मानसून सत्र आने वाला है और सिंचाई विभाग की नही खुली तंद्रा

मानसून सत्र आने वाला है और सिंचाई विभाग की नही खुली तंद्रा

सेवरही(कुशीनगर)

 आसन्न मानसून में अब कुछ ही दिन अवशेष बचे है। 15 जून के बाद मानसून मान लिया जाता है।हर वर्ष बँधो पर मानसून के पूर्व संवेदनशील जगहों पर सिचाई विभाग परियोजना के अनुरूप कार्य कराकर बंधे को मजबूती दिया करता है। लेकिन इस साल एक भी परियोजना की स्वीकृति नही मिलने के कारण एपी बांध पर खतरा मंडराता दिख रहा है क्योंकि 17 किमी लम्बे बांध का सर्वाधिक हिस्सा अति संवेदनशील है। परियोजना की स्वीकृति नही मिलने का वास्तविक जिम्मेदार सरकार है या विभाग यह तो वही जाने लेकिन यह कटु सत्य है कि अगर विभाग समय से पहल किया होता तो शायद यह दिन नही देखना पड़ता।

 सरकारी डेड लाइन के अनुसार आसन्न मानसून की तिथि 15 जून सम्भावित है।इसके बाद बंधे को फ्लड जोन घोषित कर दिया जाता है।कुशीनगर जनपद के एपी बांध हमेशा ही अतिसंवेदनशील बांधों में सुमार रहा है। हर वर्ष बड़ी गण्डक बंधे के किसी न किसी पॉइंट पर तबाही जरूर मचाती रही है।अगर पीछे का रिकार्ड उठाकर देखा जाय तो किसी किसी वर्ष में परियोजना से अधिक की फ्लड फाइटिंग इस बंधे पर हुई होगी।हर वर्ष मानसून के पूर्व बंधे के संवेदनशील पाइंटों का परियोजना बनाकर विभाग सासन को भेजता है व शासन एच एल सी का दौरा कराकर परियोजना की स्वीकृति व धन का आवंटन करती है। तब विभाग मानसून के पूर्व मानक के अनुरूप कार्य कराकर बंधे को मजबूती देने का कार्य कराता है ।

लेकिन इस बार एपी बंधे पर किसी परियोजना की स्वीकृति नही मिलने के कारण बंधे का अस्तित्व खतरे में मंडराता दिख रहा है।सिचाई विभाग के अभियन्ता शासन से स्वीकृती नही मिलने की बात कर रहे है। लेकिन इसका कम जिम्मेदार विभाग भी नही है।क्योंकि अगर विभाग शायद समय से परियोजना बनाकर शासन को शौप दिया होता तो कोरमपूर्ती के बाद स्वीकृति में इतना बिलम्ब नही होता।अब तो चुनाव अधिसूचना चल रहा है। ऐसे में स्वीकृति मिलेगी या नही यह तो वही जाने लेकिन इतना तो तय है कि अगर समय से कार्य प्रारम्भ नही हुआ

तो फ्लड फाइटिंग के सहारे बंधे को बचाना आसान नही होगा।नदी बंधे के किमी 12.500 से लेकर 14.500 तक बंधे के स्लोप पर बह रही है। बालू की रेत से बना बांध नारायणी का पहला दबाव भी नही झेल पायेगा।अब तो हालात यह है कि लगातार 41 दिनों से बंधे के समीप के ग्रामीण चुनाव के वहिष्कार की विगुल बजा रहे है। लेकिन सिचाई विभाग के अभियंताओ की कुम्भकर्णी निद्रा से नही जाग रहा है। लेकिन गंडक नदी की विकराल स्थिति देखकर अब साफ लग रहा है कि यह बांध अब भगवान भरोसे ही है।

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