पुलिस की गुंडई व अमानवीय चेहरा आया सामने

  पुलिस की गुंडई व अमानवीय चेहरा आया सामने

लखीमपुर-खीरी।

सरकार व पुलिस महानिदेशक के लाख प्रयासों व दिशा निर्देशों के बावजूद खीरी पुलिस का रवैया बदलने का नाम नहीं ले रहा है।

कोई न कोई पुलिसिया क्रत्य अखबारी सुर्खियाँ बनती है। जिससे पुलिस मित्र का चेहरा बेनकाब हो जाता है।और शासन के प्रयासो की पोल खुलकर जनता के सामने आती है 

 ऐसा ही एक मामला कोतवाली सदर में देखने को मिला है जहां पर पुलिस की गुंडई व अमानवीय चेहरा सामने आने के बाद पूरे महकमे को शर्मसार होना पड़ा है मामले की गंभीरता और मीडिया में जाने के बाद कप्तान ने प्रकरण की जांच बैठा दी है।पर आरोपी इस्पेटर सदर व चौकी प्रभारी मिश्राना के विरुद्ध कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई है।

जिससे वह अपने अपने पदों पर आसीन रहकर जांच को प्रभावित करने के तरह-तरह के हथकंडे अपनाने में लगे देखे जा सकते हैं और पीड़ित पक्ष को धमकाकर सुलह समझौता करने का दबाव बना रहे हैं।गौरतलब हो कि घटना दिनांक 18 अगस्त को रात लगभग 11:45 बजे की है जब कोतवाल सदर फतेह सिंह चौकी प्रभारी मिश्राना अजब सिंह व कई सिपाहियों को लेकर पूरे दल बल के साथ गढी रोड स्थित कांशीराम कालोनी के ब्लॉक नंबर 7 मे रह रहे छोटू पुत्र रामसेवक के घर पर दबिश दी उस समय छोटू घर पर नहीं था।

मौके पर छोटू न पाकर पुलिस वालों ने उसके भाई रवि को पकड़ लिया जब परिजन द्वारा जानकारी चाही गई कि आखिर किस अभियोग में छोटू को पकड़ने आए है तो इसका उत्तर देने के बजाय पुलिस कर्मी पुलिसिया आतंक मचाने लगे मारपीट करने लगे।

अपने पति रवि को पीटते देख पुलिस के सामने आई गिडगिडाने आई 2 माह की गर्भवती महिला नीता के पेट पर अजब सिंह द्वारा लात मार दी गई। जिससे उसके मौके पर ही भारी रक्तस्राव होने लगा पीड़िता के चीखने चिल्लाने की आवाज पर कॉलोनी वाशिंदे मौके पर आ गए लोगों को आता देख पुलिस वाले मौके से भाग निकले।मारपीट के दौरान एक पुलिसकर्मी का बिल्ला पीड़िता के घर में ही छूट गया। आरोपी छोटू पुत्र रामसेवक पर कयी मुकदमे दर्ज है। वो सभी मे जमानत पर है किसी न्यायालय मे वांछित नही है।दबिश के दौरान महिलाओं के साथ हाथापाई किये जाने से महिलाओं के कपड़े फट गए अर्धनग्न अवस्था में पुलिस से विवाद होता रहा महिलाओं की बेज्जती के बाद भी पुलिस ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली।

जिला अस्पताल की भूमिका कम संदिग्ध नहीं रही कि 18 अगस्त की रात को पीड़िता को कागज पर भर्ती कर सारी रात दिन बसेरा में डाले रखा गया कोई इलाज नहीं हुआ मेडिकल रिपोर्ट आनन-फानन में दे दी गई जबकि 19 अगस्त को भर्ती कर इलाज किया गया जिसमें भर्ती रजिस्टर्ड में 2 माह बच्चा होने व ब्लडिंग होने की पुष्टि भी हुई जो लात के अघात से हुई ऐसा पीड़िता का कहना है कि इस घटना में कई यछ प्रश्न सामने आते हैं जिनके उत्तर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के पास ढूढे नहीं मिल पा रहे हैं।क्या दबिश के समय सर्च वारंट था, घर पर दबिश के दौरान महिला आरक्षी साथ क्यों नहीं ले जायी गई। जब मामला संकटा देवी चौकी क्षेत्र का था तो संकटा देवी पुलिसकर्मी क्यों नही साथ लिये गये।वही यदि मारपीट छीना झपटी नहीं हुई तो सुनील यादव का कैसे गिरा बिल्ला,घटना के समय गाड़ी में मौजूद हिरासत में लिए गए

कुलदीप बाजपेयी,सचिन व प्रखर शर्मा ने बताया कि दबिश के दौरान छोटू के घर में मारपीट और चीखने चिल्लाने की जोर-जोर आवाजें आ रही थी जो मारपीट की घटना की पुष्टि को काफी है।कॉलोनी वासियों द्वारा पुलिसिया उत्पीड़न की दास्तां बयां की गई लोगों ने बताया दबिश के 2 दिन पहले पुलिस ने उसे जबरन उठाकर 3/ 25 में फर्जी तरीके से जेल भेज दिया था जिसमे वह जमानत पर रिहा हुआ था।छोटू के ऊपर किसी न्यायालय द्वारा वारंट नहीं था न ही किसी नये मुकदमे में ही वांछित था तो फिर किस अपराध के चलते इस के घर दबिश दी गई यह प्रश्न कालोनी निवासी जानने को उत्सुक है। पीड़ित पछ व जानकार लोगों की मानें तो पुलिस अधीक्षक के बेहद करीबी व मुँह लगे होने के चलते कोतवाल पर कार्यवाही नहीं की जा रही है।

परिजनों ने पूरे घटनाक्रम के समस्त साछ्यो और कुलदीप बाजपेई के वीडियो रिकॉर्डिंग समेत कई अन्य पुख्ता साक्ष्य को संलग्न करते हुए मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार,राज्य महिला आयोग,मानवाधिकार आयोग सहित पुलिस महानिदेशक से शिकायत कर मामले की जांच पुलिस महानिदेशक कार्यालय की जांच प्रकोष्ठ शाखा से कराए जाने की मांग की है और मामले में समछ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वाद आयोजित कर आरोपी पुलिस वालों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराए जाने की बात कही है।अब देखना यह है कि ऊंट किस करवट बैठता है जांच होकर कार्रवाई होती है या फिर मनमानी तरह से पूर्व की जांचो के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

 

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