आदि गंगा नाम से विख्यात गोमती नदी अतिक्रमण के चलते प्रतिदिन सिकुड़ रही है  

आदि गंगा नाम से विख्यात गोमती नदी अतिक्रमण के चलते प्रतिदिन सिकुड़ रही है  

पसगवां खीरी

आदि गंगा नाम से विख्यात गोमती नदी अतिक्रमण के चलते प्रतिदिन सिकुड़  रही है

प्रदेश की राजधानी लखनऊ की लाइफ लाइन कही जाने वाली या नदी अपने उद्गम स्थल पीलीभीत जिले के माधव टांडा स्थित गोमती ताल से लेकर बनारस के पास गंगा में मिलने तक एक बड़ी आबादी की प्यास बुझा कर किनारे रहने वालों के लिए जीवनदायिनी का रूप धारण करती है 


तहसील मोहम्मदी में इसके किनारों पर टेढ़े नाथ धाम जंगली नाथ गरीब नाथ सिद्ध बाबा जैसे प्रसिद्ध स्थान है फिर भी यहां के स्थानीय निवासी पुल ना होने के कारण नाव का सहारा लेते हैं वर्ष 2012 में सिमरा जानीपुर काकड़ घाट पर अत्यधिक बाढ़ आने के कारण एक बड़ी दुर्घटना हुई थी जिसमें नाव पलटने से पांच श्रद्धालुओं को अपनी जान गवानी पड़ी थी

जिसके बाद यहां आकर कई नेताओं ने पुल बनवाने की बात भी कही थी लेकिन उनके वादे कागजों तक ही सीमित रह गए यह रास्ता बरवर राष्ट्रीय राजमार्ग से सिमरा जानीपुर होते हुए काकड़ घाट सैदापुर टेढ़े नाथ धाम आदि को जोड़ते हुए अमीनगर को जोड़ता है यहां की जनता को सिर्फ नेताओं से खोखले वादे मिले पुल  न होने के कारण अत्यधिक परेशानी का सामना करती है फुल न होने से यहां के स्थानीय निवासी व बाहर से आए श्रद्धालु भी नाव का सहारा लेने को मजबूर हैं

 

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