वैश्विक पर्यावरण संकट का हल भारतीय संस्कृति के पास : प्रो. चौहान

वैश्विक पर्यावरण संकट का हल भारतीय संस्कृति के पास : प्रो. चौहान

करनाल।

पृथ्वी और प्रकृति के साथ भारतीय संस्कृति में दर्शाए गए सिद्धांतों के अनुरूप मानव का रिश्ता विकसित किए बिना मानवता के अस्तित्व पर मंडराते पर्यावरण असंतुलन के ख़तरे को टाला नहीं जा सकता।

 

हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष प्रोफ़ेसर वीरेंद्र सिंह चौहान ने गोवा विश्वविद्यालय (पणजी),जांभाणी साहित्य अकादमी (बीकानेर) और हरियाणा ग्रंथ अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में अपने उद्बोधन में यह टिप्पणी की।गोवा विश्वविद्यालय के दीनानाथ मंगेशकर सभागार में आयोजित समापन सत्र को प्रो. चौहान ने करनाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया।

 

अपने संबोधन में प्रोफ़ेसर चौहान ने सर्वप्रथम पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।उन्होंने कहा कि आज सारा देश और दुनिया में तमाम मानवतावादी राष्ट्र पुलवामा के अमर बलिदानियों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि बिश्नोई मत के संस्थापक जंभोजी महाराज की विचारधारा से प्रेरित होकर राजस्थान के खेजड़ली में वृक्षों की रक्षा करते हुए शहीद हुए 363 बिश्नोई पर्यावरण योद्धाओं का बलिदान भी सदियों से अपने क़िस्म के एक अनूठे बलिदान के रूप में याद किया जा रहा है।

 

आज जब सारी दुनियाँ मानव-निर्मित मगर प्रकृति-विरोधी व्यवस्थाओं के कारण संकट में पड़ी धरती को लेकर चिंतित है,भारत विश्व को यह कहने की स्थिति में है कि इस संकट का समाधान हमारी ज्ञान परंपरा में उपलब्ध है।

 

प्रोफ़ेसर वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि वैदिक काल से भारत के ऋषि धरती के साथ माँ बेटे का नाता स्थापित करने की बात कहते आए हैं।

 

यदि यह संस्कार सारा संसार स्वीकार कर ले तो फिर पर्यावरण का असंतुलन स्वतः समाप्त हो जाएगा क्योंकि कोई पुत्र माँ से पोषण तो पा सकता है मगर उसका शोषण किसी सूरत में नहीं कर सकता।

ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष प्रो. चौहान ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल की अगुवाई में अकादमी हिन्दी भाषा के प्रचार प्रसार के साथ साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को पुष्ट करने के लिए श्रेष्ठ पुस्तकों के प्रकाशन समेत हर संभव कार्य कर रही है।

जाम्भाणी अकादमी महासचिव डॉ सुरेन्द्र बिश्नोई ने बताया कि भारत सरकार के आयुष मंत्री श्रीपाद नाइक , गोआ के ऊर्जा मंत्री नीलेश कबराल , मारीशश से रामदेव धुरन्धर , जाम्भाणी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष स्वामी कृष्णनद जी , हिंदी विभाग गोवा वि वि के अध्यक्ष डॉ वृषाली मान्द्रेकर , संयोजक डॉ रविन्द्र मिश्र ,  डॉ करुणाशंकर उपाध्याय अध्यक्ष हिंदी विभाग मुम्बई ने भी संगोष्ठी में आये देश-विदेश के प्रतिभागियों को सम्बोधित किया। संगोष्ठी में 25 विश्वविद्यालयों और 70 महाविद्यालयों के प्रतिभागी शामिल हुए। विभिन्न सत्रों में  80 शोधपत्र पढ़े गए और विद्वानों के व्याख्यान हुए। 

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