कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर रामकथा अमृत ज्ञान यज्ञ का हुआ समापन

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर रामकथा अमृत ज्ञान यज्ञ का हुआ समापन

लखनऊ।

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मंगलवार को हर वर्ष की भांति आयोजित श्री राम कथामृत ज्ञान यज्ञ के समापन एवं राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के 54 वाँ वार्षिक महोत्सव में सहित्कारों ने जोर खरोस के साथ अपनी रचनाएं पढ़ी।

रचनाकारों ने देश भक्ति और आतंकवाद पर रचनाओं से खूब बौछार किया।श्री रामदयाल दोसरवैश्य स्मारक समिति काकोरी के तत्वावधान और समिति के अध्यक्ष एवं हिन्दू जन सेवा समिति के संरक्षक रमाकांत गुप्त दादू के निर्देशन एवं सहयोग में श्री बनखण्डेश्वर तीर्थ धाम श्री शीतला मन्दिर के प्रांगण में आयोजित

इस कार्यक्रम का कवियों ने सर्वप्रथम दीपप्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ सरंक्षक रमाकांत गुप्त,अध्यक्ष प्रज्ववल गुप्ता,ग्रामीण पत्रकार कल्याण समिति उत्तर प्रदेश चेयरमैन केशरी राव धारा सिंह यादव आदि ने किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता रमाकांत गुप्त व संचालन कवि शिव किशोर तिवारी ने किया।सर्वप्रथम काव्य पाठ से कवि अशोक अग्निपथी ने पढ़ा कि शत्रुओं को जड़ से मिटाने हेतु बन्धुवर,गीता भी जरूरी,पिस्तौल भी जरूरी है।कवि डॉ नीरज पाण्डेय ने पढ़ा शासन न जनमानस में जब-जब दूरी हो जाती है,इंकलाब लिखना तब मेरी मजबूरी हो जाती है।कवि शिवकिशोर तिवारी संजने मिले यदि प्रेम का प्याला,जहर भी जाम होता है।

हृदय जो प्रेम में डूबा तो,प्रभु का धाम होता है।कवि योगेश सिंह चौहान ने सही मायने में सत्ता की यह अटूट खुद्दारी है,कश्मीर पल भर में निपटा पीओकेकी बारी है।कवि रमाकान्त गुप्त कान्त(दादू) ने पढ़ा करे गलती पे जो गलती उसे हैवान कहते हैं,गिरा दे जो समन्दर में उसे शैतान कहते हैं,दौड़े जो बचाने को उसे इन्सान कहते हैं,लगा दे जो किनारे पर उसे भगवान कहतें हैं।कवि कृष्ण दिवाकर ने बिन माली के फुलवारी सूख जाती है,बिन पानी के रिकर नदियां।

कवि मान सिंह ने पढ़ा वतन उनके जो लौट कर घर आ रहे हैं,सभी त्यौहार अपने सरहदों के...।कवि अशोक अग्निपथी ने पढ़ा पीठ ठोक था कहा तात ने मान हमारा रख लेना,भारत माँ के खातिर तुम जय हिंद लहू से लिख देना।

यदि काकोरी की माटी का स्वर्णिम इतिहास नही होता,तो हम सबके इस जीवन मे मधुरिम मधुमास नही होता।इसी क्रम में आदि कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं पढ़ी।जिसे सुनकर श्रोताओं ने तालियां बजाकर वाह वाही की।देशभक्ति रचनाओं पर श्रोतागण झूमते रहे।

अधिशासी अधिकारी काकोरी दिनेश प्रताप सिंह,उमाकांत गुप्ता,अभिषेक गुप्ता निशु,राजन पाण्डेय सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग एवं हजारों की संख्या में सैकड़ों श्रोतागण मौजूद रहे हैं।

आयोजक मण्डल ने समस्त कवियों एवं पत्रकारों को अंग वस्त्र और बनखण्डेश्वर महादेव का प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।जिसके समापन पर आए हुए अतिथियों के प्रति आयोजक मण्डल ने आभार व्यक्त किया।

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