पुलिस का अमानवीय चेहरा एक बार फिर सुर्ख़ियों में है 

पुलिस का अमानवीय चेहरा एक बार फिर सुर्ख़ियों में है 

संवाददाता -अजय कुमार यादव के साथ रूचि सिंह की रिपोर्ट


घटना महिलाबाद थाने की है जहां पुलिस थाने के बाहर एक महिला बेहोश पड़ी थी और पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया  महिला का कहना है कि उसके पति और ससुराल वालों ने उस पर अत्याचार किया है उसको बहुत मारा है उसको नशीली दवाई खिलाई है जान से

मारने की कोशिश की है जिसकी वजह से महिला की तबीयत खराब हो गई, और महिला उसी हालत मेअपनी शिकायत दर्ज कराने थाना गई लेकिन उसकी शिकायत नहीं दर्ज की गई और पुलिस  ने यह कहकर उसे पुलिस थाने से बाहर कर दिया कि हम अपना काम करें या तुम्हारा

काम करें जब महिला पुलिस थाने के बाहर बेहोश पड़ी रही तो उसके परिवारजनों ने उसको अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन अभी तक पुलिस की तरफ से कोई भी ना तो शिकायत लिखी गई है ना ही किसी तरह की कोई कार्यवाही की गई है


कितने ही शर्म की बात है कि हमारे देश की पुलिस जो  की कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए है, लेकिन ना तो उसकी जवाबदेही देश की जनता के प्रति है  और ना ही उसका व्यवहार ऐसा है कि लोग पुलिस के पास जाकर अपनी शिकायत  दर्ज करना सही समझते है |

लोग पुलिस के पास जाने से डरते हैं | पुलिस और जनता के बीच में जो जुड़ाव होना चाहिए , वह जुड़ाव कहीं है ही नहीं |लोगों के मन में पुलिस के लिए एक ऐसी छवि है जिसमें लोगों को लगता है कि पुलिस सिर्फ और सिर्फ उनका शोषण करती है यही कारण है कि पुलिस के पास

लोग जाने से कतराते हैं शायद लोगों के मन में यह बात बैठ गई है कि अगर वह पुलिस के पास जाएंगे तो पुलिस उनकी बात नहीं सुनेगी या हो सकता है पुलिस उस अपराध के लिए उन्हीं को जिम्मेदार ठहरा दें  इसीलिए लोग खुद को अपराध से दूर रखना ही उचित समझते हैं

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