ग्राम प्रधान व रोजगार सेवक पर कब होगी कार्यवाही 

ग्राम प्रधान व रोजगार सेवक पर कब होगी कार्यवाही 

मनरेगा:- ग्राम पंचायत महोली में फिर हुआ लाखों रूपये का फर्जी भुगतान


खण्ड विकास अधिकारी ने कमीशन लेकर किया खेल


ग्राम प्रधान व रोजगार सेवक पर कब होगी कार्यवाही 


ललितपुर।

अंतिम जैन 
 

मनरेगा में भ्रष्टाचार के लिये चर्चित विकासखण्ड बिरधा के खण्ड विकास अधिकारी ने एक नया कारनामा किया है। ग्राम पंचायत महोली में जिस कार्यो की जांच चल रही थी। उन्ही निर्माण कार्यो पर लाखों रूपये का भुगतान एक ही तारीख में मोटी कमीशन लेकर कर दिया।

जिससे स्पष्ट है कि ग्राम पंचायत महोली के ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, तकनीकि सहायक व रोजगार सेवक की भारी सांठ गाँठ 
खण्ड विकास अधिकारी से है। 


विकासखण्ड बिरधा की ग्राम पंचायत महोली में मनरेगा योजना के अन्तर्गत बड़े पैमाने पर परियोजनायें स्वीकृत की गयी और उन परियोजनाओं पर कागजों में कार्य कराकर लाखों रूपये का भुगतान निकाल लिया गया। जिसकी शिकायत ग्रामीणों सहित कई अन्य लोगों ने जिला प्रशासन से लेकर शासन तक की थी। जिलाधिकारी ने मामलें की जांच के निर्देश उपायुक्त मनरेगा को दिये थे। प्रारंभिक जांच में तो उपायुक्त मनरेगा में कई कूप निर्माण के कार्यो में अनिमित्तायें पाई थी और वसूली भी प्रस्तावित की थी।

जब उपायुक्त मनरेगा की जेब गरम कर दी गयी तो उन्होनें जांच की दशा की मोड़ दी। गुप चुप तरीके से दो एपीओ से एक फर्जी जांच कराकर मामले को रफा-दफा कर दिया। परन्तु अभी मण्डलीय समिति द्वाराग्राम पंचायत महोली के कूप निर्माण कार्यो की जांच होना बाकी है परन्तु इसी दौरान खण्ड विकास अधिकारी बिरधा ने एक नया कारनामा कर दिया। मोटी कमीशन लेकर ग्राम पंचायत महोली के कई कूप निर्माण परियोजनाओं पर सामग्री की मद में लाखों रूपये का भुगतान नबम्वर माह मेंं कर दिया। जबकि इन कूप निर्माण  के कार्य संदेह के घेरे में है। 


खण्ड विकास अधिकारी बिरधा ने ग्राम पंचायत महोली के लाभार्थी दरऊ पुत्र अडक़ू के खेत पर 58 हजार रूपये का भुगतान समाग्री की मद में किया है। यह भुगतान 16 नबम्वर को किया गया है। जबकि दरऊ पुत्र अडक़ू का कहना है कि उसने अपने कूप का निर्माण स्वंय किया था।  परन्तु ग्राम पंचायत के रोजगार सेवक व ग्राम प्रधान ने फर्जी तरीके से उसके कूप पर अब तक 1 लाख 75 हजार रूपये का भुगतान करा चुके है। इसी प्रकार  रंका उर्फ  लक्ष्मण पुत्र हीरा सहरिया के कूप निर्माण पर 82 हजार रूपये का भुगतान किया गया है।

जबकि रंका उर्फ लक्ष्मण के कूप निर्माण का कार्य मनरेगा अधिनियम के मानकों को ताक पर रख कर किया गया था। यह कूप गांव के  तालाब के भराव क्षेत्र में निर्मित है। इसी प्रकार नबम्वर माह मेंं महेन्द्र पुत्र अजुद्दी के कूप पर 51 हजार रूपये, सुख सिंह पुत्र पहलवान के खेत पर कूप निर्माण में 67 हजार रूपये, हरी सिंह पुत्र मानसिंह के खेत पर कूप निर्माण का 26 हजार रूपये, जगभान पुत्र समरण के खेत पर कूप निर्माण का 67 हजार रूपये,

रमूआ पुत्र जालम के खेत पर कूप निर्माण का 19 हजार रूपये, मुन्ना पुत्र सैनी के खेत पर कूप निर्माण का 9 हजार रूपये का भुगतान किया गया है। जबकि इन सभी कूप निर्माण का चयन, निर्माण संदेह के घेरे में है। भ्रष्ट खण्ड अधिकारी ने कमीशन के लालच में लाखों रूपये का भुगतान कर मनरेगा की धन की बर्बादी की है। इसी प्रकार इन्ही परियोजना पर श्रमांश की मद में भी लाखों रूपये का भुगातन हुआ है। इस मामले की शिकायत भी गांव के जागरूक नागरिकों द्वारा जिलाधिकारी से की गयी है। 

 


फर्जी निर्माण कार्य कराने के लिये चर्चित है रोजगार सेवक व तकनीकि सहायक मनरेगा में किसी भी परियोजना के निर्माण में तकनीकि सहायक व रोजगार सेवक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। तकनीकि सहायक का काम अपनी निगरानी में परियोजना का निर्माण कर पूर्ण कराकर उक्त कार्य को कितनी निर्माण सामग्री का प्रयोग हुआ है इसका मापन कर एमबी में दर्ज करना है।
तथा रोजगार सेवक मस्टररोल में दर्ज करता है कि किस मजदूर ने कितने दिवस कार्य किया। परन्तु ग्राम पंचायत महोली के दबंग रोजगार सेवक के आगे सभी नतमस्तक रहते है। तकनीकि सहायक फर्जी एमबी कागजों में कर अपना कमीशन लेता रहता है और रोजगार सेवक फर्जी मजदूरों की मजदूरी का अंकन मस्टररोल में करता है। 
 
 
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