सरकारें बनाने और बिगाड़ने में "रागिनी" की रही अहम भूमिका 

सरकारें बनाने और बिगाड़ने में "रागिनी" की रही अहम भूमिका 
  •  जब भी किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ रागिनी बनी, वे दोबारा सत्ता में नहीं आए 

भजनलाल बंसीलाल मनोहरलाल 

करनाल ( तिलकराज बंसल ) करनाल रागिनी कहने में सिर्फ एक शब्द है, लेकिन हरियाणा की राजनीति में सरकारें बनाने और बिगाड़ने में इसका अहम योगदान रहा है। रागिनी के तड़के बिना यहां की राजनीति अधूरी है। इतिहास गवाह है, जब-जब किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ रागिनी जनमानस की जुबां पर चढ़ गई तो अगली बार वे मुख्यमंत्री नहीं बन सके। जब-जब प्रशंसा में रागिनी बनीं तो वही मुख्यमंत्री दोबारा सत्ता में आए हैं। अब मनोहरलाल खट्टर के शासनकाल को लेकर खूब रागिनी बन रही हैं। उनकी शान में कसीदे गढ़े जा रहे हैं, जिससे साफ संकेत है कि वे पुनः हरियाणा की बागडोर संभालेंगे।
 रै भजनलाल बिश्नोई, तन्नै बिजली कड़े लकोई 
जब भजनलाल सूबे के मुख्यमंत्री थे तो उनके कार्यकाल में बिजली की हालत ज्यादा खराब हो गई थी। हर जुबां पर रागिनी के यही बोल थे " रै भजनलाल बिश्नोई, तन्नै बिजली कड़े लकोई"। ये रागिनी इतनी प्रचलित हो गई थी कि वे दोबारा सरकार में नहीं आ सके।
 रै गोलागढ़िया धोखा खा गया, आदमपुरिया इसनै फँसागया 

भजनलाल को हरियाणा की राजनीति के चाणक्य की संज्ञा दी जाती है। कहा जाता है कि उन्होंने कई बार राजनीतिक जोड़-तोड़ किए। जब भजनलाल ने विधायकों को तोड़कर सरकार बनाई तो ये रागिनी जुबां पर छाई " हरियाणा के विधायकों के लग गए मोल। कोई बिकया मूंगे मै, अरै कोई बिकया रुंगे मै ।
भजनलाल राजनीति के इतने माहिर खिलाड़ी थे कि उन्होंने बंसीलाल को केंद्र सरकार में सिर्फ इसलिए रेलमंत्री बनवा दिया था, ताकि वे खुद हरियाणा के मुख्यमंत्री बन सकें, लेकिन जनता को भजनलाल की राजनीति समझ में आ गई और रागिनी बनी " रै गोलागढ़िया धोखा खा गया, आदमपुरिया इसनै फँसागया, चंडीगढ़ छोड़ दिल्ली आग्या "। भजनलाल आदमपुर के रहने वाले थे, इसलिए लोग उन्हें आदमपुरिया कहते थे। ये रागिनी इतनी चली की भजनलाल को कुर्सी छोड़नी पड़ी और बंसीलाल मुख्यमंत्री बने।
 मनोहरलाल खट्टर खास शान हरियाणे की 


मनोहरलाल खट्टर ने जब हरियाणा की कमान संभाली तो उनके खिलाफ नकारात्मक वायुमंडल बन गया था। विपक्ष के साथ-साथ सरकार के कुछ विधायक भी उनके खिलाफ हो गए थे। सरकार बनते ही प्रदेश में रामपाल, डेरामुखी और जाट आंदोलन हुए। तब रागिनी बनी "रै कित्त तै आग्या यू खट्टर, रोज आड़े बाजै टक्कर" । धीरे-धीरे सरकार की जनहितैषी योजनाएं पूरी होने लगी, तो खट्टर सरकार के पक्ष में वायुमंडल बनने लगा। कई खुले मंचों पर पक्ष ही नहीं विपक्ष ने भी मुख्यमंत्री की ईमानदारी और पारदर्शिता की सराहना की। चुनाव तक आते आते स्थिति ऐसी हो गई कि सभी विरोधी पार्टियां धराशायी हो गई और मनोहरलाल के नाम का पूरे हरियाणा में डंका बज गया। प्रदेश में हुए नगर निगम चुनाव में पांच की पांच सीट पर भाजपा के मेयर बन गए। जींद उपचुनाव में भी भाजपा का विधायक बना। लोकसभा चुनाव में तो 10 की 10 सीटों पर भाजपा की प्रचंड जीत हुई और रागिनी बनी "मनोहरलाल खट्टर खास शान हरियाणे की, भारत माँ के राजदुलारे आन-बान हरियाणे की" । रोजगार के मामले में जब खट्टर सरकार ने योग्यता के आधार पर नियुक्तियां की तो हर हरियाणावासी मनोहरलाल का कायल हो गया।
 जिसकी हुई बड़ाई, उसकी सरकार दोबारा सत्ता में आई 
हरियाणा की राजनीति में इतिहास गवाह है आजतक रागिनी के माध्यम से जिसकी बड़ाई हुई है वही सरकार दोबारा सत्ता में आई है। जब-जब सरकार के खिलाफ रागिनी बनी उस सरकार की चूलें हिल गई और उन्हें विपक्ष में बैठना पड़ा है।

तिलक राज बंसल पत्रकार
 

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