विकास कार्यों  तरस रही सिधौली कसमंडा विकासखंड की जलालपुर ग्राम पंचायत

विकास कार्यों  तरस रही सिधौली कसमंडा विकासखंड की जलालपुर ग्राम पंचायत

              नरेश गुप्ता ब्यूरो रिपोर्ट

सिधौली सीतापुर -

ग्रामीण विकास अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आरसीसी सड़क बनाने का ख्वाब अभी तक अधूरा है। सिर्फ बड़ी ग्राम पंचायतों में आरसीसी सड़कें बनीं, अन्य के रास्ते खस्ताहाल हैं। बनाई गई सड़कें भी देखरेख के अभाव में ऊबड़-खाबड़ हो चुकी हैं। इसकी फिक्र न शासन को है और न ही जनप्रतिनिधियों को।

एक दशक पहले अभियान की शुरुआत जोरशोर से हुई तो ग्रामीणों को गांवों की हालत में सुधार होने की उम्मीद जागी।मगर उनकी यह उम्मीद ख्वाब बन कर ही रह गई। गांव में चमचमाती सड़कें तो दरकिनार जो पुराने खड़ंजे थे वह भी उखड़ कर बेकार हो गए।

एल ग्रेड की नालियों का तो नाम-ओ-निशान ही मिट गया। रही सही कसर ग्राम प्रधान जैसे जनप्रतिनिधियों ने पूरी कर दी। चंद दिनों में ही गांव के रास्ते गड्ढों में तबदील हो गए।

आरसीसी सड़क के निर्माण की तो छोड़िए गांव में पिछले कई वर्षों से खनन जी का भी निर्माण नहीं कराया गया किंतु निर्माण के नाम पर सरकारी धनराशि जरूर मंजूर करा ली गई है संबंधित ग्राम पंचायत के अधिकारी मानव आंख पर पट्टी बांध कर बैठे हैं ग्राम पंचायत में निर्माण कार्य हुआ या नहीं हुआ इससे कोई सरोकार ही नहीं रखते कूलर और पंखों में बैठे विकास कार्यों के ठेकेदार सिर्फ ग्रामीण मजदूरों का सिर्फ शोषण ही करते आए हैं सीतापुर के विकासखंड कसमंडा के ग्राम पंचायत जलालपुर का या हाल देखकर दंग रह जाएंगे जी हां जहां केंद्र सरकार और राज्य सरकार ग्रामीण स्तर को दुरुस्त करने में लगी है वही ग्राम प्रधान रामेश्वर यादव जैसे जनप्रतिनिधि अपनी ही ग्राम पंचायत के विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ योजनाओं की धनराशि से खुद की जेबें भरते आए हैं।

ग्राम पंचायत खड़ंजा ही नहीं सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।   प्रधानों के समाने ग्रामीण अपनी व्यथा रखते हैं तो वह धनराशि नहीं होने का हवाला देकर हाथ झाड़ लेते हैं। जलालपुर के प्रधान रामेश्वर यादव कहते हैं कि इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों को राशि उपलब्ध नहीं कराई गई।

कोई नहीं लेता सुध

अभियान की शुरूआत में चंद गांवों में आरसीसी सड़कें बनाई गई। मगर दूर दराज के गांवों में इन की गुणवत्ता को दरकिनार कर दिया गया। जहां निर्माण हुआ वह चंद दिनों में ही बेकर हो गई। सरकार बदली तो प्राथमिकताएं भी बदली गई। अब बीते एक दशक से इस मद के लिए धनराशि मंजूर ही नहीं हो रही है।

दस लाख तक खर्च

तकनीकि लोगों की माने तो आरसीसी सड़क निर्माण पर लगभग 27000 रुपये प्रति मीटर की लागत आती है। लेकिन रोजमर्रा बढ़ रही निर्माण सामग्री की दरों ने इनकी लागत और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक अब गांवों में आरसीसी रोड की लागत बढ़ती जा रही है।

नाली भी बनती थी

इन सड़कों के किनारे नालियां भी बनती थीं। ग्राम पंचायत में एक आरसीसी सड़क अनिवार्य की गई थी। बड़ी ग्राम पंचायतों में गलियों में भी सड़क बनाने का प्रावधान था।

बड़ी ग्राम पंचायतों पर ही ध्यान

बोले ग्रामीण

ग्राम पंचायत जलालपुर  के  ग्रामीणों के अनुसार  नालियां टूटी पड़ी है। वर्षो से सुधार नहीं हुआ है। साथ ही खड़ंजा पूर्णता ध्वस्त हो चुके हैं वही प्राथमिक विद्यालय की बाउंड्री वाल भी मानव सपना बन चुकी है इतना ही नहीं ग्राम पंचायत विकास कार्यों से मानव कोसों दूर है प्रधानमंत्री आवास ही नहीं शौचालय जैसी योजनाओं के नाम पर धन जमकर धन उगाही की गई अधिकारियों की सरपरस्ती के चलते योजनाओं का लाभ सिर्फ उन्हें ग्रामीणों को दिया गया जिन्होंने प्रधान और संबंधित अधिकारियों की जेबें गरम की

बाउंड्री वाल विहीन विद्यालय परिसर बदहाल

तमाम प्रयासों के बावजूद परिषदीय विद्यालयों की हालत में सुधार नहीं हो पा रही है। ऑपरेशन कायाकल्प योजना भी फलीभूत होती नहीं दिखाई दे रही। कहीं के विद्यालय चहारदीवारी विहीन तो कुछ में आज तक शौचालय की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो सकी है।  सीतापुर के विकासखंड कसमंडा के जलालपुर गांव के सरकारी  विद्यालय को ही लें ले तो यहां चहारदीवारी नहीं बन पाई है। इसके चलते शिक्षक व अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चितित रहते हैं।

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