अस्थाई गौ शालााओं में कैद जिंदा गौवशों को नोच रहे चील, कौवा

अस्थाई गौ शालााओं में कैद जिंदा गौवशों को नोच रहे चील, कौवा


भूख प्यास से बेहाल गौवंश, गौ सेवकों में रोष


तालबेहट।

अस्थाई गौ आश्रय स्थल गौ वशों की मौत की शरण स्थली बनते जा रहे है। न तो गौ वशों के लिए भूसे, चारे का इंतजाम है और न ही प्यासे जानवरों को पानी का नसीब हो रहे। जिससे गौ वशं सरकार के फरमान से गौ आश्रय केन्द्रों व अस्थाई गौ शालाओं में कैद हो कर दम तोड़ रहे है। कहीं गुपचुप तरीके से मृत गौवशों को दफन किया जा रहा तो कहीं मृत पडे गौ वशं चील कौवे का आहार बन रहे।


ग्राम पंचायत स्तर पर बनाई गई अधिकांश गौ शालाए बदहाली का शिकार है क्योंकि इनके निर्माण को भले ही सरकारी धन मिला है मगर इन में रखे जा रहे गौवंश के लिए भूसा, चारे, पानी और ठंड से बचाव को अलाव के प्रबंध के लिए सरकारी धन की व्यवस्था नही है। जिससे इन गौ शालाओं में रखे जा रहे गौ वंश भूख प्यास से बेहाल हो कर मौत की आकोश में जा रहे है। ग्राम तरगुंवा की गल्ला मंडी में भूख प्यास के बेहाल गौ वशों की आए दिन मौत हो रही है।


जन सहयोग से गौ सेवा केन्द्र का संचालन कर रहे गौपुत्र संदेश चतुर्वेदी ने कहा कि गौ वशों के रखरखाव का सरकारी स्तर पर दुरूपयोग हो रहा है और यदि चारागाह की जमीन मुक्त करा कर उस पर गौ शालाए संचालित हो तो शायद गौ वंश के प्राण बच सकेगें।


तरगुंवा की ग्राम प्रधान सूरजदेवी ने बताया कि गल्ला मंडी में बनाई गई अस्थाई गौ शाला में न तो भूसा का इंतजाम है न पानी का..निजी खर्च पर जितना हो सकता गौ वंशों के लिए व्यवस्था की जा रही है।


उपजिलाधिकारी मु0 कमर का कहना है कि अस्थाई गौशाला से जानवरों को बड़ी गौ शाला कारीपहाड़ी भेजा जा रहा है और जो भूसा ग्राम पंचायतों व समाजसेवियों से लिया गया था वह बडी गौशालाओं में भेज दिया गया।
 

 

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