रास्ते पर बह रही कीचड़ से जनता त्रस्त ग्राम प्रधान वकालत में मस्त 

रास्ते पर बह रही कीचड़ से जनता त्रस्त ग्राम प्रधान वकालत में मस्त 

कसगॅजा 

जहाॅ एक और केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता की अलख जगा रही है। वहीं कुछ ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान व जिम्मेदार अधिकारी लापरवाही करने से बाज नहीं आ रहे हैं। जिससे प्रदेश सरकार की मंशा पर पूरी तरह पानी फिरता नजर आ रहा है।

यही वजह है कि अधिकांश ग्राम पंचायतें आज भी सफाई व्यवस्था व विकास के स्तर में काफी हद तक पिछड़ी हुई है।जिसकी वानिगी विकास खंड पूरनपुर की न्याय पंचायत कसगंजा में देखने को मिल रही है। वास्तविक हालातों से देखा तो इस क्षेत्र की सफाई व्यवस्था काफी हद तक पिछड़ी हुई है।

ग्राम पंचायत कसगंजा  में संत राम सक्सेना के घर से मुरारी लाल शर्मा के घर तक एवं कृष्णपाल राठौर के घर से उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को जाने वाला  रास्ता एवं नाली का निर्माण ना होने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।  नालियां टूटी होने के साथ-साथ गंदगी से पटी होने के कारण घरों से निकलने वाला पानी रोड पर बहने लगता है। जिससे आए दिन स्कूली छात्र इस गंदे पानी में गिर कर घर वापस लौट जाते हैं।

यही नहीं इस रास्ते पर आमजन का निकलना भी काफी मुश्किल हो रहा है। जानकारी के अनुसार क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मचारी नदारद रहते है। प्रधान एवं सचिव की मेहरबानी के चलते सफाई कर्मी अपनी ड्यूटी के प्रति सजग न रहकर चंद पैसों पर निजी सफाई कर्मियों से कभी-कभार पंचायतों में सफाई करवाते हैं।

वह भी प्रधान  के मोहल्ले में एवं उनके करीबियों के यहां ही सफाई करता है यही वजह क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतें सफाई व्यवस्था एवं विकास के क्षेत्र में आज भी पिछड़ी हुई हैं। जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों से उठती बदबू से लोगों को निजात नहीं मिल पा रही है। जिससे यहां के ग्रामीणों में संक्रामक रोग फैलने की आशंका व्यापत रहती है। इसके बाद भी ग्राम प्रधान  इस समस्या की ओर ध्यान ना देकर अपनी  वकालत की प्रैक्टिस में लगे हुए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है।कि जगह जगह नालियां टूटी हुई है। जिससे निकलने वाला बदबूदार पानी रास्ते में बह रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों ने इस समस्या से कई बार ग्राम प्रधान को अवगत कराया लेकिन ग्राम प्रधान  इस समस्या से अंजान बने बैठे हैं। इस बदबूदार पानी से निकलना स्थानीय ग्रामीणों की मजबूरी ही नहीं एक ज्वलंत समस्या बनी हुई है।

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