अल्लाह की इबादत में पहली बार रखा बच्चों ने रोज़ा 

अल्लाह की इबादत में पहली बार रखा बच्चों ने रोज़ा 

नरेश कुमार गुप्ता

अल्लाह की इबादत में पहली बार रखा बच्चों ने रोज़ा 

रिपोर्ट एहतिशाम बेग

लहरपुर/सीतापुर

 रमजान माह पवित्र माह में सभी में उत्साह है। बड़ों के साथ बच्चे भी रोजा रखकर इबादत में जुटे हैं। बच्चों का कहना है कि खुदा की इबादत से उनको सुकून मिलता है। सहरी में सुबह जगना व देर रात इबादत में बड़ों के साथ रहना बहुत अच्छा लगता है।
लहरपुर कस्बा के इंदिरानगर के निवासी मोहम्मद हुसैन के 12 व 10 वर्ष के पुत्र ने अज़फ़र व अहज़ब ने  पहला रोजा रखा। बच्चों का कहना है कि रमजान माह आने का इंतजार कर रहे थे। बहुत अच्छा लगता है सबके साथ रहना और इबादत करना अम्मी अब्बू के साथ भोर मे सहरी खाने का मज़ा ही अलग है अब्दुल कादिर की पुत्री निशां अफ़रोज़  (10वर्ष)  मोहल्ला इंदिरानगर व शौकत अली मोहल्ला शाहकुलीपुर के पुत्र मोहम्मद असद (9 वर्ष) ने अपने माता-पिता के साथ रोजा रखा कर नमाज भी पढ़ी। 

इंसानियत व सच्चाई की राह पर चलने की सीख

रमजान माह में रोजा रखने वालों बच्चों का इंसानियत व सच्चाई की राह पर चलने की सींख है। इबादत में कोई कठिनाई नहीं आती है। लहरपुर कस्बे के मोहम्मद अज़फ़र हुसैन,निशां अफ़रोज़,अहज़ब हुसैन, मोहम्मद असद   पहली बार रोजा रखकर खुश है। बड़ों को रोजा रखते हुए देखकर इन मासूमों को भी अल्लाह की इबादत करने का जुनून है।मास्टर गोरे इंदिरानगर  का  कहना है कि रोजा ऐसी इबादत है जो इंसान को बुराइयों से दूर करने,अच्छा काम करने कमजोरों की मदद व समाज में बेहतरी करने का नाम ही रोजा है। नमाज पढ़ने से बार -बार अल्लाह का जिक्र होता है। इससे इंसान की रूह पाक साफ होती है।

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