रामकथा का रसपान करने को उमड रही श्रोताओं की भीड़

 रामकथा का रसपान करने को उमड रही श्रोताओं की भीड़

वन गमन की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता

              रिपोर्टर - सुनील त्रिपाठी

तालबेहटा,ललितपुर

ग्राम खांदी के बुद्वसा पीर बाबा मन्दिर में आयोजित हो रही रामकथा के सांतवे दिन कथा व्यास द्वारा राम वन गमन की कथा की मार्मिक प्रस्तुति दी गई। राम कथा का रसपान करने के लिए प्रतिदिन पण्डाल में श्रोताओं की भीड़ उमड रही है।


रामकथा में राम वन गमन का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास राकेश पाठक कहते कि प्रभु लीला में कैकई की मति हर गई और उन्होनें पुत्र मोह में राम के लिए चौदह बरस का वनवास मांग लिया।

मां कैकई के वचन और पिता दसरथ की आज्ञा पाकर जैसे ही राम सीता वनगमन को जाने लगे तो अतिप्रिय लक्ष्मन भी उनके साथ चल दिए। भरत को जब अयोध्या आने पर राम वन गमन की जानकारी मिली तो वह राम को ढूंढते हुए पहुंच गए और अश्रुधारा का प्रवाह करते हुए वापिस अयोध्या की राजगद्दी संभालने की अनुमय विनय करने लगे।

जब राम ने पिता के वचन को पूरा करने का संकल्प बार बार दुहराया तो भरत राम की खडाऊ लेकर चल दिए और वचन दिया कि जब तक राम लक्ष्मन अयोध्या वापिस नही आए वह भी अयोध्या से दूर रहकर अयोध्या की जनता की सेवा करेगें।

राम सीता और लक्ष्मन की वन गमन कथा का देर रात्रि तक श्रोता भावविभोर हो कर रसपान करते रहे। आयोजन को सम्पन्न बनाने में कमलेश कुशवाहा,र राम प्रसाद, डा०  राजू कुशवाहा, भगवत कुशवाहा, दसरथ, लखन कुशवाहा, जगदीश, भागीरथ, सेवालाल, बृजकिशोर, हीरालाल, अनिल कुशवाहा, रामप्रसाद सहित समस्त ग्रामीणों का सहयोग मिल रहा है।

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