जिला अस्पताल की व्यवस्थायें पटरी से उतरी

 जिला अस्पताल की व्यवस्थायें पटरी से उतरी

मैन पावर के अभाव मेंं बंद पड़ी करोड़ो की मशीनें
साफ-सफाई के नाम पर होती है खानापूर्ति

ललितपुर-

गरीब व पिछड़े समुदाय के लोगों को उचित स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा देश भर में अनेकों योजनाओं पर अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद भी जिला चिकित्सालय की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नही हो रहा है।

यहां शासन से आने वाली धनराशि का बंदरबांट चिकित्सालय प्रशासन व ठेकेदार करने में जुटे हैं।
जनपद की दस लाख से अधिक आबादी वाले क्षेत्र के लोगों का उपचार जिला मु यालय स्थित काशीराम संयुक्त चिकित्सालय में होता आ रहा है।

जिसको व्यवस्थित करने के लिए सरकार द्वारा प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की धनराशि आवंटित की जाती है। शासन द्वारा मिलने वाली धनराशि का जिला चिकित्सालय प्रशासन व ठेकेदारों द्वारा बाखूबी बंदरबांद किया जा रहा है।

संविदा कर्मियों को पूरी धनराशि न देकर क पनी के ठेकेदार द्वारा कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। वहीं अस्पताल प्रशासन द्वारा परिसर में रखी एक्सरे व अल्ट्रासाउण्ड मशीनों की जांच समय-समय पर नही की जाती है।

अस्पताल के मुख्य द्वार से लेकर भर्ती वार्ड तक जगह-जगह गन्दगी का अ बार लगा देखा जाता है। नगर व दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उचित चिकित्सीय सुविधा अस्पताल में नही मिल रही है। फिलहाल जिला अस्पताल की हालत वर्तमान में दयनीय बनी हुई है।

मरीजों के साथ होता अभद्रता
तीमारदारों की माने तो जिला चिकित्सालय में आने वाले मरीजों के साथ चिकित्सक व स्टॉफ अभद्रता करते नजर आते है। तीमारदारों को परेशानी के कई समाचार प्रकाश में आये हैं। इसकी शिकायतें भी कई बार हो चुकी हैं, किन्तु जाँच में उनका निस्तारण के कर दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।


शो पीस बना आईसीयू केन्द्र
ह्रदय के मरीजों के लिए शासन द्वारा जिला अस्पताल में आईसीयू केन्द्र तो शुभारम्भ कर दिया गया है, किन्तु वहाँ स्थायी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गयी, जिससे मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।

मरीजों को नही होता उपलब्ध स्टे्रचर
गंभीर हालात में  अस्पताल मेंं मरीजोंं को स्टे्रचर की सुविधा मेंं अस्पताल प्रशासन मुहैया नही करा पा रहा है। हाथों में लेकर मरीजों को तीमारदार मुख्य द्वार से इमजेन्सी रूम तक पहुंचाते है। कभी कभी तो मरीजों वार्ड में भी चलकर या तीमारदारोंं के सहारें ही पहुचंाना पड़ता है। इस संबंध मेंं जिला प्रशासन को चिकित्सालय प्रशासन को कई बार हिदायत दे चुका है। लेकिन इसके बावजूद भी अस्पताल प्रशासन अपनी कार्य प्रणाली में सुधार नही लाया है।

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