याद किए गए अब्दुल कलाम आजाद कानपुर  की टॉप खबरे

याद किए गए अब्दुल कलाम आजाद कानपुर   की टॉप खबरे

अपनी शान और शौकत के साथ निकला जुलूस ए मोहम्मदी

 कानपुर 

एशिया का सबसे बड़ा जुलूस ए मोहम्मदी जो पिछले 107 सालों से निकल रहा है जिसमें शहर की हजारों अंजुमन शामिल होती हैं वह लाखों लोग इस जुलूस का स्वागत करते हैं, यह हमारे नगर के साथ प्रदेश व देश के लिए गौरव की बात है।

जुलूस ए मोहम्मदी पूरे देश में गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करता है,जुलूस अपने निर्धारित समय दोपहर 1:00 बजे परेड ग्राउंड से चलकर नई सड़क, पेंचबाग,दादा मियां चौराहा, तलाक महल,कंघी मोहाल,गुलाब घोसी की मस्जिद,मोहम्मद अली पार्क,चमनगंज,हलीम कॉलेज,इकबाल लाइब्रेरी रोड,बांसमंडी,लाटूश रोड,मूलगंज चौराहा,मेस्टन रोड,कोतवाली चौराहा,शिवाला,रामनारायण बाजार,पटकापुर होते हुए फूल बाग में समाप्त हुआ जुलूस ए मोहम्मदी में सभी धर्म के लोगों ने शिरकत की व सभी राजनीतिक व सामाजिक संस्थानों में कैंप लगाकर जुलूस ए मोहम्मदी का स्वागत किया जुलूस में मुख्य रूप से राष्ट्रीय ध्वज कौतूहल का विषय रहा

मुस्लिम समाज के लोगों ने जुलूस ए मोहम्मदी के द्वारा सर्वधर्म सद्भाव का संदेश दिया जुलूस ए मोहम्मदी का नेतृत्व कर रहे जमीअतुल उलमा के पदाधिकारियों ने बताया नबी की शान में उठने वाला यह जुलूस हिंदुस्तान की एकता का सबूत है। इसी जुलूस की वजह से हिंदुस्तान के सारे क्रांतिकारी एक प्लेटफार्म पर जमा हुए थे

जिसकी वजह से आज हम आजादी की सांस ले रहे हैं इस जुलूस ने जंगे आजादी में अहम भूमिका अदा की थी। जुलूस में मुस्लिम समाज के साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी नात व नारे लगाकर एकता की मिसाल पेश की।अंजुमन इस्लाम बच्चा कमेटी कास्ताना  रोड सैयद बाबा की गली संरक्षक मुजाहिद  टायर वाले  अध्यक्षता शारिक अली  कार्यकर्ता साकिब अली  मोहम्मद इमरान जहीर वारसी हाफिज बिलाल चिश्ती आदि लोगों ने जुलूस ए मोहम्मदी में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

 

 नन्हे - मुन्ने बच्चों ने जुलूस ए मोहम्मदी का किया इस्तकबाल

  •  जुलूसे ए मोहम्मदी के स्वागत में बच्चे भी नहीं रहे पीछे

कानपुर- कानपुर के ऐतिहासिक जुलूस ए मोहम्मदी के स्वागत के लिए जितना जोश बड़ों में होता है उससे कहीं ज्यादा जोश बच्चों में भी देखने को मिला जुलूस ए मोहम्मदी के स्वागत के लिए बच्चों द्वारा लगाया गया कैंप का कौतूहल का विषय रहा।

 तलाक महल में छोटे-छोटे बच्चों ने जुलूस ए मोहम्मदी के स्वागत के लिए कैंप लगाकर अंजुमनो का दिल जीत लिया बच्चों ने नारे लगाकर जुलूस का स्वागत किया।

जानकारी के अनुसार तलाक महल में अल तैबा चिकन दरबार की तरफ से लगाया गया स्वागत कैम्प बच्चों के नाम कर दिया गया था जिसमें क्षेत्र के छोटे-छोटे बच्चों ने जुलूस ए मोहम्मदी का स्वागत किया जुलूस के स्वागत में मोहम्मद याहया, मोहम्मद शाद अब्दुल्लाह मूबीन,तैबा मुबीन,अलिसबा नाज,आकिफ़ा मोइन,अयान खान अर्सलान खान के साथ क्षेत्र के बड़ी तादाद में बच्चे मौजूद रहे।

 

 मौलाना कलाम के खुतबे के बाद पाकिस्तान को ठुकरा हिन्दुस्तान में रुका मुसलमान - हयात ज़फर हाशमी

कानपुर, एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात ज़फर हाशमी की अध्यक्षता में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व आजाद भारत के पहले शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जंयती के अवसर पर आज प्रेमनगर स्थित कार्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात ज़फर हाशमी ने मौलाना आजाद को खिराज ए अकिदत पेश करते हुए कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद 1947 में हुए हिन्दुस्तान पाकिस्तान के बटवारे के खिलाफ और दुखी थे और उन्होंने पाकिस्तान को ठुकरा दिया था उन्होने दिल्ली की जामा मस्जिद पर खड़े होकर खुतबा दिया और मुसलमानों का आवाहन करते हुए खुतबे में कहा था कि यह वतन हमारा है इसको छोड़कर कहा जा रहे हो यहां हमारे अस्लाफ की कुर्बानियां शामिल हैं

क्या इसको फरामोश कर दोगे यहां हमारे शहंशाह ए हिन्दुस्तान सरकार गरीब नवाज़ का आस्ताना है बुज़ुर्गों का बनाया हुआ ताज महल, लाल किला, कुतुबमिनार है यहां की मस्जिदें विरान हो जाएगी मत जाओ यह हिन्द को छोड़ कर मौलाना के खुतबे के बाद हिन्दुस्तान के मुसलमानों ने यहां रहने का फैसला किया और पाकिस्तान को ठुकरा दिया आज यहाँ मुसलमानों को शक कि निगाह से देखना मुसलमानों के साथ नाइंसाफी है!

हाशमी ने मौलाना की जिन्दगी पर रोशनी डालते हुए कहा आजाद साहब ने सबसे पहले अरबी और फारसी सीखी। इसके बाद उन्होनें गणित , बीजगणित , रेखागणित और दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की। आखिर में मौलाना आजाद ने इतिहास , अग्रेंजी और राजनिति शास्त्र को सीखा। सन 1920 में मौलाना ने काग्रेंस जॉईन की। दिल्ली में 1923 में मौलाना को काग्रेंस अध्यक्ष बनाया गया। मौलाना को नमक कानुन तोड़ने के कारण गांधी के साथ 1930 में फिर से गिरफ्तार कर लिया। कलाम इस आरोप में करीब डेढ़ साल मेरठ की जेल रखें गए। मौलाना आजाद को 1940 में रामगढ़ अधिवेशन में काग्रेंस अध्यक्ष बने और 1946 तक रहें।

कलाम को विभाजन से बहुत दुख हुआ और वो विभाजन के खिलाफ थे। उन्होनें तो ये भी कहा की एक संगठित राष्ट्र के सपने को पूरी तरह से खत्म कर दिया। मौलाना आजाद ने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शिक्षा मंत्री रहे। वह 1947 से 1958 तक शिक्षा मंत्री रहे। 22 फरवरी 1958 को दिल का दौरा पड़ने के कारण मौलाना आजाद का इन्तकाल हो गया।

 विचार गोष्ठी में राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात ज़फर हाशमी के अलावा रईस अन्सारी राजू, मन्सूर आलम अन्सारी, जावेद मोहम्मद खान, मोहम्मद शारिक मंत्री, सैय्यद शाबान, अज़ीज़ अहमद चिश्ती, युसुफ मन्सूरी, हामिद खान, मोहम्मद ईशान,शहनावाज अन्सारी, मोहम्मद इलियास गोपी, साकिब मिस्बाही, नदीम सिद्दीकी, सैफी अन्सारी, एहतेशाम अन्सारी, जीशान, उजैर अन्सारी आदि लोग रहे।

 

जिसने मिलादुन्नबी की ताज़ीम की उसने दीन को ज़िन्दा कर दिया

 तंजीम यौमुन्नबी बांसमंडी के तत्वावधान में मनाया गया ईद मिलादुन्नबी का जलसा

कानपुर,जब पूरी दुनिया में घुप अंधेरा छाया हुआ था ऐसे में अल्लाह ने अपने महबूब हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लललाहो अलैहे वसल्लम को 12 रबीउल अव्वल शरीफ सोमवार के दिन सुबह सादिक के वक्त हज़रते आमिना के बतने पाक से शहरे मक्का में अपने महबूब सल्ललाहो अलैहे वसल्लम को दुनिया में भेजकर सारे जहाँ को रौशन व जगमग कर दिया। हज़रते उस्मान बिन अबी अल आस रजि. की माँ कहती है कि जिस वक्त पैगम्बरे इस्लाम दुनिया में तारीफ लाये तो ऐसा लगता था कि आसमान के सारे सितारे ज़मीन पर गिर पड़ेंगे। पैगम्बरे इस्लाम की विलादत पर यह अल्लाह की जानिब से जश्ने चिरागां था। हमें भी पैगम्बरे इस्लाम की विलादत पर खूब खूब जश्ने चिरागां करना चाहिए और घरो-मोहल्लों शहर-शहर हर जगह जश्ने चिरागां करते रहना चाहिये।

उक्त विचार तंजीम यौमुन्नबी बांसमंडी के तत्वावधान में आयोजित जश्ने ईद मिलादुन्नबी के जलसे को सम्बोधित करते हुए राम नगर बनारस से पधारे हज़रत मौलाना मुफ्ती ज़ाकिर हुसैन ने बांसमंडी चैराहे पर व्यक्त किए।आल इण्डिया गरीब नवाज़ कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफी ने कहा कि खलीफा-ए-अव्वल (पहले खलीफा) हजरते सैयदना सिद्दीके अकबर रजि. इरशाद फरमाते है वह व्यक्ति जन्नत में मेरे साथ होगा जिसने मिलादुन्नबी पर एक दिरहम भी खर्च किया।

खलीफा-ए-दोयम (दूसरे खलीफा) हजरते सैयदना उमर फारूके आजम रजि. ने इरशाद फरमाते है कि जिसने मिलादुन्नबी की ताजीम की उसने दीन को जिन्दा कर दिया। खलीफा-ए-सोएम (तीसरे खलीफा) हज़रत सैयदना उस्माने गनी रजि. इरशाद फरमाते है कि जो मिलाद पर एक दिरहम भी खर्च करेगा उसको जंगे बदर के शोहदा के बराबर सवाब मिलेगा। खलीफा-ए-चाहरूम (चैथे खलीफा) हजरते मौला अली रजि. इरशाद फरमाते हैं कि मिलादुन्नबी मनाने वाला दुनिया में ईमान की नेअमत लेकर जाएगा और बिना हिसाब के जननत में दाखिल होगा।

हज़रत मौलाना साकिब अदीब मिस्बाही ने कहा कि पैगम्बरे इस्लमाम सल्ल. ने दुनिया में तशरीफ लाते ही सजदा किया। उस सजदे के सदके में हमें सजदों की तौफीक नसीब हो जाये और हम पांचो वक्त की नमाजे मस्जिद में तकबीरे ऊला के साथ सफे अव्वल में पढ़ने के आदि बन जायें।

हर मुसलामन मर्द औरत पर पांच वक्त की नमाज़ फर्ज है। नमाज़ की फर्जीयत का इनकार करने वाला काफिर है। चाहे उसका नाम और दीगर काम मुसलमानों वाले हों। जो बदनसीब एक वक्त की नमाज़ जानबूझकर कज़ा कर देता है उसका नाम जहन्नम के दरवाजे पर लिख दिया जाता है। मौलाना मिस्बाही ने कहा कि हमें हर काम सुन्नत के मुताबिक करना चाहिये। पैगम्बरे इस्लाम सल्ल. इरशाद फरमाते हैं जिसने मेरी सुन्नत से मोहब्बत की उसने मुझसे मोहब्बत की और जिसने मुझसे मोहब्बत की वह जन्नत में मेरे साथ होगा।

इससे पूर्व जलसे की शुरूआत तिलावते कुराने पाक से क़ारी अब्दुल रशीद खतीब व इमाम मस्जिद बांसमण्डी ने की और बारगाहे रिसालत में माज़ूर कानपुरी, हाफिज़ मोहम्मद शौकत अली, हाफिज़ मोहम्मद असद कानपुरी, सकलैन वारिस, गुलाम कादिर सुल्तानी फतेहपुरी, कारी औवैस रज़ा ने नात शरीफ का नज़राना पेश किया।जलसे की अध्यक्षता काजी-ए-शहर कानपुर हज़रत मौलाना आलम रज़ा खां नूरी व संचालन हज़रत मोहम्मद आसिफ रज़ा हबीबी ने की। इस अवसर पर प्रमुख रूप से हाफिज़ अब्दुल रहीम बहराईची, मोहम्मद शाह आज़म बरकाती, शबीह कुद्दूस, फुरकान वकार, ऐराज़ तौफीक, मोहम्मद सलीम, मौलाना फिरोज़ आलम, हाफिज़ गुलाम जिलानी, अनवार सादात आदि लोग उपस्थि थे।

 

याद किए गए अब्दुल कलाम आजाद

कानपुर ,पेचबाग़ स्थित जिला कार्यालय पर मुस्लिम युथ ने मौलाना अब्दुल कलाम आजाद की जयंती को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जिसमे ज़िला अध्य्क्ष मो0कुमैल ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहां की मौलाना अब्दुल कलाम एक महान शिक्षाविद एवं  आज़ाद भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री थे आपके देश के प्रति योगदान को देखते हुए  भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोक्ष पुरस्कार से भी नवाज़ा आप का पूरा जीवन हिन्दू मुस्लिम एकता पर समर्पित था!

आप हिन्द पाक बंटवारे के सख्त खिलाफ थे आप ने कहा था कि मज़हब की बुनियाद पर कोई भी देश वजूद में नही आना चाहिये! आप ने खिलाफत आन्दोलन पर भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया अंग्रेज़ो भारत छोड़ो जैसे बड़े आंदोलन का भी नेरेत्रव भी किया आप की किताब इंडिया विंस फ्रीडम  में आज़ादी की कई महत्वपूर्ण बातो का भी ज़िक्र किया आप गांधी जी के विचारों से  बहुत प्रभावित थे! आप कांग्रेस के सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय अध्य्क्ष भी रहे  मुसलमानो को चाहिये  कि अब्दुल कलाम के पद चिन्ह  पर चल कर देश एव कौम को शिक्षा के क्षेत्र में आगे ले जाये!अध्यक्ष मोहम्मद कुमेल, इरफान, सचिन प्रजापति, सैफ,कैफ फ़ारूक़ आवेज़ आदि

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