सादगी और सजहता की प्रतिमूर्ति थे सांसद स्व. राजेन्द्र अग्रिहोत्री

सादगी और सजहता की प्रतिमूर्ति थे सांसद स्व. राजेन्द्र अग्रिहोत्री

सादगी और सजहता की प्रतिमूर्ति थे सांसद स्व. राजेन्द्र अग्रिहोत्री
तालबेहट। Sunil tripathi 

संघ प्रचारक से संसद तक सफर तय करने बाले पूर्व सांसद राजेन्द्र अग्रिहोत्री आज भी लोगों के बीच उतने ही लोकप्रिय है। सहजता और मिलनसार सादगी के कारण उनके चाहने बाले उनके दीवाने हो जाते थे। चाय पान के दुकानदार से लेकर बडे बडे घराने उनकी सादगी के लिए उनके साथ सदैव कंधा से कंधा मिलाकर चलते थे। 
सन 1980 में बीजेपी की स्थापना के बाद पार्टी से टिकट लेकर आए अवधवासी राजेन्द्र अग्रिहोत्री से झांसी सदर सीट पर जीत का परचम लहराते हुए बीजेपी से प्रथम विधायक बने। इसके बाद 1989 के  बाद 1991, 1996 और 1998 के आम चुनावों में लोकसभा सीट पर शानदार जीत दर्ज कर वह लगातार दसवीं ,ग्याहरवीं, बारहवीं लोकसभा चुनाव में लगातार परचम पहराते रहे। उनकी लोकप्रियता का अलाम यह था कि वह पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा अपने सभी समर्थकों से लेकर विरोधियों से भी वह सजहता से मिलते थे और उनकी समस्याओं का निदान कराते थे। पूर्व सांसद के साथ अकसर रहने बाले सूदे महाराज बताते है कि उनके जैसा सांसद अब कभी नही मिल सकता अकसर उनकी गाड़ी मेरी दुकान पर पान जर्दा खाने के लिए रूक जाती थी और सबसे पहले वह हम सभी का हाल चाल पूछते थे और उस दौरान यदि किसी ने कोई समस्या बताई तो उसका निदान भी करवाते थे..उन्हे न तो लाव लश्कर उनके साथ चलता था और न वह कभी बीबीआईपी बनते थे। सरलता के साथ वह गले में हाथ डालकर बातें किया करते थे यही जादू उन्हे लगातार लोकप्रिय बनाए रहा। तालबेहट क्षेत्र में उनके चुनाव प्रबंधन की कमान सभांलने बाले अनिल बबेले भी राजेन्द्र अग्रिहोत्री की हर अदा के दीवाने थे। वह बताते है कि उस समय कार्यालय कार्यकर्ताओं के घरों और दुकानों में खुल जाते थे और कार्यकर्ता घर घर से पूडिय़ों के पैकेट बनाकर लाते थे और स्वेच्छा से ही प्रचार अभियान को संभालते थे। आज के दौर में कार्यकर्ताओं को लजीज भोजन और एसी कारों के काफिलों में प्रचार अभियान मिलता है। इसके बावजूद न तो अब प्रत्याशी लोकप्रियता पाता है और न कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलता है। पूर्व सांसद राजेन्द्र अग्रिहोत्री के अकसर स्थानीय कार्यकर्ता विनोद अगरिया के साथ रहते थे उन्होनें बताया कि एक बार ट्रेन यात्रा के दौरान ट्रेन के प्रथम श्रेणी डिब्बे एक फौजी अफसर की महिला सफर कर रही थी जिसमें सांसद राजेन्द्र अग्रिहोत्री के अलावा भी एक अन्य सांसद यात्रा कर रहे थे। महिला का बच्चा यात्रा के दौरान बार बार रो रहा था जिससे वह सांसद गुस्सा हो गए और टीसी को बुलाकर महिला को डिब्बे से हटाने का बोलने लगे। जिस पर सांसद राजेन्द्र अग्रिहोत्री ने सांसद का गुस्सा शांत कराते हुए महिला के बच्चे के साथ अटखेलियां करने लगे औ र बच्चे के साथ खेलते खेलते पूरी यात्रा कर ली। जब कभी वह तालबेहट क्षेत्र से निकलते समय रात्रि हो जाती थी तो वह अकसर उनके घर रूक जाते थे। ऐसे कई उदाहरण है जो झांसी ललितपुर से चार बार सांसद रहे राजेन्द्र अग्रिहोत्री  की सादगी, सरलता और सहजता को बंया करते है।

 

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