जनता का गाँधी बाबा के बाँदर किहे रहौ

जनता का गाँधी बाबा के बाँदर किहे रहौ

कवियों की रचनाओं ने मचाया धमाल,श्रोताओं की तालियों से गुंजायमान रहा पंडाल

              रिपोर्टर - जयदीप शुक्ला

तरबगंज,गोण्डा-

मंगलवार की शाम तरबगंज के गिरधर पुर गाँव में गणेश लक्ष्मी पूजन के पंडाल में साहित्यिक जागरण सह विराट कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ।

जिसमें दूर दराज से आए हुए कवियों ने देर रात तक श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किए रखा। मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता व पूर्व जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र पाण्डेय उर्फ नानबच्चा पांडेय की उपस्थिति रही जो कि कार्यक्रम के प्रारंभ से अंत तक कवियों के उत्साहवर्धन में जमे रहे।

वरिष्ठ कवि सुरेंद्र सिंह झंझट की अध्यक्षता व रवीन्द्र पाण्डेय रवि के संयोजन व जोरदार संचालन में  सभी कवियों ने अपनी अपनी विधा में धुआँधार काव्य पाठ किया।

युवा कवि संदीप सुरीला ने  सरस्वती वंदना करते हुए माँ का आह्वान किया " शारदे शारदे शारदे शारदे, अपने आँचल का माँ  तू मुझे प्यार दे, अपनी ओजस्वी कविता से सब को उत्साहित करते हुए युवा कवि विनय अक्षत ने अपना चर्चित गीत " केशव कहते हे पार्थ सुनो, कब युद्ध जरूरी होता है, पढ़कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।इसके बाद  हास्य व्यंग्य के कवि जय दीप सिंह "सरस" गोण्डवी ने सभी श्रोताओं को खूब गुदगुदाया प्रशासनिक व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए उन्होंने पढ़ा कि " आँखिन मा धूरि झोंकि कै आँधर किहे रहौ,

भीतर से चांड़ि चांड़ि कै दाँदर किहे रहौ, 

न देखि सकै सुनि न सकै बोलि न सकै 

जनता का गाँधी बाबा कै बाँदर किहे रहौ।।

अपनी ओजस्वी वाणी व कविता के लिए पूरे देश में पहचाने जाने वाले वरिष्ठ कवि कृष्ण कुमार सिंह दीप ने पढ़ा कि " जितने शीश कटाए हमने दुश्मन को सहलाने में, उतने शीश नहीं कट सकते पाकिस्तान मिटाने में।

मनकापुर से आए हुए केदार नाथ मिश्र "ललक" ने अपनी हास्य कविताओं से श्रोताओं को पेट पकड़ कर हँसने पर मजबूर कर दिया उन्होंने पढ़ा कि "जब तक न लागै दाँव कहूं सोचौ उपाय परधानी कै,

बड़का न सही छोटकै पाऊ लैसन्स लेव बेइमानी कै।

 कवयित्री ज्योतिमा शुक्ला "रश्मि" ने कहा कि " रात की बात को मत सुबह कीजिए, 

बात मानो मेरी मत जिरह कीजिए।

रवीन्द्र पाण्डेय रवि ने अपनी हास्य पैरोडी से खूब हलचल मचाई बहेला से परेशान किसानों की ओर से उन्होंने मुख्यमंत्री से एक शिकायती गीत पढ़ा कि " सफाचट खेतिया किसनिया हे बाबा, कइसै चलाई दाना पनिया हो कुछ बोला,

अब खेती का खाँय बहेला हो कुछ बोला। अपना अध्यक्षीय काव्य पाठ करते हुए सुरेन्द्र सिहं झंझट ने कहा कि "अपमान वो बरदाश्त कभी कर नहीं सकते, होते हैं जो शहीद कभी मर नहीं सकते।

अंत में कार्यक्रम के मुख्य आयोजक रमेश पांडेय जी ने उपस्थित सभी कवियों व सम्मानित अतिथियों श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

इस अवसर पर मुख्यातिथि जीतेंद्र कुमार पांडेय के साथ ही रमेश पांडेय,घनश्याम पांडेय,आनंद मिश्रा, लवकुश मिश्र,पंडित मंजीत मिश्रा,जितेंद्र पांडेय, मनीष पाण्डेय, मोहन पांडेय समेत सैकड़ों के तादाद में श्रोतागण मौजूद रहे।

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