अब मीज़ल्स - रुबेला के हर केस की होगी निगरानी 

अब मीज़ल्स - रुबेला के हर केस की होगी निगरानी 

एमआर केस बेस्ड सर्विलांस कार्यशाला में दिया गया प्रशिक्षण 

             संवाददाता - नरेश गुप्ता

कानपुर-
मीजल्स-रूबेला के केसों की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग के सर्विलांस को मजबूत किया जाएगा।

किसी भी तरह का खसरा का केस मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर नमूने लेगी और जांच कराकर इलाज शुरू कर देगी। 
 

विश्व स्वास्थ्य संगठन कानपुर यूनिट (डब्लूएचओ) और स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्य चिकित्साधिकारी सभागार में मीजल्स-रूबेला की रोकथाम को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला शुक्रवार को संपन्न हुई। इस कार्यशाला  की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अशोक शुक्ला ने की ।

उन्होंने बताया कि अब खसरा के एक-एक केस की रिपोर्ट करनी होगी।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. ए॰के॰ कनौजिया  ने कहा कि पोलियो की तरह मीजल्स-रूबेला को भी समाप्त करने के लिए पिछले साल नवंबर में देश में एक अभियान चलाया गया था।

अगले साल तक मीजल्स-रूबेला को हर हाल में समाप्त करना है। ऐसे केसों को खोजबीन के लिए विभागीय सर्विलांस को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि बुखार या चपटे चकत्ते, नाक बहना, जुकाम, आंख आना जैसे लक्षण मिलने पर चिकित्सकों को सतर्कता बरतने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि एमआर की रोकथाम के लिए सभी सीएचसी व पीएचसी के चिकित्सा अधीक्षकों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
यह सभी अधिकारी प्रत्येक सोमवार को जिला मुख्यालय पर रिपोर्ट भिजवाएंगे।

डब्लूएचओ के सब रीजनल टीम लीडर (एसआरटीएल) कानपुर डा. मुनेंद्र शर्मा ने कहा कि सर्विलांस नेटवर्क को मजबूत करें। जिस क्षेत्र में केस मिलता है तो वहां विशेष अभियान चलाए।

ऐसे केस मिलने पर उनसे तत्काल संपर्क करने को कहा। 
इस दौरान डिप्टी सीएमओ डॉ आरएन सिंह , डीईएचआइओ शैलेन्द्र, शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की सीएचसी, पीएचसी के प्रभारी व यूनिसेफ और यूएनडीपी  के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
लक्ष्य : 2020 तक मीज़ल्स और रुबेला का पूरी तरह सफाया  
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्विलांस मेडिकल ऑफीसर डॉ. अर्पणा ने बताया कि जनपद में मीजल्स के केसों में कमी आई है। प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने बताया की इस वर्ष में जनपद के शहरी क्षेत्र में दो और ग्रामीण ब्लाक में सात केस मिले है। वहीं पिछले वर्ष 158 केस रिपोर्ट हुए थे। यह सभी बच्चे दो साल से कम उम्र के है। साथ ही बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 तक देश को मीज़ल्स और रुबेला से पूर्ण रूप से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसलिए मीज़ल्स और रुबेला का टीका 9 से 12 माह में पहली डोज और 16 से 24 माह में दूसरी डोज़ सभी बच्चों को नि:शुल्क लगाया जाता है।

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