भूख प्यास व छाया के अभाव से मर रहे पशु

भूख प्यास व छाया के अभाव से मर रहे पशु

भूख प्यास व छाया के अभाव से मर रहे पशु

माल /लखनऊ ।

प्रदेश सरकार द्वारा 3 माह पहले माल विकासखंड की पंचायतों में डेढ़ दर्जन से अधिक गौशालाओं मे हजारों आवारा पशुओं को कैद करवा दिया था। लेकिन 3 माह बाद भी आधी अधूरी तैयारियों के चलते इन पशुओं की दिन पर दिन मौत हो रही है।

इतना ही नहीं गौशालाओं से भी इन पशुओं को छोड़ा जा रहा है।किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को इनकी हालत देखने वाला कोई भी नहीं दिखाई दे रहा है।जिम्मेदार सिर्फ जांच करने की बात कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं। माल विकासखंड की पंचायतों में डेढ़ दर्जन से अधिक गौशालाओं में हजारों की संख्या में पशुओ को कैद कर रखा गया है जहां पर इन पशुओं को ना खाने की व्यवस्था न पानी की व्यवस्था ना छाया की व्यवस्था जिसके चलते इन पशुओं की दिन पर दिन इस भीषण गर्मी में मौत हो रही है

इसका नमूना पाराभदराही के मजरे आबित नगर गांव में बने गौशाला में देखा जा सकता है वहीं ससपन पंचायत में भी बना गौशाला में तो दर्जनों की संख्या में पशुओं की मौत हो चुकी है। लगभग इन गौशालाओं का यही हाल है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि 3 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इन पशुओं की खाने पीने रहने की व्यवस्था को देखने वाला कोई भी जिम्मेदार आज तक नहीं दिखाई दे रहा है।

जबकि इस भीषण गर्मी में तो किस तरह काल के गाल में यह समा रहे हैं। इसका अदाजा तो इन गौशालाओं में कैद पशुओं से लगाया जा सकता है।इतना ही नहीं पारा भदराही में बने गांव मे तो इन पशुओं को छोड़ा भी जा रहा है। किसी भी समय सरकारी बिल्ला लगा हुआ इन पशुओं को इधर उधर टहलते देखा जा सकता है प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो जब सरकार इन पशुओं को कैद कराने के बाद यह बेजुबान पशु घुट घुट कर दम तोड़ते देखे जा रहे हैं तो किस तरह से जिम्मेदार अपना फर्ज निभा रहे हैं

इसका अंदाजा इन ही बेसहारा पशुओं से लगाया जा सकता है।समय रहते अगर इन गौशालाओं में बंद पशुओं कि देख रेख ना की गई तो सिर्फ गौशाला ही रहेगा बाकी इन पशुओं को तो नहीं देखा जा सकेगा। आखिर माल विकास खंड में सैकड़ों की संख्या में इन पशुओं की मौत हो चुकी है इनकी मौत का जिम्मेदार कौन होगा यह सवाल ग्रामीणों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

वहीं विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इन पशुओं की अव्यवस्था के विषय में पूछने पर अपना पल्ला झाड़ते रहते हैं बाकी जमीनी हकीकत क्या है या देखने कि शायद फुर्सत ही किसी के पास नहीं है।

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