30 वर्षों से आश्वासन के बाद भी नहीं चालू हुआ सहकारी सीमित

30 वर्षों से आश्वासन के बाद भी नहीं चालू हुआ सहकारी सीमित

रामकिशोर रावत

माल/लखनऊ 

फिर चुनाव आ गया नेता गांव गली की खाक छानने लगे हैं।लेकिन बीते तीस वर्षों से बंद एक साधन सहकारी समिति से जुड़े गांवो के किसानों के दर्द की याद किसी को नहीं आयी।समूची न्याय पंचायत के किसानों में इस समस्या को लेकर खासा गुस्सा है।

क्षेत्र की अऊमऊ न्याय पंचायत में स्थापित दनौर साधन सहकारी समिति गमन के मामले में तीस वर्ष पहले बंद हो गयी थी।समिति के तत्कालीन सचिव और बाबू पर किसानों से वसूले गए करीब बीस लाख रुपये समिति के खाते में न जमा करने के आरोप थे।जाँच के नाम पर समिति को सील किया गया दोषी पाये गए स्टाफ को जेल भेजा गया।समय बीतता गया और समिति का अस्तित्व भी समाप्त हो गया।खखरा गांव में बना समिति का भवन जमींदोज हो गया।

उस जमीन पर ग्रामीणों ने निजी उपयोग शुरू कर दिया।समिति बंद होने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कई बार कर्ज माफ़ी भी की गयी।फिर भी इस समिति को बहाल नहीं किया गया बल्कि सूत्रों की माने तो इस समिति का पंजीकरण भी निरस्त हो चुका है।

ऐसे में अऊमऊ न्याय पंचायत की लतीफपुर,दनौर,अऊमऊ,कोलवा,आदमपुर,पतौना,सरथरा,सैमसी,पतौना पंचायतों के किसान खाद और बीज के लिए अन्य सहकारी समितियों या निजी प्रतिष्ठानों पर भटकते हैं।यदि यह समिति अस्तित्व में होती तो किसानों को फसली ऋण मिलने में सुविधा होती।मुसरिहन खेड़ा गांव के बराती लाल ने बताया समिति बंद होने के कारण गांव के सभी किसानों को समस्या है।

दलथम्भा गांव के किसान रामशंकर शर्मा,राजेश रावत सहित तमाम किसान समिति बहाल न होने से नाराज हैं।लोधखेड़ा गांव के किसान पुत्तीलाल लोधी ने कहा कई बार नेताओं को समस्या बतायी गयी कोई समाधान नहीं निकला। खखरा गांव के किसानों को भी समिति के दोबारा शुरू होने की आस नहीं है।देखना होगा इस चुनाव में किसानों की इस समस्या को दूर कराने के लिये आगे आता है।

Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Comments