टी.बी. नहीं लाईलाज, समय पर जांच और पूरा कोर्स है इसका ईलाज  - उपायुक्त विनय प्रताप सिंह

टी.बी. नहीं लाईलाज, समय पर जांच और पूरा कोर्स है इसका ईलाज  - उपायुक्त विनय प्रताप सिंह
  • टी.बी. के मरीजों को दवाईयों के साथ-साथ खुराके लिए दिए जाते हैं 500 रुपये प्रतिमाह।

करनाल 08 जुलाई, लगातार दो हफ्ते से ज्यादा खांसी व खून आना, छाती में दर्द, कमजोरी व थकान महसूस करना, वजन कम होना, भूख न लगना, हल्का बुखार और रात में पसीना आना टी.बी. यानि क्षय रोग के लक्षण हैं।

यदि किसी व्यक्ति को इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी अस्तपाल में जाकर इसकी जांच करवाएं और टी.बी. का पता लगते ही मुकम्मल ईलाज करवाएं। ईलाज अधूरा न छोड़ें, अधूरा छोडऩे से यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।यह बात सोमवार को उपायुक्त एवं संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के चेयरमैन विनय प्रताप सिंह ने लघु सचिवालय के सभागार में इस संबंध में आयोजित एक बैठक में बोलते हुए कही।

उन्होंने कहा कि टी.बी. एक लाईलाज बीमारी नहीं है, इसका स्थायी ईलाज संभव है। सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में टी.बी. की जांच व दवाईयां मुफ्त उपलब्ध हैं। दवाईयों के साथ-साथ मरीज को ईलाज के दौरान 500 रुपये प्रतिमाह पोषण  या खुराक के लिए भी दिए जाते हैं। यही नहीं यदि कोई व्यक्ति टी.बी. के मरीज को अस्पताल तक लेकर आता है तो उसको भी 500 रुपये प्रोत्साहन के रूप में सरकार की ओर से दिए जाते हैं।

बैठक में उपायुक्त ने आगे कहा कि जागरूकता व समय पर ईलाज न करवाने से टी.बी. के रोगी की मृत्यु हो जाती है। इसका मुख्य कारण टी.बी. का ईलाज न करवाना, संतुलित खान-पान की कमी और समय पर इसकी जांच न करवाना है।

इसे रोकने के लिए भारत सरकार ने संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम लागू किया है जो पूरे देश में है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत अप्रैल, 2018 से निक्षय पोषण योजना चलाई गई है, जिसमें टी.बी. के मरीज का निशुल्क छाती का डिजीटल एक्सरे किया जाता है,

फ्री एचआईवी व मधुमेह की जांच तथा एमडीआर टी.बी. के फ्री माईक्रास्कॉपी एवं सीबीनाट मशीन द्वारा मुफ्त जांच की जाती है। उन्होंने बताया कि जिला में इस योजना के तहत अब तक 12 लाख 48 हजार 500 रुपये की राशि टी.बी. मरीजों का वितरित की जा चुकी है। लेकिन इसमें सबसे अहम बात यह है कि मरीज को पूरा ईलाज करवाना चाहिए, जिसमें कम से कम 6 महीने दवाई खानी होती है अन्यथा उसे मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेशन यानि एमडीआर के तहत ज्यादा दवाईयां खानी पड़ सकती हैं जो 11 महीने से 2 साल तक का कोर्स है।

बैठक में सिविल सर्जन डा. रमेश कुमार, संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम की इंचार्ज व डिप्टी सीएमओ सिम्मी कपूर, डिप्टी सीएमओ राजेंद्र कुमार, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की कंसलटैंट डा. रमणीक अग्रवाल, अस्पताल के क्षय रोग विभाग के हैड डा. अभिनव डागर के अतिरिक्त गैर सरकारी संगठन से आए प्रतिनिधि भी शामिल रहे।

बॉक्स: प्राईवेट अस्पतालों द्वारा टी.बी. के मरीजों का निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य - डीसी विनय प्रताप सिंह पायुक्त विनय प्रताप सिंह ने बैठक में कहा कि सभी निजी अस्पतालों में डाक्टरों को टी.बी. के मरीजों को निक्षय पोर्टल पर रजिस्टर करना होता है और ऐसा करना उनकी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने सिविल सर्जन को निर्देश दिए कि इसकी नियमित जांच रखें।

प्राईवेट डाक्टर टी.बी. के मरीजों को सरकारी अस्पताल के लिए रैफर करें ताकि उनका मुफ्त ईलाज हो सके। उन्होंने टी.बी. के मरीजों को भी सलाह दी है कि ईलाज के समय थोड़ा आराम होते ही ईलाज न छोड़ें, डाक्टर की सलाह मानें और नियमित दवाई खाएं।

 शिव कॉलोनी की पूजा ने सरकारी अस्पताल से दवाई लेकर टी.बी. को दी मात बैठक में शहर के कुछ टी.बी. के रोगी जिन्होंने पूरी दवाई खाकर सफल ईलाज लेने के बाद अपने अनुभव बताए। शिव कॉलोनी की 16 वर्षीय पूजा (काल्पनिक नाम) ने बताया कि उसे छाती में दर्द और कमजोरी महसूस होती थी, सरकारी अस्पताल में जांच करवाई, जांच के बाद टी.बी. होना बताया गया। डाक्टर की सलाह पर करीब 6 महीने तक दो गोली प्रतिदिन खाई जो शिव कॉलोनी की डिस्पेंसरी में जाकर ली जाती थी। पूरा कोर्स करने के बाद दोबारा जांच करवाई तो टी.बी. पूरी तरह से समाप्त हो गई थी।
बॉक्स: टी.बी. की समय पर जांच व पूरा कोर्स करने पर हो सकते हैं निरोगीइसी प्रकार सैक्टर 6 के निवासी राजू (काल्पनिक नाम) ने बताया कि उसे बीते वर्ष खांसी और हल्का बुखार आता था, सरकारी अस्पताल में जांच करवाई तो टी.बी. सामने आई। डाक्टरों की सलाह से ईलाज करवाया और तीन गोली 6 महीनों तक रोजाना खाई, करीब 6 महीने के बाद दोबारा जांच करवाई तो टी.बी. ठीक हो गई। पूजा और राजू जैसे ऐसे कईं मरीज हैं जिन्होंने टी.बी. के लक्षणों का पता लगते ही इसकी जांच करवाई और डाक्टर की सलाह पर मुकम्मल ईलाज करवाया।

 


 

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