बहरइच जिले की टॉप खबरे

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संवीक्षा में विधिमान्य पाये गये 10 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र 

 

 

बहराइच 20 अप्रैल। लोकसभा सामान्य निर्वाचन-2019 अन्तर्गत 56-बहराइच (अ.जा.) संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के लिए दाखिल किये गये नामांकन पत्रों की संवीक्षा में 10 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र विधिमान्य पाये गये हैं। रिटर्निंग आफिसर द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय/राज्य राजनैतिक दलों के अभ्यर्थियों यथा भारतीय जनता पार्टी से अक्षयवरलाल पुत्र भगवान दास, निवासी ग्राम सेमरी मलमला, पोस्ट धर्मापुर,

थाना कोतवाली मुर्तिहा, तहसील (मोतीपुर) मिहींपुरवा, बहराइच, समाजवादी पार्टी से शब्बीर बाल्मीकि पुत्र दुबरलाल, निवासी मोहल्ला कासिमपुरा, म.न. 42क, नगर कोतवाली, बहराइच तथा इण्डियन नेशनल कांग्रेस पार्टी से सावित्री बाई फूले पुत्री आज्ञाराम, निवासी जनसेवा आश्रम भग्गापुरवा, ग्राम नानपारा देहाती, पोस्ट व तहसील नानपारा, बहराइच द्वारा दाखिल किये गये नामांकन पत्र विधिमान्य पाये गये। 

 

इसी प्रकार रजिस्ट्रीकृत राजनैतिक दलों (मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य राजनैतिक दलों से भिन्न) के अभ्यर्थियों यथा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) से जगदीश कुमार सिंह पुत्र मेघ सिंह, म0न0 75, मो. अकबरपुरा नई बस्ती, पो. सदर, तहसील व जिला बहराइच, राष्ट्रीय जन अधिकार पार्टी (यूनाईटेड) से मौजीलाल पुत्र बलेसर, निवासी ग्राम व पोस्ट मनगौड़िया, थाना मोतीपुर, परगना धर्मापुर, तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर), बहराइच, राष्ट्रीय क्रान्ति पार्टी से राम सागर पुत्र चेत राम, निवासी ग्राम व पोस्ट रेहुवा मंसूर, थाना रामगाॅव, तहसील महसी, बहराइच तथा शिवसेना से श्रीमती रिन्कू साहनी पत्नी रोशन लाल, निवासी म.न. 331, ग्राम जगतापुर, पोस्ट बहराइच तहसील व जिला बहराइच द्वारा दाखिल किये गये नामांकन पत्र विधिमान्य पाये गये।   

इसके अलावा निर्दल प्रत्याशी के तौर पर गुर प्रसाद पुत्र साहेबदीन, निवासी ग्राम व पोस्ट सरैया, थाना, परगना व तहसील नानपारा, बहराइच, जनार्दन गोंड पुत्र शिवबचन, निवासी ग्राम व पोस्ट बेगमपुर, थाना रामगाॅव, परगना, तहसील व जिला बहराइच तथा शिवनन्दन पुत्र हरिद्वारी, निवासी ग्राम सेमरी मलमला, पोस्ट हरखापुर, तहसील (मोतीपुर) मिहींपुरवा, बहराइच द्वारा दाखिल नामांकन-पत्र भी विधिमान्य पाये गये। 

 

 

मतदाता पहचान-पत्र के विकल्प के रूप में मान्य नहीं होगी फोटो मतदाता पर्ची

बहराइच 20 अप्रैल। लोकसभा सामान्य निर्वाचन-2019 तथा साथ-साथ होने वाले राज्य विधान सभाओं के साधारण निर्वाचन एवं उप निर्वाचन के आगामी निर्वाचनों में निर्वाचकों की पहचान के सम्बन्ध में आयोग की ओर से जारी आदेश के अनुसार फोटो मतदाता पर्ची को मतदाता की पहचान के लिए मतदाता पहचान-पत्र के विकल्प के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकेगा। 

इस सम्बन्ध में आयोग की ओर स्पष्ट किया गया है कि पूर्व के अवसरों पर आयोग ने फोटो मतदाता पर्ची को पहचान के लिए एक दस्तावेज के रूप में अनुमति दी थी। हालांकि, इसके दुरूपयोग के आधार पर स्टैंड-अलोन पहचान दस्तावेज के रूप में इसके उपयोग के विरूद्व अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं क्योंकि ये नामावली को अंतिम रूप देने के पश्चात मुद्रित होती है और बूथ स्तरीय अधिकारियों के माध्यम से मतदान के नजदीक वितरित की जाती है। फोटो मतदाता पर्ची के डिजाइन में किसी भी प्रकार का सुरक्षा लक्षण शामिल नही है। वास्तव में फोटो मतदाता पर्ची को एक वैकल्पिक दस्तावेज के रूप में शुरू किया गया था क्योंकि निर्वाचक फोटो पहचान पत्र का कवरेज पूरा नही हुआ था। 

आयोग की ओर से कहा गया है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान में 99 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के पास निर्वाचक फोटो पहचान पत्र है और 99 प्रतिशत से अधिक वयस्कों को आधार कार्ड जारी किए जा चुके हंै। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने अब यह निर्णय लिया है कि इसके पश्चात से मतदान के लिए फोटो मतदाता पर्ची को स्टैंड-अलोन पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि फोटो मतदाता पर्ची को तैयार करना जारी रखा जाएगा और जागरूकता बढ़ाने के प्रयास के एक हिस्से के रूप में मतदाताओं को जारी भी किया जाएगा। 

आयोग द्वारा व्यवस्था दी गयी है कि मतदाताओं को यह स्पष्ट करने के लिए कि मतदान के लिए फोटो मतदाता पर्ची एक स्टैंड-अलोन पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, बड़े अक्षरों में फोटो मतदाता पर्ची यह सूचना मुद्रित करायी जायेगी कि ‘‘इस पर्ची को मतदान केन्द्र में पहचान के उद्देश्य के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा। मतदाताओं से अपेक्षा की गयी है कि मतदान के लिए निर्वाचक फोटो पहचान पत्र या आयोग द्वारा निर्दिष्ट 11 वैकल्पिक दस्तावेजों में से एक अपने साथ आवश्य लाएं। फोटो मतदाता पर्ची का मुद्रण बदस्तूर जारी रहेगा। जबकि प्रवासी निर्वाचकों को अपनी पहचान के लिए केवल अपना मूल पासपोर्ट प्रस्तुत करना होगा।

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार मतदान के दिन, मतदान में प्रतिरूपण को रोकने की दृष्टि से सभी मतदाताओं को अपनी पहचान सिद्ध करने के लिए अपना मतदाता फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा, परन्तु ऐसे मतदाता जो अपना मतदाता फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं, उन्हें अपनी पहचान स्थापित करने के लिए निर्धारित किये गये 11 वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेज़ों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा। 

आयोग की ओर से जारी आदेश के अनुसार वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेज़ों के रूप में पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेन्स, राज्य/केन्द्र सरकार के लोक उपक्रम, पब्लिक लिमिटेड कम्पनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी किए गए फोटोयुक्त सेवा पहचान-पत्र, बैंकों/डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक, पैन कार्ड, एनपीआर के अन्तर्गत आरजीआई द्वारा जारी किये गये स्मार्ट कार्ड, मनरेगा जाब कार्ड, श्रम मंत्रालय की योजना अन्तर्गत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज़, सांसदों, विधायकों/विधान परिषद सदस्यों को जारी किये गये सरकारी पहचान पत्र एवं आधार कार्ड प्रस्तुत किये जा सकेंगे। 

आयोग की ओर से यह भी सुझाव प्राप्त हुआ है कि एपिक के मामले में, उसमें प्रविष्टियों की मामूली विसंगतियां नजर अंदाज कर दी जानी चाहिए बशर्ते एपिक द्वारा निर्वाचक की पहचान स्थापित की जा सके। अगर निर्वाचक कोई ऐसा फोटो पहचान कार्ड प्रस्तुत करते हैं जो दूसरे विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा जारी किया गया हो तो ऐसे कार्ड भी पहचान के लिए स्वीकृत किए जाएंगें बशर्ते उस निर्वाचक का नाम उस मतदान केन्द्र से सम्बन्धित निर्वाचक नामावली में मौजूद हो जहां निर्वाचक मतदान करने उपस्थित हुए है। अगर फोटोग्राफ, आदि के बेमेल होने की बजह से निर्वाचक की पहचान स्थापित करना संभव नहीं हो तो निर्वाचक को आयोग द्वारा सुझाये गये वैकल्पिक फोटो दस्तावेजों में से कोई एक पेश करना होगा। 

 

 

स्टार प्रचारकों के व्यय अनुवीक्षण के लिए आयोग ने जारी किये दिशा निर्देश

बहराइच 20 अप्रैल। किसी भी अभ्यर्थी के जिस निर्वाचन क्षेत्र में स्टार प्रचारक प्रचार करते हैं वहाॅ के निवास/भोजन व्यवस्था सहित सभी व्यय उस विशेष अभ्यर्थी के व्यय लेखों में शामिल किये जायेंगे बशर्ते स्टार प्रचारक/प्रचारकों ने अभ्यर्थी के लिए वास्तव में प्रचार किया हो तथा अभ्यर्थी के निर्वाचन अभियान के उद्देश्य से वाणिज्यिक होटल या लाॅज में रहते हुए ऐसी भोजन व्यवस्था तथा निवास का खर्च इस बात की परवाह किये बिना किया है कि अभ्यर्थी द्वारा इसका भुगतान किया जायेगा अथवा नहीं। 

इस सम्बन्ध में आयोग द्वारा दी गयी व्यवस्था के अनुसार इस प्रकार की वाणिज्यिक भोजन व्यवस्था तथा निवास के बाज़ार मूल्य की गणना अभ्यर्थी के निर्वाचन व्यय में की जायेगी चाहे वह भोजन व्यवस्था/निवास सम्मानसूचक ही उपलब्ध कराए गए हों। यदि स्टार प्रचार एक निर्वाचन क्षेत्र में भोजन तथा निवास की सुविधाओं का लाभ उठाते हुए किसी अन्य अभ्यर्थी के प्रचार के लिए दूसरे निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करता है तो भोजन तथा निवास का खर्च उन अभ्यर्थियों के व्यय में यथानुपात में बाॅट दिया जायेगा।आयोग की ओर से इस प्रकार के सभी मामलों में नोटिस जारी कर तद्नुसार कार्यवाही किये जाने का सुझाव दिया है। 

ऐसे मामलों में जहाॅ यदि किसी अन्य राजनैतिक पार्टी/पार्टी का स्टार प्रचारक, अभ्यर्थी की सहयोगी पार्टी की रैली में हिस्सा लेता है और अभ्यर्थी का नाम लेता है या अभ्यर्थी के साथ मंच बांटता है तो सहयोगी पार्टी के प्रचारक का निर्वाचन क्षेत्र तक का यात्रा व्यय छूट प्राप्त नहीं है, इसे अभ्यर्थी के व्यय में जोड़ा जायेगा। 

ऐसे मामलों में यदि नेता (स्टार प्रचारक) के निर्वाचन क्षेत्र में आयोजित रैली/बैठक, जहाॅ नेता निर्वाचन लड़ने वाले अन्य अभ्यर्थियों के साथ मंच साझा करते हैं तो बैठक का व्यय उस नेता तथा ऐसे सभी अभ्यर्थियों के निर्वाचन व्यय में विभाजित किया जायेगा।

तथापि, यदि स्टार प्रचारक अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर अपने दल के अन्य निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों के साथ रैली/बैठक में हिस्सा लेता है तो बैठक का व्यय ऐसे सभी अभ्यर्थियों के निर्वाचन व्यय में समानुभाजित किया जाएगा जिनके लिए निर्वाचन प्रचार किया जा रहा है तथा ऐसी रैली/बैठक आयोजित की गई है तथा उसके निर्वाचन क्षेत्र से बाहर आयोजित रैली/बैठक का कोई भी हिस्सा नेता (स्टार प्रचारक) के निर्वाचन व्यय में नहीं जोड़ा जायेगा। 

यदि कोई परिचारक, जिसमें सुरक्षा गार्ड, मेडिकल परिचारक या पार्टी के केाई सदस्य सहित ऐसा कोई अन्य व्यक्ति शामिल है जो सम्बन्धित निर्वाचन-क्षेत्र में अभ्यर्थी नहीं है, या इलेक्ट्रानिक या प्रिन्ट मीडिया का कोई प्रतिनिधि राजनीतिक पार्टी के नेता (स्टार प्रचारक) के साथ उनके वाहन/विमान/हेलिकाप्टर आदि में यात्रा करता है तो ऐसे नेता का यात्रा खर्च राजनीतिक पार्टी के खाते में पूरी तरह बुक किया जाएगा बशर्ते कि नेता (स्टार प्रचारक) के साथ ट्रान्सपोर्ट का उपयोग करने वाला व्यक्ति अभ्यर्थी के लिए निर्वाचन अभियान में किसी भी तरीके की भूमिका नहीं निभाता हो।

हालांकि, यदि नेता के साथ ट्रान्सपोर्ट का उपयोग करने वाला ऐसा कोई व्यक्ति अभ्यर्थी के लिए निर्वाचन अभियान में कोई भूमिका अदा करता हो तो नेता के यात्रा व्यय के 50 प्रतिशत का ऐसे अभ्यर्थियों के खाते में डाला जाएगा।

आयोग द्वारा दी गयी व्यवस्था के अनुसार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) के स्पष्टीकरण 2 की परिभाषा के अनुसार राजनैतिक दल के नेताओं (स्टार प्रचारकों) के नाम राजनैतिक दल द्वारा निर्वाचन के लिए जारी अधिसूचना की तारीख से 7 दिन की अवधि के अन्दर भारत निर्वाचन आयोग तथा राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को संसूचित करना होगा तथा ऐसे नेता,

भारत निर्वाचन आयोग और सम्बन्धित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा उसके नाम सहित प्राप्त की गई सूची की तारीख से लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा  77(1) के स्पष्टीकरण 1 के अधीन छूट प्राप्त करने के प्रात्र होंगे। तथापि, यदि नेता (स्टार प्रचारक) किसी निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचन भी लड़ रहा है तो वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के अन्दर उपगत यात्रा व्ययों हेतु तथा यात्रा व्ययों सहित अपने निर्वाचन क्षेत्र में उसके द्वारा आयोजित बैठक या रैली पर होने वाले व्यय हेतु उक्त अधिनियम की धारा 77 के अधीन वह किसी लाभ का हकदार नहीं होंगे।

 

 

 

अस्त्र-शस्त्र, मदिरा व असामाजिक तत्वों के संचरण की जा रही है सतत् निगरानी 

बहराइच 20 अप्रैल। लोक सभा सामान्य निर्वाचन-2019 के दृष्टिगत भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लागू आदर्श आचार संहिता/निर्वाचन व्यय अनुवीक्षण का अनुपालन सुनिश्चित कराये जाने के उद्देश्य से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रों के लिए तीन-तीन स्टैटिक सर्विलांस टीमों का गठन किया गया है। जनपद में गठित की गयीं सभी एस.एस. टीमें अधिसूचना जारी होने की तिथि से अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय है। निर्वाचन की शुचिता को बनाये रखने के लिए गठित टीमें पूरी निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक प्रचार खर्चो, घूस की वस्तुओं का नकद या वस्तु के रूप में वितरण, अवैध हथियारों, गोला बारूद, मदिरा या असामाजिक तत्वों आदि की आवाजाही पर निगरानी रखने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी की गयी मानक प्रचालन प्रक्रिया का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करायेंगी। 

यह जानकारी देते हुए उप जिला निर्वाचन अधिकारी राम सुरेश वर्मा ने बताया कि सभी एस.एस. टीमें व्यय संवेदनशील बस्तियों में चेक पोस्ट स्थापित कर अपने क्षेत्र में अवैध शराब, रिश्वत की वस्तुओं या भारी मात्रा में नकदी, हथियार एवं गोला-बारूद के लाने एवं ले जाने तथा असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर नजर रखेंगी। सभी टीमों को निर्देश दिया गया है कि जांच के लिए की जाने वाली सम्पूर्ण प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी करते हुए उसका वीडियो तैयार करेंगी या सीसीटीवी में पूरी जाॅच प्रक्रिया को रिकार्ड करेंगी। 

उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि स्टैटिक सर्विलांस टीमों में तैनात मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक दिन आयोग द्वारा निर्धारित प्रारूप में जिला निर्वाचन अधिकारी बहराइच को दैनिक कारगुज़ारी की रिपोर्ट प्रेषित करेंगे और उसकी एक-एक प्रति रिटर्निंग आफिसर, पुलिस अधीक्षक, सामान्य प्रेक्षक, व्यय प्रेक्षक एवं पुलिस प्रेक्षक को भी उपलब्ध करायेंगे। एस.एस. टीमों की ओर से उपलब्ध करायी गयी रिपोर्ट को संकलित कर ई-मेल/फैक्स के माध्यम से राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा पुलिस मुख्यालय के नोडल अधिकारी को भी उपलब्ध करायी जायेगी। 

जिले में तैनात सभी एस.एस. टीमों को निर्देश दिया गया है कि कार्यकलाप मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में ही जाॅच की कार्यवाही सम्पन्न करायेंगे और पूरी प्रक्रिया की विधिवत् वीडियोग्राफी भी की जायेगी। सभी टीमों को सख्त हिदायत दी गयी है कि कार्यकलाप मजिस्ट्रेट की गैर मौजूदगी में कोई जाॅच की कार्यवाही नहीं करेंगे।

जाॅच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी के दौरान दिनांक, स्थान एवं टीम संख्या की पहचान के निशान के साथ तैयार किया गया वीडियो/सीसीटीवी का रिकार्ड अगले दिन रिटर्निंग आफिसर को उपलब्ध कराया जायेगा। इस प्रकार के रिकार्ड पूरी तरह से संरक्षित रखें जायेंगे ताकि आयोग द्वारा बाद में आवश्यकता पड़ने पर सत्यापन किया जा सके। इस सम्बन्ध में व्यवस्था दी गयी है कि कोई भी नागरिक रू. 300=00 जमा करके वीडियो/सीसीटीवी रिकार्ड की प्रति हासिल कर सकते हैं। 

आयोग की ओर से व्यवस्था दी गयी है कि जब कभी भी किसी एजेंसी द्वारा जिले/राज्य की सीमाओं पर या किसी अन्य स्थान पर किसी भी प्रयोजनार्थ चेक पोस्ट स्थापित किए जायेंगे तो उस क्षेत्र में जांच के दोहराव से बचने के लिए ऐसी टीम के साथ एस.एस.टी. के सदस्य भी वहां मौजूद रहेंगे और नकदी या अन्य मदों की जब्ती की रिपोर्टिंग, एस.एस.टी. द्वारा ही की जाएगी।

श्री वर्मा ने बताया कि जांच के दौरान यदि, अभ्यर्थी, उसके एजेंट, या पार्टी कार्यकर्ता को ले जाने वाले किसी वाहन में 50,000/-रू. से अधिक की नकदी पायी जाती है या वाहन में पोस्टर या निर्वाचन सामग्री या कोई ड्रग्स, शराब, हथियार अथवा 10,000/- रू. के मूल्य से अधिक की ऐसी उपहार वस्तुएं ले जाती हुई पायी जायेंगी, जिनका इस्तेमाल निर्वाचकों को प्रलोभन दिए जाने की संभावना हो या वाहन में कोई अन्य गैर-कानूनी वस्तुयें पायी जाती हैं तो वे जब्त किए जाने की शर्त के अधीन होगी।

जांच किये जाने और जब्ती के सम्पूर्ण घटनाक्रम को वीडियो/सीसीटीवी में दर्ज किया जाएगा जो रिटर्निंग अधिकारी को प्रतिदिन प्रस्तुत किया जाएगा।यदि कोई स्टार प्रचारक अनन्य रूप से अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए 1 लाख रू. तक की नकदी ले जा रहा है, या कोई दलीय पदाधिकारी दल के कोषाध्यक्ष के उस प्रमाण-पत्र, जिसमें धनराशि और उसके अभिप्रेत उपयोग को उल्लेख किया गया हो, के साथ नकदी ले जा रहा हो तो स्थैतिक निगरानी दल में प्राधिकारीगण प्रमाण-पत्र की एक प्रति रख लेंगे और नकदी जब्त नहीं करेंगे।

यदि वाहन में 10 लाख रूपये से अधिक की नकदी पाई जाती है और किसी अपराध से जुड़े होने या किसी अभ्यर्थी या अभिकर्ता या दलीय पदाधिकारी की सहलग्नता का कोई संदेह होता है तो स्थैतिक निगरानी दल नकदी जब्त नहीं करेगा, और आयकर कानूनों के अन्तर्गत आवश्यक कार्रवाई करने के लिए आयकर प्राधिकारी को सूचना दे देगा। 

श्री वर्मा ने बताया कि जाॅच के दौरान यदि किसी अपराध होने की कोई आशंका है तो कार्यकारी मजिस्टेªट की उपस्थिति में सी.आर.पी.सी. के प्रावधानों के अनुसार एसएसटी के प्रभारी पुलिस अधिकारी द्वारा नकदी या अन्य मदों की जब्ती की जाएगी। एस.एस.टी. के प्रभारी पुलिस अधिकारी द्वारा क्षेत्राधिकारी वाले न्यायालय में 24 घण्टे के भीतर शिकायत/एफआईआर दर्ज की जाएगी। श्री सिंह ने यह भी बताया कि सभी उड़नदस्ते और स्थैतिक निगरानी दल सामान या वाहन की जांच करते समय विनम्र, मार्यादित एवं शिष्ट आचरण रखेंगे। किसी महिला द्वारा धारित पर्स की तब तक जांच नहीं की जाएगी जब तक कि वहां पर कोई महिला अधिकारी न हो। उड़नदस्ता अपने क्षेत्रों में जांच के दौरान स्थैतिक निगरानी दलों के कार्यकलाप एवं उपयुक्त आचरण का पर्यवेक्षण भी करेगा।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि जब्ती की कार्यवाही के बाद, जब्त की गई धनराशि न्यायालय द्वारा यथा-निर्दिष्ट तरीके से जमा की जाएगी और रू. 10 लाख से अधिक की नकदी की जब्ती की एक प्रति इस प्रयोजनार्थ परियोजित आयकर प्राधिकारी को भी अग्रेषित की जाएगी। श्री वर्मा ने बताया कि जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा कार्यालय समय से परे और अवकाश दिनों में भी, यदि आवश्यक हो, जब्त नकदी प्राप्त करने के लिए कोषागार इकाईयों को आवश्यक अनुदेश दे दिये गये हंै। उन्होंने बताया कि जहां कहीं भी उड़नदस्ते या स्थैतिक निगरानी दल या पुलिस प्राधिकारियों को अपने क्षेत्र में किसी अन्य संदिग्ध वस्तुओं, जिनमें भारी मात्रा में नकदी ले जाना शामिल है के बारे में सूचना मिलती है तो वे ऐसी वस्तुओं के बारे में सम्बन्धित विधि प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित करेंगेे।

 

 

सत्ताधारी दल के साधारण आचरण के सम्बन्ध में आयोग ने जारी किये दिशा निर्देश

बहराइच 20 अप्रैल। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों एवं सत्ताधारी दल के साधारण आचरण के सम्बन्ध में जारी की गयी आदर्श आचार संहिता के अनुसार सत्ताधारी दल को, चाहे वे केन्द्र के हों या सम्बन्धित राज्य या राज्यों में हों, यह सुनिश्चित करना होगा कि यह शिकायत करने का मौका न दिया जाये कि उस दल ने अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनों के लिए अपने सरकारी पद का प्रयोग किया है और विशेष रूप से मंत्रियों को अपने शासकीय दौरांे को, निर्वाचन से सम्बन्धित प्रचार के साथ नहीं जोड़ना चाहिये और निर्वाचन के दौरान प्रचार करते हुए शासकीय मशीनरी अथवा कार्मिकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, सरकारी विमानों, गाड़ियों सहित सरकारी वाहनों, मशीनरी और कार्मिकों का सत्ताधारी दल के हित में बढ़ावा देने के लिए प्रयोग नहीं किया जायेगा।

साधारण आचरण के सम्बन्ध में जारी की गयी आदर्श आचार संहिता के अनुसार सत्ताधारी दल को चाहिये कि वह सार्वजनिक स्थान जैसे मैदान इत्यादि पर निर्वाचन सभाएं आयोजित करने और निर्वाचन के सम्बन्ध में हवाई उड़ानों के लिये हेलीपैडों का इस्तेमाल करने के लिए अपना एकाधिकार न जमाएं। ऐसे स्थानों का प्रयोग दूसरे दलों और अभ्यर्थियों को भी उन्हीं शर्तो पर करने दिया जाये, जिन शर्तो पर सत्ताधारी दल उनका प्रयोग करता है।

 सत्ताधारी दल या उसके अभ्यर्थियों का विश्रामगृहों, डाक बंगलों या अन्य सरकारी आवासों पर एकाधिकार नहीं होगा और ऐसे आवासों का प्रयोग निष्पक्ष तरीके से करने के लिये अन्य दलों और अभ्यर्थियों को भी अनुमति होगी लेकिन दल या अभ्यर्थी ऐसे आवासों का प्रचार कार्यालय के रूप में या निर्वाचन प्रचार के लिये कोई सार्वजनिक सभा करने की दृष्टि से प्रयोग नहीं करेगा या प्रयोग करने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

निर्वाचन अवधि के दौरान सत्ताधारी दल के हितों को अग्रसर करने की दृष्टि से उनकी उपलब्धियाॅ दिखाने के उद्देश्य से राजनैतिक समाचारों तथा प्रचार की पक्षपातपूर्ण ख्याति के लिये सरकारी खर्चे से समाचार पत्रों में या अन्य माध्यमों से ऐसे विज्ञापनों का जारी किया जाना, सरकारी जन माध्यमों को दुरूपयोग ईमानदारी से बिल्कुल बन्द होना चाहिये। मंत्रियों और अन्य प्राधिकारियों को उस समय जब से निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन घोषित किये जाते हैं, विवेकाधीन निधि में से अनुदानों/अदायगियों की स्वीकृति नहीं देनी चाहिये।

मंत्री और अन्य प्राधिकारी, उस समय से जब से निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन घोषित किये जाते हैं, किसी भी रूप में कोई भी वित्तीय मंज़ूरी या वचन देने की घोषणा नहीं करेंगे, अथवा (लोक सेवकों को छोड़कर) किसी प्रकार की परियोजनाओं अथवा स्कीमों के लिये आधारशिलाएं आदि नहीं रखेंगे, या सड़कों के निर्माण का कोई वचन नहीं देंगे, पीने के पानी की सुविधाएं नहीं देंगे आदि या शासन, सार्वजनिक उपक्रमों आदि में ऐसी कोई भी तदर्थ नियुक्ति न की जाये जिससे सत्ताधारी दल के हित में मतदाता प्रभावित हों। केन्द्रीय या राज्य सरकार के मंत्री, अभ्यर्थी या मतदाता अथवा प्राधिकृत अभिकर्ता की अपनी हैसियत को छोड़कर किसी भी मतदान केन्द्र या गणना स्थल में प्रवेश नहीं करेंगे। 

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