CMS बीजेपी सरकार में भी जगदीश गांधी का काला कारनामा, आवास विकास परिषद सवालों के घेरे में

 

सीएमएस तीन मंजिला अवैध बिल्डिंग पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने से प्रशासन पीछे
पूर्व आईएएस आरवी पाठक के मकान में कब्जा कर चला रहें स्कूल

लखनऊ। सीएमएस राजधानी के नामी स्कूलों में गिना जाता है। लेकिन इसके अंदर की असलियत पता करें तो कुछ और ही है। शिक्षा के नाम पर लूट-खसोट करने वाले cms के मालिक जगदीश गांधी का काला कारनामा बीजेपी सरकार में भी कायम है। 

आए दिन प्रदेश सरकार शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे और वादे कर रही है। लेकिन असलियत क्या है, यह जगदीश गांधी जैसे लोगों द्वारा खुले आम अवैध धंधा करने वालों के विरुद्ध किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने से मालूम होता है। 

अधिकारियों के कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक 

आवास विकास की धीमी कार्रवाई से भी अधिकारियों के कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि कहीं न कहीं आवास विकास परिषद की भी मिलीभगत है, जिस वजह से सख्त कार्रवाई अभी तक नहीं की जा सकी है। 

बताते चलें कि स्वतंत्र प्रभात की टीम ने जब इस पूरे प्रकरण की गहराई से छानबीन की, तो  जगदीश गांधी के सिर्फ एक कारनामे ही नहीं हैं, अन्य कारनामों के सच भी सामने आए।, जिनको जल्द ही जनता के सामने लाया जाएगा। 

जगदीश गांधी पर अभी तक नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई

इतना ही नहीं अपने बचाव के लिए यहां पर स्कूल खोल दिया ताकि किसी तरह की कार्रवाई करने में सरकार को भी सोचना पड़े। लेकिन आवास विकास परिषद से आदेश होने के बावजूद जगदीश गांधी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 

वहीं जगदीश के असली चेहरे का पता तो तब चला जब अनाधिकृत निर्माण गिराए जाने के संबंध में शिकायत की। यूपी में जंगलराज किस कदर कायम है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब एक आईएएस अधिकारी की सुनवाई नहीं हुई तो आम जनता का क्या हाल होगा।  

हालाकि जो भी हो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कहीं न कहीं पूर्व सरकार में बड़े ओहदे तक जगदीश गांधी की पहुंच थी। जिस वजह से आईएएस अधिकारी को भी न्याय नहीं मिला और अंततः हारकर शांत बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा। लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। 

सीएमएस के अधिकारियों ने हालांकि, अपनी गलती स्वीकार करनी शुरू कर दी है। साथ ही प्रकरण को लेकर सुधार की बात भी कही है। यह भी कहा गया कि अगले सत्र से छात्रों का भविष्य अंधकार में नहीं रहेगा। चूंकि 15 सालों से शिक्षा का अवैध कारोबार कर रहे सीएमएस ने जनता को धोखे में रखा है। जिससे आम जनों का भरोसा टूट चुका है। 

समाजसेवी संदीप पांडेय द्वारा मांगे गए आरटीआई के जवाब में
समाजसेवी संदीप पांडेय द्वारा मांगे गए आरटीआई के जवाब में आवास विकास परिषद ने खुद यह बात बताई है उन्होंने कहा कि ए-823, ए-903 इंदिरा नगर, लखनऊ चार मंजिला सिटी मांटेसरी स्कूल के भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी गई है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि भवनों की स्वीकृति भू-उपयोग आवासीय है। भवनों का निर्माण मानचित्र के अनुरूप नहीं है। 
 

यह है पुरा मामला

जानकारी के मुताबिक 2003 में पहली बार सीएमएस के इंदिरा नगर स्थित ब्रांच के ध्वस्तीकरण का आदेश आवास-विकास परिषद ने दिया था। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी अवैध बिल्डिंग गिराने पहुंचे थे। लेकिन पूर्वयोजनानुसार स्कूल में बच्चों को बैठा दिया गया था।जिससे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने से प्रशासन पीछे हट गया।

इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद दोबारा आवास-विकास परिषद ने 2015 में बिल्डिंग गिराने का आदेश दिया। लेकिन दो साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

 

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