क्या आप भी कुंडली से राजा बनेंगे....?

क्या आप भी कुंडली से राजा बनेंगे....?

धन प्राप्तिऔर धन हानि : ज्योतिषीय आकलन:-

आज के समय में धन होना सबसे आवश्यक माना गया है, वैसे भी पुरानी कहावत है की पहला सुख निरोगी काया दूजा सुख घर में धन माया ,यानी धन को प्राचीन समय से ही प्रमुखता दी गई है | सभी मुख्य सुखों में धन के सुख को दूसरा स्थान दिया गया है | ज्योतिष में हमारी कुंडली का दूसरा भाव धन का भाव माना गया है तो ग्यारवाँ भाव आय लाभ का तो सप्तम भाव हमारी दैनिक आमदनी का | यदि ये किसी प्रकार से दूषित हो रहे हो तो धन की समस्या रहती है | दूसरा भाव हमारी पारिवारिक धन की स्थितिऔर संचित धन की स्थिति दर्शाता है जब ये भाव इसका मालिक और इस भाव का कारक ग्रह सभी दूषित हो तो जातक को धन की समस्या का सामना अवश्य करना पड़ता है |

इसी प्रकार यदि ११वा भाव दूषित हो तो जातक को आमदनी में समस्या का सामना करना पड़ता है | पहला सुख निरोगी काया यानी हमारी कुंडली का लग्न लग्नेश और पहले भाव का कारक इन सब की स्थिति सही हो तभी जातक इन सब सुखो को भोग सकता है |

सबसे बड़ी समस्या जो की आजकल लोगों को उसका सामना करना पड़ता है वो है धन का डूब जाना | जब भी हमारी कुंडली में दुसरे भाव और छ्टे भाव का सम्बन्ध आपस में स्थापित हो जाता है यानी की जब धनेश छ्टे भाव में हो या छ्टे भाव का मालिक दुसरे भाव में हो तब ऐसे जातक के दिए हुए पैसे जल्दी से वापिस नही आते| ऐसी स्थिति में जब आय भाव के मालिक भी त्रिक भाव में हो तो ये स्थितिऔर ज्यादा भयानक हो जाती है और ऐसे जातक का पैसा डूबता ही डूबता है |

इसिलिय ऐसे जातकों को विशेष सावधानी रखने की आवश्यकता होती है | सबसे पहले तो हमे अपनी कुंडली में उपर लिखित भावों में से यदि कोई भाव दूषित है तो उस से सम्बन्धित उपाय करके कुछ हद तक समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है | साथ ही कुंडली का 12वां भाव हमारे व्यय का होता है और यदि ये भाव बली हो तो जातक को खर्च का अधिक सामना करना पड़ता है ये अलग बात है की इसमें यदि शुभ ग्रह हो तो शुभ कार्यों पर खर्च होता है और अशुभ ग्रह हो तो अशुभ कार्यों जैसे बिम्मारी आदि पर अधिक खर्च होता है |

घर में पत्नी शुक्र यानी साक्षात लक्ष्मी स्वरूप होती है अत: उसको भी खुश रखना आवश्यक है | माता चन्द्र स्वरुप होती है जो की धनदायक माने गये है अत : माँ को खुश रखे बगैर सभी सुखों की कल्पना भी नही की जा सकती | इन सबके साथ माँ लक्ष्मी जी की उपासना धन दायक मानी गई है | इति शुभम

( पंडित अम्बरीष चन्द्र मिश्रा अयोध्या )

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