अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खण्ड पर उच्चाधिकारी मेहरबान 

अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खण्ड पर उच्चाधिकारी मेहरबान 

अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खण्ड पर उच्चाधिकारी मेहरबान

 
प्रमुख अभियंता के आदेश के बाद भी समाप्त नही हुआ अतिरिक्त प्रभार 


घटिया निर्माण कार्य व फर्जी भुगतान को लेकर चर्चा मेंं है डिवीजन 


ललितपुर।  Rahul shukla 

ललितपुर के राजघाट निर्माण खण्ड के अधिशासी अभियंता अतिरिक्त प्रभार 7 महीने बाद भी समाप्त नही किया गया। जबकि प्रमुख अभियंता/ विभागाध्यक्ष द्वारा उनके अतिरिक्त प्रभार को अक्टूबर माह में समाप्त कर दिया था। किन्तु उच्चाधिकारियों की मेहरबानी के कारण अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खण्ड अभी भी खण्ड का अतिरिक्त प्रभार लिये है और उन्होंने बडे पैमाने पर फर्जी कार्यो के एई एग्रीमेंट व कार्यादेश जारी कर दिये। 


उल्लेखनीय है कि राजघाट निर्माण खण्ड  सिंचाई विभाग की एक महत्वपूर्ण खण्ड  है। इस खण्ड के अन्तर्गत  गोविंद सागर बांध व शहजाद बांध का संचालन व पर्यवेक्षण के साथ-साथ इसकी नहरों का रख-रखाव भी किया जाता है। हर वर्ष राजघाट निर्माण खण्ड को करोड़ो रूपये आवंटित किये जाते है। विगत जुलाई माह में जनपद के सिंचाई विभाग के राजघाट निर्माण खण्ड के अधिशाषी अभियंता का स्थानांतरण गैर जनपद हो गया था।

उनके स्थान पर किसी नये अधिशाषी अभियंता की स्थाई तैनाती नही हुयी थी। इसके बाद खण्ड का काम-काज सुचारू रूप से संचालित करने के लिये प्रमुख अभियंता/ विभागाध्यक्ष सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने अस्थाई व्यवस्था के तहत राजघाट निर्माण खण्ड  के अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त प्रभार झांसी मेंं तैनात इंजी. मनमोहन को दिया था। उन्होंने खण्ड में कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। 


परन्तु अक्टूबर माह में प्रमुख अभियंता/ विभागाध्यक्ष ने राजघाट निर्माण खण्ड के अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त प्रभार इंजी.  मनमोहन से समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। लेकिन विभागाध्यक्ष के आदेश को ताक पर रखकर इंजी. मनमोहन सिंह अभी भी अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खण्ड के पद पर डटे  हुये है।

उन्होंने अब तक गोविंद सागर बांध व शहजाद बांध एंव उसकी नहरों पर फर्जी निर्माण कार्याे के सैँकड़ो एई एग्रीमेंट व कार्यादेश अपने चहेते ठेकेदारों को जारी कर दिये। जिसमेंं बड़े पैमाने पर धांधली की गयी है। परन्तु सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारी उक्त अधिशासी अभियंता पर मेहरबान है। जिस कारण उनका  अतिरिक्त प्रभार अभी तक समाप्त नही किया गया है।  जबकि उनके द्वारा सहायक अभियंताओंं के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है और मार्च मेंं फर्जी निर्माण कार्यो के भुगतान किये गये है। 

भ्रष्ट सहायक अभियंता को है अधिशासी अभियंता का संरक्षण 


राजघाट निर्माण खण्ड मेंं हर वर्ष करोड़ो रूपये के अनुरक्षण व मरम्मत के कार्य कराये जाते है। विगत वित्तीय वर्ष में राजघाट निर्माण खण्ड में गोविंद सागर बांध व शहजाद बांध से निकली नहरों पर सर्विस रोड़ की मरम्मत के निर्माण कार्य कराये गये थे। इन कार्याे पर लाखों रूपये व्यय किया गया था परन्तु इन कार्यो की गुणवत्ता अत्यन्त खराब थी

जिस कारण यह अधिक समय तक नही चल सकी। जब उक्त निर्माण कार्यो की शिकायत की गयी तो प्रभारी अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खण्ड भ्रष्ट सहायक अभियंताओं के बचाव मेंं आगे आ गये और  फर्जी जांच आख्या कर उच्चाधिकारियों को सौँप दी। जबकि खण्ड के सहायक अभियंता द्वारा इसमेंं बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया था। 

 

एक पर कार्यवाही तो दूसरे पर मेहरबानी क्यों . . . . 


जनपद के सिंचाई विभाग मेंं राजघाट निर्माण खण्ड व सिंचाई खण्ड द्वारा विभिन्न बांधों व नहरोंं का अनुरक्षण व मरम्मत के कार्य किये जाते है। विगत जुलाई माह मेंं दोनोंं खण्ड़ो के अधिशासी अभियंता का स्थानांतरण हुआ था और दोनोंं खण्डो का अतिरिक्त प्रभार झांसी के अधिशासी अभियंता को दिया गया। लेकिन  प्रमुख अभियंता के आदेश के बाद भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर सिंचाई खण्ड के अधिशासी अभियंता इंजी. सीपी ङ्क्षसह को तो हटा दिया गया,

लेकिन इसी व्यवस्था के अन्तर्गत आये राजघाट निर्माण खण्ड के प्रभारी  अधिशासी अभियंता को नही हटाया गया। सूत्र बताते है कि उक्त अधिशासी अभियंता द्वारा सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की चरण वंदना की जा रही है और समय-समय पर उनका हिस्सा उन्हें दिया जाता है। जिस कारण यह नियम विपरीत अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खण्ड का अतिरिक्त प्रभार लिये हुये है। इस संबंध मेंं जब सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियोंं से संपर्क करेन का प्रयास किया गया तो वह नही हो सका। 

 

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