नेता मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर विशेष

नेता मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर विशेष

गांव से निकल राजनीति के राष्ट्रीय पटल पर मुलायम छाये

लखनऊ।

भारतीय सियासत के धुरंधरों की अगर बात की जाए तो समाजवादी पार्टी के संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री/पूर्व रक्षामंत्री सांसद मुलायम सिंह यादव के बिना अधूरी नजर आती है।कुश्ती पहलवान भी रहे मुलायम को आज भी सियासत के दांव पर लगाने में माहिर माना जाता है।

मुलायम का जन्म 22 नवंबर 1939 को इटावा जिले के सैफई गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ।इनके पिता स्वर्गीय सूधर सिंह यादव अत्यंत सरल हृदय एवं कर्मठता के धनी थे।मुलायम ने आगरा विश्वविद्यालय से एमए,बीटी की डिग्री ली।वह जैन इंटर कॉलेज करहल मैनपुरी में प्रवक्ता भी रहे।

लम्बे समय तक सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।इनका विवाह वर्ष 1957 में श्रीमती सामन्तश्री से हुआ।जिनके पुत्र अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।मुलायम सिंह यादव बचपन से ही समाज में व्याप्त असमान्यताओं,विषमताओं, अनुसूचित जाति।

जनजाति,पिछड़े वर्गों तथा अल्पसंख्यकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहें।प्रसिद्ध समाजवादी नेता एवं विचारक डॉ राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा और अन्याय एवं उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा भी उन्हें डॉक्टर लोहिया से मिली।

बाद में श्री यादव मधुलिमये जैसे समाजवादी चिंतक और स्वर्गी कपूरी ठाकुर,राज नारायण एवं रामसेवक यादव जैसे जुझारू समाजवादी नेताओं के निकट संपर्क में आकर राजनीति में सक्रिय रहे।मुलायम किसानों के प्रबल समर्थक पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के विचारों से भी प्रभावित हुए।

वे चौधरी साहब के निकटतम विश्वास पात्रों में माने जाते रहे हैं।वर्ष 1954 में मात्र 15 वर्ष की आयु में उन्होंने डॉ लोहिया के आवाहन पर छोड़े गए नहर रेट आंदोलन में भाग लिया और पहली बार जेल गए। आपातकाल के दौरान वे 19 माह में जेल में रहे।उसके बाद रामकोला देवरिया के गन्ना किसानों पर पुलिस द्वारा गोली चलाए जाने के विरोध में संघर्ष किया तथा जेल गए।

वर्ष 1961 में इटावा के डिग्री कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए।वर्ष 1980 में उत्तर प्रदेश लोक दल के अध्यक्ष बने।उन्होंने आम चुनाव 1989 में जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जनता दल के चुनाव अभियान का पूरी कुशलता के साथ सफल संचालन किया।मुलायम वर्ष 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जनपद इटावा के विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।

उस समय सबसे कम उम्र के सदस्य के रूप में विधानसभा पहुंचे थे।वर्ष 1982 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए और विधान परिषद में नेता विरोधी दल के रूप में कार्य किया।श्री यादव पहले व्यक्ति हैं जिन्हें उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों में विरोधी दल का नेता होने का गौरव मिला।वर्ष 1989 के आम चुनाव में जनता दल के टिकट पर जसवंत नगर क्षेत्र से पूनः विधानसभा में निर्वाचित हुए।

श्री यादव 3 दिसंबर 1989 को जनता दल विधानमंडल दल के नेता चुने गए। इसके पश्चात 5 दिसंबर को उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।मुलायम ने 29 दिसंबर 1992 को समाजवादी पार्टी के गठन की घोषणा की।समाजवादी विचारों के आगे बढ़ाने के लिए समाजवादी पार्टी की स्थापना हुई थी।

जो जब फिर से वैचारिक बहस कर राजनीतिक दिशा को भ्रमित करने की तमाम कठिनाईयों से निपटते हुए एक सशक्त विकल्प के रूप में समाजवादी विचार को प्रस्तुत करने के लिए समाजवादी पार्टी प्रस्तुत है।नवंबर 1993 के विधानसभा चुनाव में श्री यादव पुनः निर्वाचित हुए और 4 दिसंबर 1993 को दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में लोकसभा के निर्वाचित हुए

और देश के रक्षा मंत्री के रूप में शपथ ली।वर्ष 1974 में भारतीय क्रांति दल तथा वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर विधानसभा के सदन निर्वाचित हुए।वर्ष 1977 में मुलायम जनता पार्टी की सरकार में सहकारिता और पशुपालन मंत्री बने।उनके मंत्रित्व काल में ही प्रदेश में पहली बार हर हस्ताक्षर पर सहकारी संस्थाओं में अनुसूचित जातियों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया

तथा किसानों को दिए जाने वाले सहकारी ऋणों पर ब्याज की दर कम करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।मुलायम अगस्त 2003 में भाजपा बसपा गठबंधन की सरकार के गिरने के बाद 29 अगस्त 2003 को तीसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।मुलायम को उनके प्रशंसक और पार्टी कार्यकर्ता नेता जी के सम्मानित नाम से पुकारते हैं।

उनमें साहस संकल्प और जनता से जुड़ाव जैसे नेतृत्व के यह सभी गुण मिलते हैं।उत्तर प्रदेश में वर्ष 2007 और 12 तक बहुजन समाज पार्टी की सरकार में मुलायम पर सरकार के इशारे पर 150 मुक्त में लिखे गए थे।मुलायम कन्नौज,बदायूं व आजमगढ़ से भी सांसद रहे।

साथ ही उनके राजनीतिक अस्तित्व में आने के बाद उनके परिवार के भाई शिवपाल सिंह यादव मंत्री,बेटा अखिलेश यादव मुख्यमंत्री,भतीजा धर्मेन्द्र यादव सांसद, पोता तेज प्रताप यादव सांसद,बहू डिम्पल यादव सांसद, भाई रामगोपाल सांसद,भतीजा अक्षय प्रताप यादव सांसद,आदित्य यादव सहित कई लोग राजनैतिक पदों पर रहकर जनता की सेवा कर रहे हैं।  

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