कर्म ही तय करते है की जीवन में क्या भोगना है - आर्यिका गौरवमती माताजी

कर्म ही तय करते है की जीवन में क्या भोगना है - आर्यिका गौरवमती माताजी

जयपुर से शोभित जैन की रिपोर्ट

 

 

जयपुर। धर्मनगरी के नाम से विख्यात जयपुर शहर के बड़ी चौपड़ स्थित ख्वास जी का रास्ते के दिगम्बर जैन मंदिर से दोपहर 12.30 बजे विहार कर गणिनी आर्यिका प्रमुख माँ सुपार्श्वमती माताजी की शिष्या गणिनी आर्यिका रत्न गौरवमती माताजी ससंघ का सोडाला स्थित श्याम नगर के वशिष्ठ मार्ग दिगम्बर जैन मंदिर में शुक्रवार को दोपहर मध्याह 3.15 बजे गाजों - बाजों और जयकारो के साथ भव्य मंगल प्रवेश सपन्न किया।  इस दौरान श्रद्धा और आस्था का भक्ति रस देखते ही बन रहा था जब जगह - जगह श्रद्धालुओं ने आर्यिका संघ भजन - भक्ति, पाद प्रक्षालन और आरती कर अगवानी कर रहे थे एवं पुष्प व रत्न वृष्टि कर स्वागत कर रहे थे।

श्याम नगर मंदिर समिति अध्यक्ष निहालचंद पांड्या ने बताया की शुक्रवार को गणिनी आर्यिका गौरवमती माताजी ससंघ ने बड़ी चौपड़ के ख्वास जी का रास्ता स्थित दिगम्बर जैन मंदिर से 1 माह के प्रवास के पश्चात् श्याम नगर वशिष्ठ मार्ग की धरा पर पुनः मंगल प्रवेश संपन्न किया। सकल जैन समाज श्याम नगर आर्यिका संघ के मंगल आगमन से प्रफुल्लित और हर्सोल्लीत है। शुक्रवार को आर्यिका गौरवमती माताजी ने ख्वास जी का रास्ता से विहार यात्रा प्रारम्भ कर चलेबी चौक, गणगौरी बाजार, छोटी चौपड़, किशनपोल, अजमेरी गेट, एमआई रोड़, सी- स्किम, सिविल लाइन्स होते हुए श्याम नगर मेट्रो स्टेशन पर मंगल पदार्पण किया जहाँ श्याम नगर जैन समाज, वशिष्ठ मार्ग मंदिर समिति के पदाधिकारी और महिला मंडल की पदाधिकारियों ने आर्यिका संघ की रत्न एवं पुष्प वर्षा कर मंगल अगवानी की जिसके पश्चात् यहाँ से गाजों - बाजों और जयकारों के साथ शोभायात्रा के माध्यम से श्याम नगर की विभिन्न कॉलोनियों से होते हुए भजन - भक्ति और नृत्य - गीत के साथ वशिष्ठ मार्ग आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में भव्य मंगल प्रवेश सम्पन्न किया।  यहाँ पर महिला मंडल की पदाधिकारियों ने सर पर मंगल कलश धारण कर मंगल गीतों के साथ आर्यिका संघ की अगवानी की और समिति के पदाधिकारियों ने पाद प्रक्षालन व् आरती कर मंगल अगवानी की, इस दौरान समाजसेवी हुल्लास सबळावत, प्रदीप चूड़ीवाल, अशोक चूड़ीवाल, राजकुमार सेठी, राजकुमार पाटनी, राजेंद्र बड़जात्या, प्रवीण बड़जात्या, सर्वेश जैन, मनोज जैन, आशीष जैन चेतू, आशीष गोधा, अमित सिंघई, पवन कासलीवाल, श्रीमती शशि जैन, रजनी जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण सहित मानसरोवर, जौहरी बाजार, श्याम नगर, सी - स्किम, जनकपुरी - ज्योति नगर, सूर्य नगर के श्रद्धालुगणों ने भाग लिया।  जिसके बाद आर्यिका गौरवमती माताजी ने अपने मंगल उद्बोधन दिए।

गणिनी आर्यिका गौरवमती माताजी ने अपने उद्बोधन में कहा की " जैसे - जैसे हम वस्तुओ का त्याग करते है वही वस्तु हमारे पीछे - पीछे चली आ जाती है, तीर्थंकरों ने जैसे - जैसे विलासिता का त्याग किया वैसे - वैसे ही विश्व की निधियांवैभव उनके सामने नतमस्तक हो गई। क्योकि तीर्थंकरों ने कर्मो पर चलते हुए अपने भोगो को भोगा, जबकि व्यक्ति भोगो को नहीं भोगता बल्कि भोगो द्वारा व्यक्ति को भोगा जाता है।  सम्यकदृष्टि संसार निर्झरा के लिए कामना करते है और मिथ्यादृष्टि संसार पाने के लिए अनेकांत इच्छाओ का पालन करते है क्योकि व्यक्ति जैसे जैसे कर्म करता है उसे वैसे - वैसे ही कर्म भोगने होते है।  जो जैन दर्शन को पढ़ लेता है वह विश्व के सभी दर्शन शास्त्रों को समझ लेता है।

 

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