भ्रष्ट भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी के खिलाफ नहीं हो पायी कार्यवाही

भ्रष्ट भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी के खिलाफ नहीं हो पायी कार्यवाही

भ्रष्ट भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी के खिलाफ नहीं हो पायी कार्यवाही

प्रत्येक जाँच में पाया गया दोषी, अन्तिम चरण तक नहीं पहुँची कार्यवाही

एक साल से चल रही विभिन्न जाँचे, प्रशासन नहीं पहुंचा निष्कर्ष पर

ललितपुर।Ravi sen 

भारतीय जनता पार्टी भले ही देश व प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा कर रही हो, परन्तु हकीकत इसके विपरीत है। जनपद में कई अधिकारी ऐसे हैं, जिनपर भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं, किन्तु शासन व प्रशासन में तैनात अधिकारी व मंत्री उनके खिलाफ कार्यकाही नहीं करने दे रहें है। ऐसा वर्तमान सरकार में ही देखा गया है, कि जब दोष सिद्ध होने के बाद भी जाँच करायी जा रही है। दूसरी जाँच में भी दोष सिद्ध होने के बाद भी कोई कार्यवाही अमल में नहीं लायी जा रही है। जी हाँ यह पूरा प्रकरण भूमि संरक्षण विभाग के महरौनी इकाई में तैनात भूमि संरक्षण अधिकारी है। 

भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी के ऊपर एनएफएसए योजना के अन्तर्गत पशु वितरण मामले में रुपया लेने के आरोप लगाये गये। जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जाँच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नामित किया। जाँच में आधे से अधिक शिकायतकर्ताओं ने लिखित शपथपत्र देकर जाँच अधिकारी के सामने कबूल किया है कि उनसे पशु वितरण के तहत धन लिया गया है। चूँकि शिकायत कर्ताओं से ही धन लिया गया है। इससे पूरा प्रकरण एकदम साफ हो गया।

यही नही कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह भी कबूल किया, कि पहले उनसे धन लिया गया, इसके बाद उन्हें वापिस कर दिया गया। पूरे मामले में जाँच अधिकारी ने पाया कि भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी देवेन्द्र प्रताप द्वारा किसानों से पशुओं की अनुदान राशि देने में अवैध तरीके से धन लिया गया है। जाँच अधिकारी जिलाधिकारी को जाँच रिपोर्ट सौंप दी गयी। माना जा रहा था कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दम भरने वाली भाजपा पार्टी की सरकार में दोषी भूमि संरक्षण अधिकारी के खिलाफ कढ़ी कार्यवाही होगी, किन्तु ऐसा नहीं किया गया।

कुछ आलानेताओं के फोन आये, तो पुन: जाँच में उक्त पत्रावली मुख्य विकास अधिकारी के सामने भेज दी गयी। अब जाँच की जाँच आरम्भ होने के खेल शुरू हो गया। भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जाँच भ्रष्टाचार की भेंट चढऩे लगी। हालाँकि थक हार कर मुख्य विकास अधिकारी ने भी अपनी जाँच रिपोर्ट में भूमि संरक्षण अधिकारी व विभाग में तैनात कर्मचारी को भ्रष्टाचार में दोषी माना। इस जाँच रिपोर्ट के बाद भी दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी।

दोषियों को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने तीन सदस्यी टीम गठित की, इस कमेटी ने भी पूरे प्रकरण में भ्रष्टाचार का दोष सिद्ध किया। इस पूरे प्रकरण के एक वर्ष गुजर जाने के बाद भी किसी भी दोषी के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई। ऐसे में आगामी लोक सभा चुनाव में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा करने वाली भाजपा जनता को क्या मुंह दिखायेगी। जिनकी सरकार में ख्ुालेआम एक भ्रष्ट अधिकारी संरक्षण दिया जा रहा हो। 

Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Comments