कौन होगा काकोरी की मुजफ्फरनगर पलिय ग्राम पंचायत का अगला प्रधान

कौन होगा काकोरी की मुजफ्फरनगर पलिय ग्राम पंचायत का अगला प्रधान
चुनाव का अभी अता पता नही,
पंचायत बनी चुनावी अखाड़ा,
प्रधान बांट रहे साइकिलें तो हारा प्रत्याशी बनवा रहा सीसी रोड,ग्रामीणों की तो बल्ले-बल्ले,

 

लखनऊ

आज कल राजधानी के काकोरी ब्लाक की ग्राम पंचायत मुजफरनगर पलिया पंचायत चुनाव की अखाड़ा बनी हुई है।यहाँ पर आगामी होने वाले चुनाव को लेकर अभी से काफी गहमा गहमी बनी हुई है।चुनाव कब होगा,इसका अभी कुछ अता पता नहीं है।वैसे अभी पंचायत चुनाव होने में लगभग एक वर्ष शेष है।लेकिन यह पंचायत प्रधान और प्रधान पद के हारे हुए प्रत्याशी के मध्य इस समय चुनावी अखाड़ा बनी हुई है।प्रधान जहां मतदाताओं को लुभाने के लिए ग्रामीणों में साइकिलों का वितरण कर रहें हैं।तो वही हारे हुए प्रत्याशी के द्वारा लुभाने के लिए गांव में सीसी रोड,नाली निर्माण और गांव में उजाले के लिए स्टीक लाइटें लगवाने के कार्य किया जा रहा है।फिर हाल इस वर्चस्व की लड़ाई में गांव वालों की तो बल्ले-बल्ले है।

     काकोरी विकास खण्ड की ग्राम पंचायत मुजफ्फरनगर पलिया में बढ़ौना,पलिया गांव भी आते हैं।यहां से वर्तमान में रमेश चन्द्र यादव ग्राम प्रधान हैं और उनकी पत्नी कमलेश यादव जिला पंचायत सदस्य हैं।दोनों का कार्य इनके पुत्र काकोरी के जेष्ठ उप ब्लाक प्रमुख धर्मेंद्र सिंह यादव ही देखते हैं।धर्मेंद्र सपा के जिला उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।तो वहीं इनके राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी बसपा नेता आनन्द यादव है।धर्मेंद्र सिंह यादव आज कल अपनी ग्राम पंचायत में रहने वालों को अपने पक्ष में करने के लिए एटलस कम्पनी की साइकिलें बांट रहें हैं।तो वहीं बसपा नेता आनन्द यादव गांव वालों को लुभाने लिए अपने निजी पैसे से गांव में जहाँ अबतक नाली का निर्माण कराने के साथ ही लोगों को एक-एक स्टीक लाइट देने का काम कर चुके हैं।तों वहीं अब गांव में आरसीसी सड़क का निर्माण कराने के साथ ही एक तालाब की सफाई का कार्य करवा रहें हैं।आनन्द यादव इससे पहले बसपा से जिला पंचायत सदस्य और न्यू हैदरगंज द्वितीय से पार्षद का चूनाव लड़ चुकें है।उनका छोटा भाई ग्राम प्रधान पद का चुनाव लड़ा था और हार गया था।आनन्द बसपा के जिलाकोषाध्यक्ष भी रह चुकें हैं।इस बार धर्मेंद्र जहां अपनी प्रधानी बचाने की फिराक में हैं।तो वहीं आनन्द इस बार प्रधानी का चुनाव हर हाल में जीतना चाहते हैं।इसके लिए दोनों ही इस बार अभी से जोर आजमाइश में लग गये हैं।धर्मेंद्र साइकिलें बांट कर जहाँ जनता को लाभान्वित कर रहें हैं।तो वहीं आनन्द गांव में अपने निजी पैसों से विकास कार्य कराकर प्रधानी की बाजी अपने पाले में करने की फिराक में हैं।वह बात अलग है कि आने वाले चुनाव में चुनावी परिणाम क्या होगा।लेकिन वर्तमान में गांव वालों की हर मुराद पूरी करने के लिए दोनों ही नेता ततपर हैं।दोनों ही एक दूसरे को छोटा और बड़ा भाई मानतें है।लेकिन राजनैतिक प्रतिद्वंता दोनों के बीच मे एक दीवार बन कर खड़ी हो चुकी है।

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