गन्ना व मक्का किसान मेला का आयोजन

गन्ना व मक्का किसान मेला का आयोजन

करनाल 14 नवम्बर,

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, उचानी, करनाल में गन्ना व मक्का किसान मेला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। अनुसंधान केंद्र के प्रांगण में आयोजित मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रोफेसर के. पी. सिंह, कुलपति, एच. ऐ. यू. हिसार द्वारा किया गया।

उन्होंने भारतीय किसानो को विश्व में प्रथम चीनी उत्पादक देश बनने पर बधाई दी। इस वर्ष हमने ब्राजील को भी पछाड़  दिया है। कुलपति ने गन्ना किसानों की मुख्य समस्याओं जैसे की गन्ना बिजाई, कटाई व ढुलाई का मशीनीकरण को विश्वविद्यालय व गन्ना मिलों की प्राथमिकता बताया।

साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा 25 लाख टिश्यू कल्चर नर्सरी उत्पादन की सुविधा निर्माण की जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रीय मृदा जांच प्रयोगशाला का उद्घाटन भी किया जिससे इस क्षेत्र के किसानों को विशेष लाभ होगा। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित तकनीकों विशेषत: उन्नत बीज, नम आर्द्र वायु उपचार तकनीक व जैविक ट्राईकोकार्ड का उपयोग करने की जरुरत बताई।

उन्होंने कहा कि गन्ना मिलों को चीनी के अलावा गुड़ व गुड़ से सम्बंधित उत्पाद, एथेनॉल व ऊर्जा उत्पादन करने कि आवश्यकता है।धान उत्पादन की समस्याओं से उबरने के लिए उन्होंने मक्का विशेषत: उच्च क्वालिटी व स्पेसिलिटी मक्का उगाने पर बल दिया । यह ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन व आय वृद्धि का एक सफल विकल्प है। किसानों ने मुख्य अतिथि का पगड़ी पहना कर स्वागत किया।

अनुसंधान निदेशक डॉ. एस. के. सेहरावत ने किसानों की समस्याओं के निवारण हेतु इस विश्विद्यालय की वचनबद्धता का आश्वासन दिया। उन्होंने किसानों को धान-गेहूं फसल चक्र में बदलाव कर गन्ना, मक्का, सब्जी, दलहनी व तिलहनी फसलों को अपनाने का आग्रह किया।

उन्होंने किसानों को कृषि में जल सदुपयोग हेतु उन्नत तकनीक जैसे टपका सिंचाई, फव्वारा सिंचाई व कम पानी में होने वाली फसलों को उगाने पर जोर दिया।  शुगरफेड के गन्ना सलाहकार डॉ. रोशन लाल ने इस केंद्र को अगेती किस्म सी.ओ. 160 विकसित करने के लिए बधाई दी व किसानों से चौड़ा खूड़ विधि, आधा खूड़ सिंचाई विधि, जमीन के स्तर से गन्ना कटाई व जैविक कीट नियंत्रण पर बल दिया।
डॉ. धर्मबीर यादव, क्षेत्रीय निदेशक ने इस केंद्र द्वारा अर्जित उपलब्धियों का उल्लेख किया जिसमें गन्ने की 12 व मक्का की 16 उन्नत संकर किस्मों का विकास किया है, जिसके फलस्वरूप इस केंद्र को भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद द्वारा सर्वोत्तम शोध केंद्र के अवार्ड से नवाजा गया है ।

मक्का की एचक्यूपीएम 1 किस्म को सर्वोत्तम संकर मक्का किस्म की मान्यता भी प्रदान की गयी है। उन्होंने बताया की इस केंद्र पर गन्ना व मक्का के आलावा संसाधन संरक्षण, खरपतवार नियंत्रण, धान, गेहूं व सब्जी विज्ञान से सम्बन्धी शोध कार्य भी किये जाते हैं।

परियोजना निदेशक, डॉ. सतीश खोखर ने धन्यवाद ज्ञापन किया व कहा कि इस केंद्र ने हमेशा किसानों की समस्याओं को ध्यान में रख कर अनुसंधान कार्य किये हैं व सफलताओं के नए आयाम स्थापित किये हैं। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. ओ. पी. चौधरी ने किया।

मेले में हरियाणा प्रान्त के विभिन्न जिलों से 1000 से अधिक किसानों,अधिकारियों एवं गन्ना विशेषज्ञों ने भाग लिया। मेले में किसानों हेतु विभिन्न प्रदर्शन प्लाटों का आयोजन भी किया गया जिसमें गन्ने व मक्का की नवीन किस्मों, उनकी उन्नत तकनीकों द्वारा बिजाई, उन्नत मशीनों व अन्त: फसलों  का प्रदर्शन तथा परजीवियों द्वारा कीटों की जैविक रोकथाम को प्रदर्शित किया गया।

मेले में 10 अनुसंधान संस्थानों आईआईडबल्यूबीआर, एसबीआई, सीएसएसआरआई, आईएआरआई  आदि  व 12 कंपनियों ने स्टॉल लगाए जिसमें किसानों ने विशेष रूचि दिखाई। फसल अवशेष प्रबंधन से संबधित मशीनों की प्रदर्शनी को किसानो ने खूब सराहा।

इस अवसर पर विशेष अतिथियों में मुख्य अभियंता श्री भूपेंद्र सिंह, डॉ. विजय कुमार, डॉ. आर. एस. पन्नू, डॉ. मेहर चंद, डॉ. राकेश मेहरा, डॉ. मेहर चंद कम्बोज, डॉ. रमेश कुमार, विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों के संयोजक, भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद, विश्वविद्यालय व क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक, गन्ना मिलों के अधिकारी व प्रगतिशील किसान व महिला किसान उपस्थित थे ।

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