सीएचसी तमकुही से अपने नौनिहालों के इलाज के अभाव में बैरंग लौट रहे मरीज

सीएचसी तमकुही से अपने नौनिहालों के इलाज के अभाव में बैरंग लौट रहे मरीज

• बाल रोग विशेषज्ञ को अस्पताल का प्रशासनिक प्रभार मिलने से परिजनों की बढ़ी परेशानी

• विशेषज्ञ चिकित्सक के जिम्मेदारी बढ़ने से बढ़ी परेशानी

• इंसेफ्लाइटिस से पीड़ित मरीजों के इलाज को लेकर लोगो की बढ़ी चिंता

• चिकित्सक के व्यस्तता से इंसेफ्लाइटिस के मरीजों को भी लौटना पड़ सकता हैं बैरंग

तमकुहीराज( कुशीनगर)।

 पूर्वांचल में इंसेफ्लाइटिस एक महामारी का रूप ले चुकी हैं, इसकी रोकथाम के लिए सरकार की ओर से तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगो को जागरूक करने का भी कार्य किया जाता रहा है, लेकिन जिम्मेदार इसको लेकर न ही सतर्क ही नजर आ रहे हैं और न ही इसके प्रति गम्भीर ही हैं। इनकी उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए तमकुही सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई, उन्हें प्रभारी बनाये जाने से अभी से अपने बच्चो को लेकर अस्पताल पहुंचने वाले परिजन बैरंग लौटने लगे हैं। दूसरी तरफ जिम्मेदारो ने जेई वार्ड को ही आराम गृह बना दिया है। 

ऐसे में आने वाला बरसात का मौसम यहां के लोगों की मुसीबत बढाने वाला साबित हो सकता है। एक तरफ पूर्वांचल में हर वर्ष इंसेफ्लाइटिस के कहर से हजारों मासूम काल के गाल में समा जाते हैं, जिसकी रोकथाम के प्रति वर्ष सरकार की ओर से तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगो मे जनजागरूकता लाने का कार्य किया जाता है। 

क्षेत्र के लोगों को इंसेफ्लाइटिस के लक्षण दिखाई देने के बाद प्राथमिक चिकित्सा के लिए तमकुही सीएचसी में जेई वार्ड बनाया गया। इंसेफ्लाइटिस का कहर अधिकतर बच्चो पर ही दिखाई देने के बाद यहां पर विशेषज्ञ बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती इस उद्देश्य को लेकर की गयी कि लोगो को उचित इलाज मिले और मासूमो को काल के गाल से बचाया जा सके।

लेकिन विभाग इन नौनिहालों के स्वास्थ्य को लेकर कितना गम्भीर है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती मासूमो के त्वरित चिकित्सा सुविधा मिलने के उद्देश्य को लेकर किया गया,उन्हें ही सीएचसी की प्रशासनिक व्यवस्था की कमान सौंपी दी गयी। 

अब उनके लगातार क्षेत्र में रहने, मीटिंग में व्यस्त रहने, प्रशासनिक व्यवस्था की देखरेख करने में व्यस्त रहने से सीएचसी पर अपने मासूमो को लेकर आने वाले परिजनों को इलाज के अभाव में बैरंग लौटना पड़ रहा है। ऐसे में इंसेफ्लाइटिस से जंग इस क्षेत्र के लोग कैसे लड़ेंगे,यह एक सवाल बनकर रह गया है। 

इंसेफ्लाइटिस का कहर अधिकतर वर्षाकाल में ही होता हैं। बरसात का मौसम शुरू होने वाला है और इस महामारी के प्रकोप से जहां आमलोग भयभीत हैं तो वही विभाग के जिम्मेदार जेई वार्ड को ही आरामगृह बना दिये हैं।

 अब बाल रोग विशेषज्ञ को सीएचसी की कमान दिये जाने के बाद चिकित्सक का अभाव इस क्षेत्र के नौनिहालों के परिजनों की मुश्किलों को बढ़ाता हुआ ही नजर आ रहा है।अब देखना है कि विभाग क्षेत्र के परिजनों की समस्याओं का समाधान को लेकर कितना गम्भीर हैं और किस प्रकार की कार्रवाई करता है, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।इस सम्बंध में एसडीएम अरविंद कुमार का कहना है कि यह बहुत ही गम्भीर विषय है, समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जायेगा और संबंधित विभाग के जिम्मेदारो को जल्द ही रिपोर्ट भेज समस्या का त्वरित समाधान कराया जायेगा।

 

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