कुंडली में नवग्रहों की प्रतिकूलता निवारण हेतु मंत्र

कुंडली में नवग्रहों की प्रतिकूलता निवारण हेतु मंत्र

ज्योतिष के अनुसार जब जातक की कुंडली में ग्रह अनुकूल होते है तो जीवन खुशियों से भरा रहता है। यदि कुंडली में ग्रहों की स्थिति व दशा मजबूत रहती है तो इसका सकारात्मक प्रभाव दिनचर्या पर पड़ता है। परंतु ग्रहों की कमजोर स्थिति या ग्रहों का दोष जीवन को परेशानियों के भंवर में ला खड़ा करता है। नवग्रहों के दोष निवारण हेतु इन मंत्रों का जाप सकारात्मक प्रभाव डालता है।

सूर्य = सूर्य ग्रह कमजोर होने पर व्यक्ति को अपयश, हृदय रोग और हड्डी की समस्या उत्पन्न होती है। सूर्य की अनुकूलता के लिए 'ॐ आदित्याय नमः', इस मंत्र का जाप करना उत्तम माना गया है।

चन्द्रमा = चन्द्रमा के कमजोर होने पर मानसिक रोग और अस्थमा की समस्या आती है।चंद्रमा को अनुकूल बनाने के लिए 'ॐ सों सोमाय नमः' इस मंत्र का जाप करना श्रेयस्कर माना गया है।

मंगल  = मंगल के कमजोर होने पर भय, संपत्ति और दुर्घटना की समस्या आती है। दाम्पत्य समस्या भी मंगल के दोष से ही उत्पन्न होता है। मंगल की अनुकूलता के लिए 'ॐ अं अंगारकाय नमः' इस मंत्र का जाप करना उत्तम होता है।

बुध = बुध कमजोर होने पर व्यक्ति को वाणी, कान, नाक, गला आदि से संबंधित समस्या उत्पन्न होती है। बुध को अनुकूल बनाए रखने के लिए 'ॐ बुं बुधाय नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए।

बृहस्पति  = इस ग्रह के कमजोर होने पर मोटापा, अहंकार और पेट की समस्या उत्पन्न होती है। इस ग्रह को अनुकूल करने के लिए 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

 शुक्र = शुक्र नीच होने पर परिवार में किसी भी प्रकार की शांति नहीं मिलती है। इस ग्रह को अनुकूल करने के लिए 'ॐ शुं शुक्राय नमः' इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

शनि  =  व्यक्ति के कर्म का फल शनि देव ही देते हैं। शनि जब विपरीत होता है तो व्यक्ति के जीवन में भूचाल आ जाता है। साथ ही शनि के दोष से रोजगार की समस्या भी उत्पन्न होती है। शनि दोष के निवारण के लिए 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

राहु-केतु  = राहु-केतु की स्थिति खराब होने पर मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान होता है। राहु-केतु दोष से किडनी संबंधी रोग भी उत्त्पन्न हो जाता है। राहु दोष के निवारण हेतु 'ॐ रां राहवे नमः' मंत्र का जाप व केतु को नियंत्रित करने के लिए 'ॐ कें केतवे नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए।

इति शुभम्

( पंडित अम्बरीष चन्द्र मिश्रा अयोध्या )

Comments