नवजात सेहत सुरक्षा के गुण सिखायेंगे डीआरजी सदस्य 

नवजात सेहत सुरक्षा के गुण सिखायेंगे डीआरजी सदस्य 

नवजात सेहत सुरक्षा के गुण सिखायेंगे डीआरजी सदस्य 


मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु दर के प्रति जागरूकता ज़रूरी 


प्रशिक्षण में दिया मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने का सन्देश

संवाददाता नरेश गुप्ता


कानपुर 29 नवम्बर 2019 


कुपोषण, मातृ व शिशु मृत्यु दर जैसे दानवों को जागरूकता से ही हराया जा सकता है। जन्म से 28 दिन तक नवजात को विशेष सुरक्षा मिले तो शिशु मृत्यु दर के आंकडें को लगभग शून्य पर लाया जा सकता है। दूसरी ओर कुपोषण व एनिमिया से भी जागरूकता से ही लड़ा जा सकता है। कानपुर मण्डल के छह जिलों के डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स ग्रुप (डीआरजी ) सदस्य नवजात सेहत की सुरक्षा के लिए काम करेंगे। 

शुक्रवार को पोषण अभियान के तहत आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन में यह बातें यूनिसेफ प्रतिनिधियों व स्टेट लेवल प्रशिक्षकों ने कही। कार्यक्रम में मौजूद कानपुर मण्डल के सभी जिलों की डीपीओ, सीडीओ व चिकित्साधिकारी आदि शामिल हुए। जिला कार्यक्रम विभाग और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय में कानपूर मण्डल के इन सभी सदस्यों को इंक्रीमेंटल लर्निंग एप्रोच कार्यक्रम के मॉडल 17, 18 और 19 के विषय में प्रशिक्षित किया गया है। 

बिठूर स्थित नानाराव पेशवा स्मारक पार्क में आयोजित मंडलीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्टेट लेवल प्रशिक्षक सीडीपीओ पूजा व यूनिसेफ के मंडलीय सलाहकार आशीष ने बताया कि शिशु मृत्यु दर जन्म के 28 दिन तक सर्वाधिक होती है। इन 28 दिनों में अगर जरा सी सतर्कता बरती जाएं और बच्चें को स्तनपान ही कराया जाए तो शिशु मृत्यु पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है। बाहरी दूध पिलाने व गंदे हाथों से बच्चे को छूने से संक्रमण हो सकता है। निमोनिया हो सकता है। शुरू के 28 दिन तक बच्चें को विशेष सुरक्षा दी जानी चाहिए। मातृ मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण अधिक रक्त स्राव है जिससे लड़ने  के लिए भी जागरूकता ही सबसे अहम है।


संस्थागत प्रसव जैसे उपाय अपनाने से काफी हद तक चीजों को दुरस्त किया जा सकता है जबकि कुपोषण, एनिमिया, अल्प वजन आदि के पीछे भी अज्ञानता व लापरवाही ही सबसे बड़ा कारण होता है। मंडलीय सलाहकार आशीष के अनुसार, लगभग हर दूसरी महिला एनिमिया की शिकार है। कुपोषण की जड़ में भी एनिमिया होता है। 


स्टेट लेवल प्रशिक्षक सीडीपीओ पूजा ने बताया कि मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु के आधारभूत कारण कम उम्र में शादी एवं गर्भावस्था, कम अंतराल पर बच्चों का पैदा होना एवं ज्यादा बच्चों का पैदा होना आदि हैं। यदि शादी भी सही उम्र पर हुई है तो उसके बाद बच्चों में कम अंतराल होने पर भी माँ और बच्चा दोनों को ख़तरा होता हैं। 


उन्होंने बताया की कार्यशाला में ब्लॉक स्तरीय सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया है जो आगे पंचायत स्तर पर ट्रेनिंग देंगे। ताकि प्रत्येक स्तर पर कुपोषण, मातृ व शिशु मृत्यु दर से लडा जा सके। इन्हें हराया जा सके और एक स्वस्थ, समृद्ध व जागरूक समाज तैयार किया जा सके।

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