जिला पंचायत: खनिज तहबाजारी व प्रवेश कर के नाम पर  अवैध वसूली

जिला पंचायत: खनिज तहबाजारी व प्रवेश कर के नाम पर  अवैध वसूली


जिला पंचायत: खनिज तहबाजारी व प्रवेश कर के नाम पर  अवैध वसूली


कार्यवाही से बच रही जिला पंचायत  संदेह के घेरे मेंं 


बिना कार्यादेश निजी कट्टो पर हो रही वसूली 


ललितपुर।

राहुल शुक्ल/अंतिम जैन

जिला पंचायत एक बार फिर खनिज तह बजारी को लेकर चर्चा मेंं आ गई है। अनुबंध के बगैर बिना किसी कार्यादेश के ठेकेदार द्वारा बसूली की जा रही है। जिलां पंचायत के अधिकारियोंं को इसकी पूरी खबर है परन्तु कोई भी कानूनी कार्यवाही के लिये कदम नही उठायें जा रहे है। चर्चा मेंं  है कि इस अवैध वसूली के तार जिला पंचायत से जुडे हुये है। यही कारण है कि अभी किसी प्रकार की अवैध वसूली कार्यताओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही अमल मेंं नही लाई गयी। 


भाजपा सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिये  भले ही लाख प्रयास किये जा रहे हो और जीरो  टोलरेंस  का नारा  दिया जा रहा हो परन्तु  भ्रष्ट अधिकारियों के कारण  भाजपा नीत योगी सरकार का यह सपना साकार नही हो रहा है। ताजा मामला  जिला पंचायत के तहबाजारी व प्रवेश कर  के ठेका आवंटन  में  की गयी। धांधली  का है। ललितपुर की जिला पंचायत मेंं खनिज पर  तह बाजारी व प्रवेश कर की वसूली के लिये फरवरी माह मेंं टेण्डर आमत्रित किया था। 

यह टेण्डर बेवसाईट ई-टेण्डर पर आमंत्रित किया गया था।  टेण्डर प्रक्रिया में कई ठेकेदारोंं ने भाग लिया। सबसे अधिकतम बोली   मेसर्स  साक्षी  कन्स्ट्रक्शन की थी। मेसर्स साक्षी कन्स्ट्रक्शन द्वारा एक  वर्ष के लिये 17 लाख 60 हजार रूपये की बोली लगाई गयी थाी। अधिकतम बोली होने के कारण  मेसर्स साक्षी ट्रेडर्स के पक्ष मेंं उक्त ठेका  स्वीकृत कर दिया गया था। परन्तु इसी बीच कुछ कारणवश जिला पंचायत व ठेकेदार के मध्य अनुबंध नही हो सका था।  जिस कारण ठेकेदार को चेक पोस्टों से वसूली का कार्यादेश जारी नही हो सका। 


परन्तु ठेकेदार मेसर्स साक्षी कन्स्ट्रक्शन ने जिला पंचायत के सभी  वैध  चेकपोस्टों से तहबाजारी व प्रवेश शुल्क की वसूली प्रांरम्भ कर दी। गंभीर प्रश्न है कि जब  ठेकेदार को शुल्क वसूली का कार्यादेश  जारी नही हुआ है तो उक्त ठेकेदार द्वारा किस हैसियत से वसूली की जा रही है। इसके अलावा यही ठेका विगत वर्ष 6 माह के लिये 15 लाख रूपये मेंं इसी फर्म का आवंटित किया गया था। 

 


अविश्वास प्रस्ताव से बचने के लिये लाभांवित किये जा रहे भाजपा नेता


चूंकि जिला पंचायत में समाजवादी पार्टी का कब्जा है और  प्रदेश मेंं भारतीय जनता पार्टी की सत्ता है। वर्ष 2017 मेंं जब प्रदेश मेंं सरकार बनी तो स्थानीय स्तर पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने घोषणा की थी कि जल्द ही जिला पंचायत मेंं  अविश्वास प्रस्ताव लाया जायेगा। इस  ब्यान उस समय बड़ी सुर्खियों बटोरी थी।

इसके बाद  अध्यक्ष जिला पंचायत के परिजन  उस वरिष्ठ भाजपा नेता की शरण मेंं पहुंच गये। चर्चा है तभी से तहबाजारी व प्रवेश शुल्क वसूली का यह ठेका उस नेता के खास आदमी को दिया जा रहा है। तभी बिना एग्रीमेंट व कार्यादेश के वसूली की जा रही है। सूत्र बताते है कि जिला पंचायत में जब निर्माण कार्यो के टेण्डर निकले थे उस समय भी इस नेता सहित पार्टी के तीन अन्य वरिष्ठ नेताओं को लाभांवित किया गया था।  ताकि अध्यक्ष जिला पंचायत की कुर्सी सुरक्षित रहे। 

 


किन प्रपत्रोंं पर हो रही वसूली 


खनिज एवं प्रवेश कर वसूली के लिये जिला पंचायत द्वारा अनुबंध के पश्चात कार्यादेश के पश्चात रसीद कट्टा जारी किया जाता है। रसीद कट्टे पर वाहन  से वसूली शुल्क के अलावा प्रकार भी तह होते है। रसीद बुक के प्रत्येक पन्ने पर जिला पंचायत  की अधिकारिक मुहर  के अलावा संबंधित अधिकारी के भी हस्ताक्षर किये जाते है। निर्धारित शुल्क से अधिक अगर ठेकेदार वसूली करता है तो उसके  खिलाफ वैधानिक कार्यवाही अमल मेंं लायी जाती रही है।

लेकिन वर्तमान प्रकरण मेंं ठेकेदार को कार्यादेश जारी नही हुए है लिहाजा उन्हें सरकारी  रसीद कट्टे मिलने का सवाल ही नही उठता है। ऐसे मेंं कार्यवाही के लिये बचती जिला पंचायत शक के घेरे मेंं नजर आ रही है।           

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