किसानों की फसलो में रोग लगने से किसान चिंतित

किसानों की फसलो में रोग लगने से किसान चिंतित

नरेश कुमार गुप्ता

मोहनलालगंज लखनऊ

किसानों की फसलो में रोग लगने से किसान चिंतित

राजेश मिश्रा की रिपोर्ट मोहनलालगंज

मोहनलालगंज लखनऊ

एक ओर सरकार किसानों के विकास के लिए हर संभव सहायता व किसानों को कृषि कार्य नए नए तरीके से करने के तरीके अपनाने की नसीहत तो दे रही है , और दलहन व तिलहन की फसल को अधिक पैदा करने की बड़ी बड़ी बातें अन्नदाताओं को बता रही है ,

वही दूसरी ओर देश का अन्नदाता किसान किन किन मुसीबतों के दौर से गुजर रहा है एक बार उस पर भी प्रकाश डालने की जरूरत है , तहसील मोहन लाल गंज में लगने वाली दर्जनों ग्राम पंचायतों व उनके मजरों में रहकर खेती के सहारे अपने परिवारों के भरण पोषण करने वाले अन्नदाताओं हालत दिन प्रतिदिन बद से भी बदतर होती जा रही है , क्षेत्रीय किसानों की माने तो सरकार किसानों के उत्थान के लिए बड़ी बड़ी बातें तो करती है , और समय समय पर किसानों की मदद भी कर देती है ,

पर जिम्मेवारो की उदासीनता के चलते , किसानों को समय से न तो खाद मिल पा रही है , और न ही खेतो को सीचने के लिए नहरो से पानी , इस बार क्षेत्रीय किसान एक और समस्या से जूझ रहे है वो है , आवारा मवेशियों के किसानों की हरी भरी फसलो पर आतंक , जबकि नीलगायों का आतंक किसान फसलो पर पहले से ही झेल रहे थे ,  किसानों के मुताबिक अबकि बार क्षेत्रीय छुटभैया किसानों की हजारो बीघे उपजाऊ जमीन परती पड़ी है , कारण समय से नहरो में पानी न आने से किसानों के खेतों में सिंचाई का आभाव ,

दूसरा सबसे बड़ा कारण आवारा जानवरो का आतंक , वही दूसरी ओर बड़े किसानो को भी इस समस्या से जूझना पड़ा , मसलन उनके खेतो में लगे निजी कलकुपो को चलाने हेतु महंगे डीजल की मार किसानों की कमर तोड़ कर रख दी , ऊपर से छुट्टा जानवरो के आतंक का दंश भी उन्हें झेलना पड़ा , क्योकि छुटभैया किसानों की भूमि परती पड़ी होने के कारण  छुट्टा मवेशियों का आतंक को भी इन्हें झेलना पड़ा , इतना ही नही महंगे बीज , खाद , और पानी ,

ऊपर से किसानों के फसलो में रोगों के लगने से किसान  चिंतित व परेशान है , कुछ किसानों ने कृषि कार्य करने हेतु बैंको से लोन भी ले रखा है , अब गौर करने वाली बात ये है कि किसान बैंको के कर्ज को चुकता कब और कैसे कर सकेंगे , क्योकि जिन किसानों ने गेहू की फसल किसी तरह बो भी दी थी , और किसी तरह  आवारा मवेशियों , व नीलगायों के आतंक से आधी अधूरी फसल तो बचा ले गए , हालांकि बाद में किसानों की आवाज सरकार तक पहुची और सरकार ने गाँवो में पशुआश्रय केंद्र खुलवाकर किसानों की आवारा पशुओं के आतंक की समस्या को काफी हद तक कम कर दिया ,

वही दूसरी ओर अन्नदाताओं को तिलहन व दलहन की फसल से काफी उम्मीद थी पर उनमे बेमौसम हुई बारिश के चलते रोगों के लगने से किसानों को फसलो को बचाने के लिए कीटनाशक दवाओ का छिड़काव करना पड़ा , जिससे उनकी जेब और ढीली हो गयी , किसी तरह से रोगों से भी छुटकारा कम हुआ पर मन के मुताबिक व किसानों की माने तो लागत के मुताबिक फसलो का उत्पाद कम होने की संभावना के चलते किसानों के माथे पर पसीना व चेहरे पर शिकन साफ तौर पर झलक रही है , किसानों को सरसों की फसल से बहुत उम्मीद थी पर किसानों ने बताया कि माहू का रोग लगने से सरसो की फसल भी चौपट हो गयी , वही मटर , चना , आलू , अरहर ,

व गाजर की फसल भी रोगों के लगने से काफी प्रभावित हो गयी , अब भला ऐसी सूरत में किसान बैंको का कर्ज़ व आने वाला होली का त्योहार कैसे मना सकेगा , ऊपर से रोजमर्रा के खर्च , व बच्चो की स्कूल की फीस किस तरह चुका सकेंगे  ये किसानों के लिए चिंता का सबब बना हुवा है , क्षेत्रीय किसानों ने एक स्वर में कहा की यदि नहरो में समय से पानी , और सरकारी खाद की दुकानों से समय से खाद , व सबसे बड़ी समस्या आवारा पशुओं के आतंक से निजात मिल जाये तब तो कृषि में कुछ फायदा हो पायेगा

अन्यथा अब किसानी के सहारे अन्नदाताओं का जीवन यापन हो पाना अब मुश्किल ही नही नामुमकिन है ,  आखिर अन्नदाता किस किस समस्या का सामना कर , और कहा तक घटा उठाये , ऊपर से आमदनी अठन्नी और खर्ज रुपैया की कहावत अन्नदाताओं पर बिल्कुल फिट बैठ रही है ।। अब भला किसान अपने दिलो का दर्द बयां करे भी तो किससे और उनके मन की बात सुने भी तो कौन 

राजेश मिश्रा मोहनलालगंज

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