कांग्रेसियों ने मनाई सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती

कांग्रेसियों ने मनाई सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती

कानपुर,

कांग्रेस पार्टी कानपुर महानगर अध्यक्ष हर प्रकाश अग्निहोत्री के नेतृत्व में मूलगंज चौराहा स्थित पंडित वल्लभ भाई पटेल की स्मारक पर माल्यार्पण कर जयंती मनाई! सैकड़ों कार्यकर्ताओं को भीड़ उमड़ पड़ी!

नगर अध्यक्ष ने कहा कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाई गई! अध्यक्ष ने कहा कि लोह पुरुष ना देखी ना सोची कभी आवाज में सिंह सी दहाड़ थी हृदय में कोमलता की पुकार एकता का स्वरूप जो इसने रचा देश का मानचित्र पल भर में बदला गरीबों का सरदार था वह दुश्मनों के लिए लोहा था वह आंधी की तरह रहता गया

ज्वालामुखी देहकता  गया बनकर गांधी का अहिंसा का शस्त्र महत्व विश्व में जैसे कोई ब्रह्मास्त्र इतिहास के गलियारे खोजते हैं जिसे ऐसे सरदार पटेल अपना मिलते पूरे विश्व में सरदार वल्लभभाई पटेल एक ऐसा नाम जो अब भी किसी बुजुर्ग जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को प्रत्यक्ष रूप से देखा था कि शहर में आता है उनका शरीर में ऊर्जा से भर जाता है लेकिन मन में एक आतम गली उमड़ पड़ती है क्योंकि उस वक्त का हर एक युवा वल्लभभाई को ही प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता था!वल्लभभाई पटेल पुरुष के रूप में पहचाने जाते हैं एक सुरभि से कम इनकी ख्याति ना थी इन्होंने 200 वर्षो की गुलामी के ऐसे देश के अलग-अलग राज्यों को संगठित कर भारत में मिलाया

और उस बड़े कार्य के लिए इन्हें सैन्य बल की ज़रूरत तक नहीं पड़ी यही इनकी सबसे बड़ी ख्याति थी जो इन्हें सभी से पृथक करती थी सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 में हुआ था और उनकी मृत्यु 15 दिसंबर 1950 को इनका जन्म स्थान नाडियाड और इनकी मृत्यु मुंबई में इनके पिता का नाम झावर भाई था और इनकी माता का नाम लॉर्ड बाई था इनकी पत्नी झवेरभाई और उनके भाइयों का नाम सोमभाई वित्त भाई और नरसी भाई और इनकी बहन का नाम दही बड़ा इन का बेटा देना भाई था और इन की बेटी बड़ी बहन थी इस प्रकार से है 1917 में बोरसाद में एक स्पीच के जरिए उन्होंने लोगों को जागृत किया और

गांधीजी का स्वराज के लिए उनकी लड़ाई में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित किया खेड़ा आंदोलन में अहम भूमिका निभाई एवं अकाल और प्लेट से ग्रस्त लोगों की सेवा की बारडोली सत्याग्रह में इन्होंने लोगों को करना देने के लिए प्रेरित किया और एक बड़ी जीत हासिल की जहां से इन्हें सरदार की उपाधि मिली असहयोग आंदोलन में गांधीजी का साथ दिया पूरे देश में भ्रमण कर लोगों को एकत्र किया और आंदोलन के लिए धनराशि एकत्र की भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और जेल गए आजादी के बाद देश के गृहमंत्री एवं प्रधानमंत्री बने इस पद पर रहते हुए उन्होंने राज्यों के देशों को मिलाने का कार्य किया

जिससे उन्हें लोह पुरुष की छवि मिली वल्लभभाई पटेल का प्रारंभिक जीवन परिचय कुछ इस प्रकार से है! जिसमें चार बेटे थे एक साधारण मनुष्य की तरह इनके जीवन के भी कुछ लक्ष्य थे यह पढ़ना चाहते थे कुछ कमाना चाहते थे और उस कमाई का कुछ हिस्सा जमा करके इंग्लैंड जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते थे इन सब में इन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा पैसे की कमी घर की जिम्मेदारी इन सभी के बीच में धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहे

शुरुआती दिनों में इन्हें घर के लोग नाकारा समझते थे उन्होंने 22 वर्ष की उम्र में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की और कई सालों तक घर वालों से दूर रहकर अपनी वकालत की पढ़ाई की जिसके लिए इन्हें उधार किताबें लेनी पड़ती थी इस दौरान इन्होंने नौकरी और परिवार का पालन भी किया एक साधारण मनुष्य की तरह जिंदगी से लड़ते लड़ते आगे बढ़ते रहें इस बात से बेखबर यह देश के लोह पुरुष जीवन की एक विशेष घटना से इनके कर्तव्यनिष्ठा का अनुमान लगाया जा सकता है यह घटना जब की थी जब उनकी पत्नी मुंबई के हॉस्पिटल में एडमिट थी जहां उनका  देहांत हो गया! 

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