विद्यालय परिसर में छात्रो की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग

 विद्यालय परिसर में छात्रो की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग

करनाल

 

    विद्यालय परिसर में छात्रो की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की ओर से तैयार की गई नियमावली पर मंगलवार को शहर के कल्पना चावला राजकीय मैडिकल कॉलेज के सभागार में मौलिक शिक्षा विभाग की ओर से एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया।

इसमें आयोग से पधारे सदस्यो व भिन्न-भिन्न स्थानीय विभागो के अधिकारियों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर विस्तार से चर्चा की और इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक बच्चा महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ राष्ट्रीय सम्पत्ति है, उसका वर्तमान और भविष्य सुरक्षित बनाना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों ने भी अपनी भागीदारी रखी। 

 

 एनसीपीसीआर की सलाहकार डॉ. मधुलिका शर्मा ने अपने वक्तव्य में चौंका देने वाले आकंडे प्रस्तुत किए। उन्होने बताया कि देश में हर वर्ष करीब 80 हजार बच्चे लापता हो जाते हैं, प्रतिदिन की संख्या देखे तो यह 174 है और यह आंकडे दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में है। उन्होंने कहा कि लापता बच्चो में कुछ अपनी मर्जी से, भटक जाने से या किसी के द्वारा अपहरण कर लेने से गायब हो जाते हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो कभी लोटकर वापिस घर नही आए। ट्रैफिकिंग यानि बच्चो की तस्करी भी बच्चो के लापता होने का एक कारण है और उसके बाद बच्चो का भविष्य कैसा होता है, इसका अनुमान भयावह ही कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चो से जुड़ी इस समस्या को लेकर समाज, परिवार, सरकारी तंत्र या किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार नही ठहराया जा सकता, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।

 

उन्होंने बताया कि बिछड़े बच्चो की सूचना के लिए 1098 हैल्पलाईन नम्बर दिया गया है। यदि किसी को कहीं भी बिछड़ा हुआ बच्चा मिले, तो अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानकर उसकी सूचना इस नम्बर पर दे देनी चाहिए। उन्होंने एक ओर महत्वपूर्ण बात कही कि बच्चो को सैंसेटाईज़ करना यानि उन्हे अच्छे-बूरे का ज्ञान और जानकारी भी देनी चाहिए। वर्कशॉप में एनसीपीसीआर के टैक्नीकल एक्सपर्ट रजनीकांत व दिव्यांशी ने बच्चो की सुरक्षा को लेकर कानूनी जानकारी होने पर बल दिया और कुछ अंतरराष्टï्रीय व भारतीय कानूनो का जिक्र किया।

 

उन्होंने कहा कि अध्यापक व माता-पिता बच्चे को डांटने की बजाय उसकी छोटी-छोटी बातो को समझे और उसके साथ फेवर करें। रेगूलर काउंसलिंग रखें, पोजीटिव एंगेजमेंट के साथ-साथ अभिभावक अपनी इन्वोल्वमेंट बनाए रखें। उन्होंने कहा कि किताबी ज्ञान हासिल करने के साथ-साथ डिजीटल लर्निंग भी करवाए, आजकल के बच्चे इसे आसानी से कर लेते हैं। दिव्यांशी ने बच्चो के कॉर्पोरेट दंड, शारीरिक व दिमागी शोषण पर बोलते हुए वर्कशॉप में उपस्थित शिक्षाविदों से कई तरह के सवाल पूछे और उनके सुझाव भी लिए। 

 

तकनीकि सत्र में स्कूल वाहन और बच्चो की सुरक्षा को लेकर भी वक्ताओं ने काफी देर तक चर्चा की। वाहन चालको से कई तरह के सवाल किए और बच्चो की सुरक्षा को लेकर वे कितने सजग रहते हैं, नियमावली का पालन कर रहे हैं या नही, इसकी परख की। वक्ताओं ने बताया कि प्रत्येक स्कूल वाहन पर हैल्पलाईन नम्बर जरूर लिखा हो, पांच साल से कम अनुभव वाले चालक वाहन ना चलाएं। प्रत्येक ऐसे चालक की पुलिस वैरीफिकेशन होनी चाहिए, जो थाने में नही घर पर जाकर की जाए। बच्चे को वाहन में सुरक्षित चढ़ाने, उतारने और अभिभावको तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बस अटेण्डेंट की होनी चाहिए। यदि वाहन में छात्राएं या लड़कियां भी हैं, तो फिमेल अटेण्डेंट का होना जरूरी है। 

 

यातायात पुलिस के प्रचार अधिकारी राजीव रंजन ने अपने वक्तव्य में बच्चो के साथ अभिभावको का प्रेम और उन्हे समय देना तथा समाज में मनुष्यता की कमी पर वैज्ञानिक तकरीर कर सबको झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि आज बेशक हम तरक्की के युग में रह रहे हैं, हरियाणा को तरक्की को मॉडल भी कहा जाता है, लेकिन साल में 6 हजार लोग सड़क पर अपनी जान गवां देते हैं, इनमें ज्यादा बच्चे होते हैं। इनकी सुरक्षा का जिम्मा राजनीतिक दलो के मसौदे में शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चो की सुरक्षा को लेकर शिक्षको पर अधिक दायित्व है। दूसरी ओर समाज में बच्चो की सुरक्षा को लेकर रचनात्मकता और सृजनता भी होनी चाहिए। 

 

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी राजपाल ने बोलते हुए कहा कि विद्यालय में छात्रो की सुरक्षा के लिए जो मैन्यूल या नियमावली 2017 में तैयार की गई थी, सभी स्कूलो को उसका पालन करना चाहिए। प्रत्येक 15 दिन मेें स्कूल कमेटी की मिटिंग के एजेंडे में इसे जरूर शामिल रखें। स्कूल मेनेजमेंट प्रतिदिन परिसर में राउण्ड लगाएं। तीन से छ: साल के बच्चो के लिए अलग शौचालय ब्लॉक होने चाहिए, जिसमें अटेण्डेंट के साथ-साथ पानी का प्रबंध भी हो। द्वियांग बच्चो के लिए सभी सुविधाएं होनी चाहिए। कमरो की खिड़कियां, सीसीटीवी, बस में लगे कैमरे तथा छात्राओं के लिए अलग से शौचालय जैसी छोटी-छोटी व जरूरी बातो की मोनिटरिंग रेगूलर रखें। प्रार्थना सभा में बच्चो को वाहन में चढ़ाने-उतारने और किन बातो का ध्यान रखना चाहिए, इस पर जागरूक करें। 

  वर्कशॉप में यातायात पुलिस के प्रतिनिधियों के अतिरिक्त आरटीए कार्यालय के सहायक सचिव सतीश जैन व निरीक्षक जोगिन्द्र ढुल भी उपस्थित थे। 

फोटो कैप्शन:- कल्पना चावला राजकीय मैडिकल कॉलेज के सभागार में उपस्थित वक्ता और श्रोता।

Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Loading...
Loading...

Comments