की कमी के चलते उनके गर्भ में पल रहे बच्चों को न्यूरल ट्यूब डेफेक्ट जैसी विसंगति से जूझना पड़ता हैं। जिससे बच्चे की जान जाने का खतरा रहता हैं। इस तरह की विसंगति से अपने बच्चो को बचाने के लिए महिलाएं गर्भावस्था के समय आयरन फॉलिक एसिड की गोलियां जरूर ले।


न्यूरल ट्यूब डेफेक्ट क्या हैं?


यह दिमाग, स्पाइनल कॉर्ड और रीढ़ की हड्डी की जन्मजात विकृति हैं। यह तब दिखता हैं जब दिमाग और रीढ़ की हड्डी में ऐसा विकार बन जाए कि यह पूर्ण रूप से बंद होने में विफल हो जाए। न्यूरल ट्यूब डेफेक्ट गर्भावस्था के पहले 5 हफ्तों में ही हो जाता हैं। तथा यह बहुत गंभीर जन्मजात रोग हैं। अगर इसके इलाज की शुरुआत बच्चे के जन्म के 24 घंटे के अंदर न हो तो बच्चे की मृत्यु भी हो सकती हैं।

अगर बच्चे को इलाज़ मिला तो वह बच सकता हैं। अगर बच्चे का सही समय पर इलाज़ न हुआ और तब भी जान बच गई तो वह विभिन्न प्रकार की शारीरिक अथवा मानसिक विकलांगता का शिकार हो सकता हैं।

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