मानव सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा है।।

मानव सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा है।।

मानव सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा है।।

नरेश गुप्ता ब्यूरो रिपोर्ट

मछरेहटा सीतापुर
ब्लाक मछरेहटा स्थित ग्राम मूसौली में अष्टम श्री राम कथा महोत्सव एवमं विराट सन्त सम्मेलन के आयोजन के पांचवे दिन व्यासपीठ से वीरेंद्रानंद जी महाराज द्वारा महारास मथुरा गमन, कंसोद्वार, उद्वव गोपी संवाद तथा श्रीकृश्ण-रूक्मणी विवाह के शुभ प्रसंगों को महिमा मंडित किया।


वही व्यास पीठाधीश कुमारी सरोजनी शास्त्री  ने सुदामा चरित्र कथा में कहा कि मानव सेवा ही सच्ची भगवान की सेवा है,उन्होने प्रसंग में सुनाया कि सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया। राजा के मित्र राजा होते हैं रंक नहीं पर परमात्मा ने कहा कि मेरे भक्त जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। कृष्ण और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं जीव व ईश्वर तथा भक्त और भगवान का मिलन था। जिसे देखने वाले अचंभित रह गए थे।

आज मनुष्य को ऐसा ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। सेवा के द्वारा ही व्यक्ति महान बनता है। व्यक्ति जब सेवा करता है तो संत बनता है। संत सेवा करता है तब भी भगवंत बनता है। 
 संत सम्मेलन के आयोजक बाबा निर्मल दास जी महाराज ने आये हुए संतो को व भक्तो को धन्यवाद  दिया उन्होने बताया कि कथा श्रवण करने आसपास के गांव से बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन पहुंच रहे हैं।

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