फलाहारी बाबा की महिमा लगता है श्रद्धालुओं का तांता

फलाहारी बाबा की महिमा लगता है श्रद्धालुओं का तांता

लखनऊ फलाहारी बाबा जी बाराबंकी के सोनिकपुर मैं एक कुटिया में रहते थे वहां पर रहने वाला एक लड़का महाराज जी का बहुत बड़ा प्रेमी था महाराज जी भी उसे अत्यधिक स्नेह रखते थे

प्यार करते थे वह प्रतिदिन महाराज जी से मिलने आया करता था एक दिन अचानक उस लड़के की मृत्यु हो गई या सोनिकपुर का रहने वाला था गांव वालों उसको दाह कर्म की तैयारी में लग गए लड़के के परिवार के लिए एक कष्टकारी घटना थी वह सब सुख ग्रस्त है लड़के की मृत्यु पर सभी फूट-फूट कर रो रहे थे

परिवार में मातम गांव में मातम छाया हुआ था तभी किसी ने कहा कि या महाराज जी का प्रेमी था तो महाराज जी को भी इसकी मृत्यु की सूचना दे दी जाए शाम काल का समय था महाराज जी जंगल में टहल रहे थे श्री राम जय जय राम जय जय जय जय जय जय विघ्न हरण हनुमान का कीर्तन गा रहे थे

तभी कुछ लोग लड़के के शव को लेकर आए और बाबा जी के सामने रख दिया बाबा जी ने उसको देखकर परिवार वालों से कहा कि आप सब लोग क्यों रो रहे हैं यह तो लेटा है और सो रहा है महाराज जी ने अपने कमंडल से जल लिया और लड़के के ऊपर लगते हुए बोले उठो बेटा इतने में वह लड़का उठ कर बैठ गया

बाबा जी का यह चमत्कार देखकर सब लोग बाबा जी के चरणों में गिर पड़े महाराज जी ने सोचा कि अब यहां रुकना उचित नहीं है यहां रुकने से साधना में बाधा पड़ेगी इसलिए वहां से चल दिए और बहुत दिनों के पश्चात राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब के निकट ग्राम पंचायत मवई के जंगल में पहुंचे या बहुत घना जंगल था जंगल में जाने से गांव के सभी प्राणी घर आते थे जंगल के बीच में अत्यंत घने बेल और वृक्ष के पेड़ लगे हुए थे उन्हीं के बीच में महाराज जी ने अपना आसन लगाया जंगल में एक गाय आया करती थी

वह घर में दूध नहीं देती थी जिसके किसान को शंका हुई कि चरवाहे इसका दूध निकाल कर पी लेते हैं तब चरवाहे ने छुपकर गाय का पीछा किया तो देखा कि गाय बाबा जी को दूध पिला रही है यह बात मवई कला में चरवाहों ने चर्चित कर दिया लाला परिवार के एक धनक ने जब यह बात सुनी तब वह चकित रह गया

और बाबा जी से कहा कि स्वामी जी आप जितनी जमीन पर चक्कर लगाएंगे वह जमीन में आपको आश्रम बनाने के लिए दे दूंगा महाराज जी उस जगह पर आश्रम बनाकर रहने लगे 1 दिन वहां एक भीषण वर्षा होने लगी वहां के साथ-साथ पत्थर भी जिन्हें लगे या वर्षा पांच दिन तक लगातार होती रही

जब वर्षा रुकी तो लोगों ने सोचा कि बाबा जी के दर्शन किया जाए वह सब लोग झाड़ियों के बीच रास्ते बनाते हुए काटों सर्प बिच्छूओं से बचते हुए आश्रम तक पहुंचे और तब देखा वहां पानी की बूंद भी नहीं पड़ी थी यह देखकर लोगों को बड़ा आश्चर्य हुआ लोगों की प्रतिदिन बाबा के प्रति श्रद्धा बढ़ने लगी उनके दर्शन के लिए दूर-दूर से आने लगे लोग बाबा जी के दर्शन के लिए जाते थे और बाबाजी के दाएं बाएं नागिने  रहा करती थी महाराज जी के पास यह नागिने उनके समाधि लेने के पश्चात भी फूकारे भरा करती थी।

 

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