ध्वस्तीकरण आदेश के बाद भी नहीं गिर रहा गुरूद्दीन महाविद्यालय 

ध्वस्तीकरण आदेश के बाद भी नहीं गिर रहा गुरूद्दीन महाविद्यालय 

ध्वस्तीकरण आदेश के बाद भी नहीं गिर रहा गुरूद्दीन महाविद्यालय 


चार वर्ष पूर्व नियत प्राधिकारी ने किया आदेश पारित


हरित पट्टी में बिना नक्शे निर्मित है इमारत
ललितपुर। Arif khan

प्रदेश में जहाँ भू-माफिया व अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही हो, किन्तु जनपद ऐसा दिखायी नहीं दे रहा है। सपा शासनकाल में हरित पट्टी में बने एक महाविद्यालय की इमारत के ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किये गये। किन्तु समाजवादी पार्टी के कदावर नेता व जाति विशेष होने कारण आदेश ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। किन्तु भाजपा सरकार में भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। जबकि कार्यवाही से बचने के लिए जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में अपील डाल दी, जो वर्तमान में तारीखों के घेरे में चल रही है। 


शहर से सटे मास्टर प्लान में हरित पट्टी घोषित होने के कारण यहाँ पर किसी भी आवासीय व व्यवसाहिक  इमारत बनाना गैर कानूनी है। किन्तु समाजवादी पार्टी सरकार में सत्ता की हनक में गुरूद्दीन महाविद्यालय की इमारत तैयार हो गयी। इसके बाद नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र ने 27 दिसम्बर 2014 केा नोटिस जारी किया।  भवन स्वामी सितारादेवी पत्नी पारसनाथ यादव को प्रबन्धक गुरूद्दीन महाविद्यालय ने जबाब आपत्ति प्रस्तुत करने हेतु समय माँगा गया।

किन्तु पर्याप्त समय दिये जाने के बाबजूद भी विपक्षी द्वारा नियत प्राधिकारी/ परगना मजिस्ट्रेट विनियमित क्षेत्र के पास प्रस्तुत नहीं किया गया। जबाब न आने की दशा में 31 दिसम्बर 2015 को नियत प्राधिकारी/परगना मजिस्ट्रेट विनियमित क्षेत्र रमेश चन्द्र ने नक्शा स्वीकृत कराये बिना अवैधानिक रूप से भवन निर्माण कराये जाने के कारण ध्वस्तीकरण आदेश पारित किये। उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार होने के कारण आदेश के बाद प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी।

इसके बाद समय मिलने कारण सितारा देवी ने अग्रिम न्यायालय में अपील कर दी। जब से अब तक इस इमारत के ध्वस्तीकरण सम्बन्धी कोई भी कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी है। सूत्रों की मानें तो सितारदेवी के द्वारा अभी तक न्यायालय में कोई भी ठोस जबाब भी नहीं पेश किया गया है। हालही में जब हरित पट्टी में निर्मित मकानों के ध्वस्तीकरण के लिए जब व्यापक पैमाने पर प्रशासनिक कार्यवाही अमल में लायी गयी तो माना जा रहा था, कि अवैध तरीके से निर्मित महाविद्यालय की इमारत का भी ध्वस्तीकरण किया जायेगा।

किन्तु प्रशासन ने ऐसी कोई ठोस कार्यवाही नहीं की, कुछ गरीबों के अशियाने गिराये गये। तो वहीं कदावर लोगों को न्यायालय में अपील का समय दे दिया गया। यही कारण है कि जनपद में हरित पट्टी में निर्मित बड़ी इमारतें सरकार की मंशा पर पानी फेर रही हैं। तो वहीं बड़े माफियाओं पर कार्यवाही के उद्देश्य से प्रदेश में पूर्ण बहुमत सरकार बनाने वाली जनता के साथ भी छलावा हुआ है। 

 

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