राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा व महिला एवं बाल विकास विभाग करें सजगता से कार्य, परिणाम कागजों पर नहीं धरातल पर चाहिए - उपायुक्त विनय प्रताप सिंह।

राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा व महिला एवं बाल विकास विभाग करें सजगता से कार्य, परिणाम कागजों पर नहीं धरातल पर चाहिए - उपायुक्त विनय प्रताप सिंह।

 

  • हर नागरिक के स्वास्थ्य का दायित्व हमारा, राष्ट्रीय पोषण माह में एनीमिया, डायरिया, हैंडवॉश, स्वच्छता, आयरन, पौष्टिक आहार पर किया जाएगा जागरूक, उपायुक्त ने बैठक में संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश।

करनाल 4 सितम्बर,   उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने कहा कि हर नागरिक के स्वास्थ्य की देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है, कुपोषण से कोई नवजात बच्चा, गर्भवती महिला व किशोरी ग्रस्त न हों,  इसकी जांच करके उसका उपचार करना और स्वस्थ और स्वच्छ रहने के लिए जागरूक करना, रोगग्रस्त को उपचार के लिए प्रेरित करना जैसी जानकारी राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान दी जाएं तो इसके बेहतर परिणाम होंगे। परिणाम धरातल पर हों तो बेहतर रहेगा, कागजों पर परिणामों के कोई मायने नहीं, इसलिए इस माह के दौरान शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी जिम्मेदारी को निभाएं और हर दिन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें

उपायुक्त बुधवार को लघु सचिवालय के सभागार में राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान जिला स्तर पर मनाए जाने वाले पोषण माह के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इस माह के लिए शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग व महिला एवं बाल विकास विभाग अपने कार्यक्रम बनाएं और इन दिनों में समाजसेवी संस्थाओं, पंचायतीराज प्रतिनिधियों से मिलकर इस माह में जरूरतमंदों के बीच में जाएं और उन्हें कुपोषण से बचने के उपायों की जानकारी दें। डायरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग समय पर ओआरएस का घोल का वितरण करें और ग्रामीण स्तर पर भी ओआरएस बनाने के तरीकों की जानकारी इस अभियान के दौरान दें। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कहा कि स्कूलों में भ्रमण करके लड़कियों के हिमोग्लोबिन की जांच करें और जिनमें कम हैं, उन्हें उचित दवाई दें और अन्य बीमारियों के लिए उनका सही से मार्गदर्शन करें।

सरकारी कॉलेजों व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों के हिमोग्लोबिन की करें जांच, बच्चों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी का दायित्व हमारा - डीसी विनय प्रताप सिंह
उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय पोषण माह कार्यक्रम के साथ-साथ बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा व महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस माह में जो कार्यक्रम होने हैं उन्हें ठीक प्रकार से करें, परंतु इसके अतिरिक्त इसी माह में जिले के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों व कॉलेजों में लड़कियों के हिमोग्लोबिन की भी जांच करनी है और यह भी देखना है कि पहले कितना एचबी था और अब कितना है। इन सबका डाटा तैयार करना होगा। हर बच्चे का एचबी बेहतर हो इसकी जिम्मेदारी भी हमारी बनती है। इस विशेष कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी को तत्परता से कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि जो भी सहयोग जिला प्रशासन से चाहिए, जिला प्रशासन देगा।
राष्ट्रीय पोषण माह में इन बीमारियों पर रहेगा फोकस
राष्ट्रीय पोषण माह में एनिमीया, डायरिया, हैंडवॉश, स्वच्छता, आयरन, पौष्टिक आहार के बारे में विभागों द्वारा जागरूक किया जाएगा। स्कूलों, आंगनवाड़ी केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं को बुलाकर उन्हें पौष्टिक आहार, टीकाकरण की जानकारी दी जाएगी। गर्भवती महिलाओं को बच्चे के जन्म के 6 माह तक बच्चे के लिए माता का दूध महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी और बच्चे के 100 दिन तक बच्चे के रख-रखाव, एएनएम, आशा वर्कर, आगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा जानकारी दी जाएगी।
 महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह में किए जांएगे कार्यक्रम
बैठक में परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण माह के लिए उन्होंने कार्यक्रम बना लिए हैं। कार्यक्रम के अनुसार पहले दस दिन सामाजिक संस्थाओं, सरपंचों के साथ बैठक की जाएगी, साईकिल रैली निकाली जाएगी, स्कूल के बच्चों के द्वारा स्लोगन व कविता प्रतियोगिता आयोजित करवाई जाएगी। अगले सप्ताह 8 सितम्बर से 14 सितम्बर तक नुक्कड़-नाटक, स्लोगन और न्यूट्रिन पर गीतों की प्रस्तुति, प्रभातफेरी तथा गांव स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एनीमिया की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा। कॉलेज के होम साईंस के बच्चों द्वारा आयरन के बारे में जागरूक किया जाएगा, 15 से 22 सितम्बर तक स्कूलों में बच्चों को हैंडवॉश के बारे में बताया जाएगा, स्लोगन और कविता प्रतियोगिताएं की जाएंगी, साईकिल रैली निकाली जाएगी, पौषक आहार के बारे में जागरूक किया जाएगा और 23 सितम्बर से 30 सितम्बर तक नुक्कड़-नाटक, प्रभातफेरी, बच्चों का वजन तोलना, स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करना शामिल है।

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