महंगाई के कारण फीकी पड़ी मध्यम वर्ग के रसोई का स्वाद

महंगाई के कारण फीकी पड़ी मध्यम वर्ग के रसोई का स्वाद

प्याज की बढ़ती कीमत से गरीबों के निकल रहे आंसु

परतावाल/महराजगंज -

आम आदमी के खाने की पहुंच से दूर हुई सब्जियां। सम्पूर्ण आहार थोथली किताबी बातें साबित हो रही है। सरकारों की कीमतों पर नियंत्रण करने के दावे खोखले दिखाई दे रहें हैं।

उल्लेखनीय है कि जिस तरह कुछ दिनों से देश में महंगाई हाबी हुई है उससे आम आदमी के जन जीवन पर काफी असर पड़ा है। लोगों को रहन सहन और खाने पीने के लिए बहुत ही जद्दोजहद करना पड़ रहा है। आम तौर पर घरों की महिलाओं को प्रति दिन महंगाई की समस्या से दो चार होना पड़ता है।

सब्जियां इतनी महंगी हो गई है कि जिसके असर से रसोई का स्वाद बिगाड़ने लगा है। टमाटर, प्याज, लहसुन, गोभी व हरी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं और मध्यम वर्गीय व्यक्तियों के पहुंच से दूर हो गया है। जिसके कारण आम आदमी के रसोईघर से सब्जियां गायब सी हो गई है।

तेल और दालों की कीमतों में कभी राहत नही मिलता है जो इनसे ही भोजन की थाल कुछ भरा लगे। आमतौर पर जीवन जीने के लिए जो सामान्य भोजन जिसमें चावल दाल रोटी और सब्ज़ी हो को एक साथ अपनी थाली में जुटा पाना मुश्किल हो गया है।

गौरतलब है कि स्वस्थ मनुष्य के लिए न्यूट्रिशन द्वारा जो सम्पूर्ण आहार की परिकल्पना की गई है उसमें कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन वसा विटामिन खनिज व लवण की समुचित मात्रा होती है जो मनुष्य के स्वस्थ जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। इसकी अनुपस्थिति में मनुष्य अस्वस्थ और बड़ी बिमारियों का शिकार हो जाता है।

ऐसे में सरकार अपने तमाम कोशिशों के बाद भी महंगाई पर अंकुश लगाने में अबतक असफल नजर आ रही है। जिस देश में रहने वाले लोग स्वस्थ और मजबूत नही होंगे, वह देश और समाज कैसे स्वस्थ और मजबूत हो सकता है यह एक यक्ष प्रश्न है।

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