नपा: फर्जी नियुक्ति प्रकरण में लिपापोती करने में लगे पालिका अधिकारी

 नपा: फर्जी नियुक्ति प्रकरण में लिपापोती करने में लगे पालिका अधिकारी

 

नपा: फर्जी नियुक्ति प्रकरण में लिपापोती करने में लगे पालिका अधिकारी

लिपिक की दबंगाई के खौफ में कर्मचारी व अधिकारी

गायब पत्रावली को शहर में तलाशने की कवायद भी हुई पूर्ण

ललितपुर। रवि सेन/ आरिफ खान

समाजवादी पार्टी सरकार में फर्जी तरीक से अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त दबंग लिपिक की जाँच में अधिकारी किसी निश्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। नगर पालिका के कर्मचारी तो दूर की बात है अधिशाषी अधिकारी भी लिपिक फर्जी नियुक्ति को बरकरार रखने का पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। इस फर्जीबाड़े को पालिका अधिकारियों द्वारा क्यों दबाया जा रहा है, यह समझ से परे हैं, इस नियुक्ति में हुये भ्रष्टाचार में उनकी संलिप्ता है या फिर वह लिपिक की दबंगाई से डरते हैं। 

भारतीय जनता पार्टी भले ही देश व प्रदेश से भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा कर रही हो, परन्तु ऐसा धरातल पर दिखायी नहीं दे रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण  नगर पालिका में दिखायी दे रहा है।

नगर पालिका में 16 वर्ष पूर्व समाजवादी पार्टी सरकार में समाजवादी पार्टी के पालिकाध्यक्ष द्वारा एक फर्जी अनुकम्पा नियुक्ति की गयी थी। इससे पूर्व भारतीय जनता पार्टी के पास पालिकाध्यक्ष की सीट रही परन्तु उनके कार्यालय में यह फर्जीवाड़ा नहीं हो सका।

जबकि न्यायालय में कूट रचित दस्तावेज प्रस्तुत कर एक आदेश हवाला भी दिया जा रहा था। जिसमेें अनुकम्पा नियुक्ति का कोई हवाला नहीं दिया गया। इसके बाद समाजवादी पार्टी सरकार में इस फर्जीवाड़े को अमली जामा पहनाया गया। सभी नियमकानून ताक पर रख यह नियुक्ति कर दी गयी। इसका ख्ुालासा उस समय हुआ जब नगर पालिका में कार्यरत एक कर्मचारी अब्दुल हकीम खाँ ने सेवानिवृत्ति के पश्चात शिकायत कर इस फर्जी वाड़े को उजागर किया।

शिकायत के पश्चात प्रशासन की नींद ख्ुाली। प्रशासन ने जाँच टीम गठित कर नियुक्ति प्रकरण की पत्रावली खंगालनी प्रारम्भ कर दी। जैसे ही जिला प्रशासन ने जाँच टीम गठित की, वैसे ही नगर पालिका से इस नियुक्ति सम्बन्धी दस्तावेज गायब हो गये। मजेदार बात तो यह भी है कि उक्त नियुक्ति के चक्कर में उक्त लिपिक ने अपने मृतक पिता की नौकरी सम्बन्धी पत्रावली भी गायब कर दिये।

अब सवाल यह आता है कि जब जिस कर्मचारी की मृत्यु के एवज में अनुकम्पा नियुक्ति दी गयी है, जब उसकी नौकरी के साक्ष्य नहीं है, तो उसकी मृत्यु के पश्चात नौकरी किस आधार पर लगायी गयी। यही नहीं पालिका में उक्त कर्मचारी का मृत्यु प्रमाणपत्र भी नदारत है। ऐसे में फर्जी नियुक्ति को किस प्रकार बरकरार किये हुये हैं।  

इनका कहना है . .  . . . . 

अभी तक जांच उपरान्त पत्रावली उपलब्ध नही हुयी है। उक्त प्रकरण सम्मपूर्ण पत्रावली आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। 

मधुसूदन जायसवाल

अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।

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