अशोक वाटिका का प्रसंग देखकर भाव-भिवोर हुये श्रद्धालु

 अशोक वाटिका का प्रसंग देखकर भाव-भिवोर हुये श्रद्धालु

हनुमान जी ने अंगूठी दिखा सीता माता को दिखाई पहचान


ललितपुर-

श्री नृसिंह रामलीला समिति के तत्वावधान में तालाबपुरा स्थित श्री नरसिंह रामलीला मैदान में सनातन धर्म की परंपराओं को जीवित रखने के लिए कलाकारों द्वारा नित नए वर्णनो को मंचित कर लोगों को धर्म के प्रति समर्पित होने का संदेश दे रहे हैं।

रामलीला के नौ वे दिवस में वाली वध सीता जी की खोज एवं लंका दहन की लीला का आयोजन किया गया। 
लीला के प्रथम दृश्य में सुग्रीव वाली के पास जाता है। और युद्ध के लिए चुनौती देता है। और उसे युद्ध करने को कहता है वाली सुग्रीव की लातो घुसो से पिटाई कर देता है।

सुग्रीव वहां से प्राण बचाकर भाग जाता है। और प्रभु श्रीराम से कहता है की प्रभु तुमने तो वाली को मारने का वचन दिया था। मगर आप तो वृक्ष के पीछे छुपकर तमाशा देखते रहे और वाली मुझे मार रहा था। अच्छा हुआ की मैं वहां से प्राण बचाकर भाग आया। तब श्री राम जी बोले सुग्रीव तुम दोनों भाइयों वाली और सुग्रीव की सूरत एक सी है ।

मैं इसमें धोखा खा रहा था की गलती से कहीं तीर तुम्हें ना लग जाए। इसलिए मैं चुपचाप तमाशा देख रहा था।
श्री राम ने सुग्रीव को एक फूलो की माला गले में पहनाई और सुग्रीव तुम युद्ध करो वाली और सुग्रीव में युद्ध होता है। और वृक्ष के पीछे छुपकर श्री राम वाली को तीर मार देते हैं और वाली की मृत्यु हो जाती है। लीला के दूसरे दृश्य में सुग्रीव सीता जी की खोज के लिए वानर सेना भेजते हैं।

तथा समुद्र को पार करना आसान नहीं था। इसलिए जामवंत जी हनुमान जी को उनकी शक्तियां याद दिलाते हैं। और हनुमान जी वायु की गति से समुद्र को पार करके लंका पहुंचते हैं। लंका में पहुंचकर सर्वप्रथम वहां पर लंकिनी का वध किया और इसके बाद विभीषण से मिलते हैं।

तथा माता जानकी जी का पता पूछते हैं विभीषण ने हनुमान जी को माता सीता जी का पता बताते हैं। की माता सीता अशोक वाटिका में वटवृक्ष के नीचे बैठी है हनुमान जी वहां पहुंचकर माता सीता से मिलते हैं। और प्रभु श्री राम की निशानी अंगूठी को दिखाते हैं और माता सीता से कहते हैं की मैं श्री राम जी का भक्त हनुमान हूं।

मैं आपका पता लगाने आया था। और कहां मां मुझे बहुत भूख लगी है क्या मैं यहां के कुछ फल खा सकता हूं। मां सीता ने कहा जाओ पुत्र हनुमान तुम वाटिका के फल तोडक़र अपनी भूख को शांत कर लो । हनुमान जी ने सारी अशोक वाटिका उजाड़ दी। जब रावण को पता चला की कोई वानर लंका में घुस आया है।

तब वह अपने पुत्र अक्षय कुमार को भेजते हैं। हनुमान जी रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध कर देते हैं। इसके बाद रावण अपने पुत्र मेघनाथ को भेजता है और मेघनाथ हनुमान जी को ब्रह्मास्त्र से बांधकर लंकापति रावण के पास लाता है। रावण उन्हें प्राणघातक दंड देने की घोषणा करता है।

वहां पर उपस्थित छोटे भाई विभीषण जी ने इसका विरोध किया। की भाई रावण किसी दूत की हत्या करना आप जैसे राजा को शोभा नहीं देता। तब रावण हनुमान जी की पूंछ मैं आग लगवा देता है। हनुमान जी ने सारी लंका को जला दिया और सोने की लंका जलकर राख हो गई।

भगवान गणेश की भूमिका में उज्जवल पटेरिया, भगवान श्री राम की भूमिका में रूद्र प्रताप सिंह तोमर, लक्ष्मण वेदांश चौबे, माता सीता शिवम पुरोहित, हनुमान जी कृष्णकांत तिवारी, तारा त्रिवेणी राजा, बाली शिव शंकर सुडेले, सुग्रीव प्रदीप गोस्वामी,

जामवंत पवन सुडेले, रावण विजयकांत सुडेले, मंदोदरी रोहित राजा, अक्षय कुमार उज्जवल पटेरिया,  मेघनाथ शिवम कौशिक, लंकिनी मलथू, जम्बूमाली नत्थू, लला टहरौली, वानर सेना दीपक गिरी, सुरेश कुशवाहा, देवी कुशवाहा, आसाराम रहे। मीडिया प्रभारी आलोक खरे अमित लखेरा पंकज कुमार रायकवार पत्रकार आदि।

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