गन्ने की खेती बना मुसीबत का सबब, नहीं चाहते गन्ना किसान अब खेती करना

गन्ने की खेती बना मुसीबत का सबब, नहीं चाहते गन्ना किसान अब खेती करना

कुशीनगर


किसानों के लिए गन्ने की खेती करना परेशानी का सबब बन गया है। पर्ची न मिलने के कारण उनकी गन्ने की फसल खेतों में खड़ी है। पर्ची के लिए किसान अधिकारियों के यहां गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक उन्हें इस समस्या का हल निकलता दिखाई नहीं पड़ता।

एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार की ओर से उन्हें नगद मूल्य देने वाली खेती करने की सलाह दी जा रही है। सरकार की मंशा के अनुरूप किसानों ने गन्ने की खेती की लेकिन अब यहीं गन्ना किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। उनकी कई बीघा गन्ने की फसल खेतों में खड़ी है लेकिन पर्ची के अभाव में वह उसकी बिक्री नहीं कर पा रहे हैं तो दूसरी तरफ चीनी मिल खड्डा ने 30 अप्रैल को पेराई सत्र के समापन की घोषणा कर दी है

जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है। पीड़ित गन्ना किसान आंदोलन के मूड में दिख रहे हैं।अगर समय रहते स्तिथि को संभाला नहीं गया तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।आश्चर्य की बात यह है कि खेतों में गन्ने की फसलें खड़ी है और मिल नो केन में बंद हो जा रहा है। 

कुछ किसानों की एक पखवारे से ट्राली पर लदी गन्ना क्रय केंद्रों पर खड़ी है लेकिन उनके पास पर्ची नहीं है कि वह उसकी तौल करा सकें। क्षेत्र के किसानों का कहना है पूर्व में किए गए गन्ना सर्वे के अधिकारियों की निष्क्रियता से किसानों को समस्या झेलनी पड़ रही है। किसान पेड़ी को बेंचकर उसमें गेहूं और अन्य फसल की बुवाई कर कुछ मुनाफा पा लेते हैं। लेकिन बिक्री न होने से किसानों के लिए समस्या पैदा हो रही है।

चीनी मिल की ओर से गन्ने का दोबारा सर्व कराया गया। इसके बाद में पर्ची का वितरण किया जा रहा है। इसमें भी कर्मचारी किसानों के साथ में अन्याय कर रहे हैं क्योंकि इस बार गन्ने का उत्पादन पिछले सालों के मुकाबले अच्छा हुआ है। इस साल करीब एक बीघा में 70 से 80 क्विंटल गन्ना निकल रहा है। जबकि चीनी मिल कर्मचारी केवल 40 से 45 क्विंटल प्रति बीघा गन्ने का उत्पादन मान रहे हैं।
वहीं खड्डा क्षेत्र के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि जब तक सभी गन्ने की पेराई नहीं हो जाती तब तक मिल बंद होने नहीं दिया जाएगा।

क्या कहते हैं गन्ना किसान

उत्पादन के हिसाब से नहीं मिल रही पर्ची


गन्ना किसानों को उत्पादन के हिसाब से पर्ची दी जाए। उन्हीं के अनुसार ही वह गन्ने को बेच पाएंगे। लेकिन पर्ची देने में किसानों के साथ में धोखा हो रहा है। उनका खेतों में गन्ना ज्यादा और पर्ची कम दी जा रही है।
आलोक तिवारी, गन्ना किसान

नहीं उतर रही कोई योजना धरातल पर


गन्ना किसानों का हर स्तर पर उत्पीड़न हो रहा है। उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। वजह है कि घोषणा तो किसानों के हित में हो रही है लेकिन धरातल क्रियान्वयन बिल्कुल नहीं हो रहा है। इस वजह से यहां पर मौजूद अधिकारी व कर्मचारी किसानों को परेशान करने में लगे हैं।
मिंटू रौनीयार, गन्ना किसान

बीच में बंद न हो चीनी मिल


किसानों का गन्ना अब भी खेतों में खड़ा हुआ है। इससे परेशानी हो रही है। अगर चीनी मिल ने किसान का एक-एक गन्ना नहीं खरीदा, तो उनके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। किसानों को उनका हक दिलाया जाएगा।
 

सुभाष गौतम बसपा नेता

रोशनलाल भारती

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