क्या आप भी रेपिस्ट है....?

क्या आप भी रेपिस्ट है....?

क्या किसी ने कभी सोचा कि क्यों ऐसा होता कि रेप के सम्बंध में सोचने लगते हूं क्यों एक काया जो हमारे पास और दूसरी काया के लिए इस कदर क्रूर हो जाता है कि प्रेम संबंध को गिद्ध की तरह नोच नोच के खाना चाहत है आखिर क्यों ऐसे हैवानियत हो जाती है इसकी वजह क्या है...? ....आप भी रेपिस्ट है अगर ऐसा सोचते है....?

दो_स्तन, एक_वेजाइना और पेनिस... शायद इन्ही के होने से रेप होता है...? नहीं स्तन रेप का कारण नहीं हो सकते। जिन छोटी छोटी बच्चियों के स्तन नहीं होते उनका भी रेप हो जाता है। फिर तो इस वेजाइना के कारण ही रेप होते है... नहीं! child abuse के कितने केस हैं जहा लड़को (baby boy) के रेप होते है। वहा कोई वेजाइना नहीं होती। यानि रेप पेनिस के कारण होते है। लेकिन कई हॉस्टलस् और जेल के कितने किस्से सुने है जहा लड़को के रेप होते है। यानि जिनके पास पेनिस है उनका भी रेप होता है। अगर रेप सिर्फ पेनिस के कारण होते तो गैंग रेप/ रेप के बाद लड़की के शरीर में सरिये कंकर कांच (दिल्ली/रोहतक की घटना,और ऐसी हज़ारो न रिपोर्ट होने वाली घटनाएं) क्यों डालते। यानि रेप पेनिस वेजाइना (शरीर की संरचना) के कारण नहीं होते। रेप उस मानसिकता के कारण होता है जो लड़की की शर्ट के दो बटनों के बीच के गैप से स्तन झाँकने की कोशिस करते है.... जो सूट के कोने से दिख रही ब्रा की स्ट्रिप को घूरते रहते है और औरत की स्तन का इमैजिनेशन करते है। जो स्कर्ट पहनी लड़की की टाँगे घूरते रहते है। कब थोड़ी सी स्कर्ट खिसके कब पेंटी का कलर देख सके। पेंटी न तो कुछ तो दिखे।

जो पार्क में बैठे कपल्स को देखकर सोचते है काश ये लड़की मुझे मिल जाये तो पता नहीं मैं ये क्या क्या या वो करदु।

वो मानसिकता, जब एक दोस्त दूसरे से कहता है - क्या तू अपनी गर्ल फ्रेंड के साथ रात में रुका और तूने कुछ नहीं किया, नामर्द है क्या रेप सिर्फ गन्दी मानसिकता के कारण होता है। जहाँ औरत सिर्फ इस्तेमाल का सामान है।

अगर किसी विपरीत काया को देख के आपके मन मे ऐसे गंदे भाव उत्पन्न हुए है तो आप  भी एक मानसिक रेपिस्ट है  बस डर वस उसको अंजाम नही दिया है... ऐसी सोच  कैसे उत्पन्न हुआ ये सोचना है और कैसे इसे खत्म करे ....?

ऐसी सोच जो इंसानियत को भूल बैठे है और केवल मजे लेना ही जिसकी जिंदगी का मकसद है ऐसे कमजोर मानसिकता का व्यक्तित्व ही ऐसी घटना को अंजाम देते है हमारे समाज में लोगो की मानसिकता बदलने की जरूरत है जो हैवानियत न करके इंसानियत करवाने की सोच विकसित करे ।

 

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